लेखक परिचय

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

डॉ. शुभ्रता मिश्रा वर्तमान में गोवा में हिन्दी के क्षेत्र में सक्रिय लेखन कार्य कर रही हैं। डॉ. मिश्रा के हिन्दी में वैज्ञानिक लेख विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं । उनकी अनेक हिन्दी कविताएँ विभिन्न कविता-संग्रहों में संकलित हैं। डॉ. मिश्रा की अँग्रेजी भाषा में वनस्पतिशास्त्र व पर्यावरणविज्ञान से संबंधित 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । उनकी पुस्तक "भारतीय अंटार्कटिक संभारतंत्र" को राजभाषा विभाग के "राजीव गाँधी ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार-2012" से सम्मानित किया गया है । उनकी एक और पुस्तक "धारा 370 मुक्त कश्मीर यथार्थ से स्वप्न की ओर" देश के प्रतिष्ठित वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है । मध्यप्रदेश हिन्दी प्रचार प्रसार परिषद् और जे एम डी पब्लिकेशन (दिल्ली) द्वारा संयुक्तरुप से डॉ. शुभ्रता मिश्रा के साहित्यिक योगदान के लिए उनको नारी गौरव सम्मान प्रदान किया गया है।

Posted On by &filed under जन-जागरण, विविधा, स्‍वास्‍थ्‍य-योग.


 

bird-fluडॉ. शुभ्रता मिश्रा

सन् 2014 में पोलियो मुक्त होने के बाद 5 सितम्बर 2016 को कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग ने भारत को बर्ड फ्लू अर्थात् एवियन इन्फ्लूएंजा (एच5एन1) से भी मुक्त घोषित किया था और इसकी सूचना विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (ओआईई) को भी दी गई थी। लेकिन इस घोषणा के महज एक महीने के बाद दिल्ली में दो दिनों के भीतर नौ जल पक्षियों कम से कम 10 और अन्य पक्षियों के शहर में मृत पाए जाने की खबरें आने लगीं। हांलाकि अभी ये फ्लू रोजी पेलीगन और प्रिटेंड स्टार्स पक्षी में पाया गया है। इसी के चलते दिल्ली के चिड़ियाघर को बंद भी कर दिया गया है। धीरे धीरे बर्ड फ्लू के मामले और उजागर होने लगे हैं। आंकड़ों से स्पष्ट हो रहा है कि इस समय देश में चार राज्य बर्ड फ्लू की चपेट में हैं और अब तक 115 पक्षियों की मौत हो चुकी है। हालांकि घोषणा के पूर्व बर्ड फ्लू का अंतिम मामला 9 मई 2016 को कर्नाटक के हुमनाबाद के एक पोल्ट्रीफार्म में पाया गया था, जहां लगभग 33,000 पक्षियों को मारकर सफाई का काम किया गया था। बर्ड फ्लू पहली बार 2006 में भारत में पाया गया था और लाखों मुर्गियों और बत्तखों को उनमें वायरस होने के कारण मार दिया गया था।  पश्चिम बंगाल में 2008 में बर्ड फ्लू फैलने और केरल में 2014 के प्रकोप से पता चला है कि नम ठंडी जलवायु इसके वायरस के त्वरित प्रसार के लिए अनुकूल होती है। मई 2016 में जब कर्नाटक से बर्डफ्लू को लेकर यह समाचार आया था, ठीक उसी समय जर्मनी और लाओस में भी बर्ड फ्लू के फैलने की रिपोर्ट सामने आई थी। कहने का तात्पर्य यह है कि बर्ड फ्लू रोग के वैश्विक प्रसार का असर सही मायनो में विश्व के हर देश पर पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवम् कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार भारत और एशिया के पांच अन्य देशों चीन, मिस्र, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और वियतनाम में मुर्गीपालन व्यवसाय में साफ-सफाई पर समुचित ध्यान नहीं देने से बर्ड फ्लू अभी भी बना हुआ है।

 

बर्ड फ्लू, जिसे चिकित्सा की भाषा में एवियन इन्फ्लूएंजा कहते हैं, एक प्रकार का वायरल संक्रमण होता है, जो एक पक्षी से दूसरे पक्षी में इन्फ्लूएंजा ए नामक वायरस के एक समूह द्वारा फैलता है। बर्ड फ्लू संक्रमण चिकन, टर्की, गीस और बतख की प्रजाति जैसे पक्षियों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। हांलाकि बर्ड फ्लू मनुष्यों के लिए भी घातक होता है लेकिन सिर्फ उन लोगों के लिए जो संक्रमित मुर्गियों या अन्य पक्षियों के बहुत पास रहते हैं। एक बार यदि किसी मनुष्य को यह हो जाता है, तो ये वायरस उनकी आंखों, मुंह और नाक के माध्यम से अन्य लोगों में फैलता है। इसके अलावा संक्रमित पक्षियों की सफाई करने अथवा उन्हें नोंचने से भी फैलता है। यदि बर्ड फ्लू का सही उपचार न हुआ, तो इस वायरस का प्रभाव मनुष्य के विभिन्न अंगों पर घातक रुप से पड़ सकता है। इस वायरस के विभिन्न उप-प्रकार (स्ट्रेन) भी होते हैं। अधिकांश एवियन इन्फ्लूएंजा वायरसों से मानव संक्रमित नहीं होते हैं, हांलाकि इनमें से कुछ स्ट्रेनों से मानव संक्रमित हो जाते हैं। मनुष्यों में बर्ड फ्लू का संक्रमण फैलाने वाले इन्फ्लूएंजा वायरसों में एच5एन1, एच7एन3, एच7एन9 और एच9एन2 शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी वेबसाइट पर इस रोग की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि एच5एन1 बर्ड फ्लू मानव में पाया जा सकता है, लेकिन यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता नहीं है। फिर भी, बर्ड फ्लू के वायरसों पर कड़ी नजर रखना अनिवार्य होता है। एच5एन1 ही वह मूल बर्ड फ्लू है, जिसने 2003 में पूरे एशिया में कहर बरपाया था, यहां तक कि उस समय कुछ मनुष्यों में भी इसके मामले दर्ज किए गए थे। 2004 में, कुछ देशों जैसे न्यूजीलैंड ने इस तरह के रोग के प्रसार को रोकने के लिए आपातकालीन योजना भी बनाई थी। 2014 में स्टार (कनाडा) में लिखा गया था कि बर्ड फ्लू फ्लू के एच5एन1 ने दस सालों में 700 से कम लोगों को हानि पहुँचाई थी। संक्रमित पाए गए लगभग 60 प्रतिशत लोगों की मृत्यु हो गई थी। अतः भले ही यह संक्रमण दुर्लभ हैं, परन्तु इसकी गंभीरता भी उतनी ही अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अभी भी लगातार उन देशों के संपर्क में है जहां इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आने लगे हैं। ऐसा देखा गया है कि इस बार भारत में बर्ड फ्लू के एच5एन8 वायरस ने अपने पांव पसारने शुरु कर दिए हैं। यद्यपि भारत की राजधानी दिल्ली में एच5एन1 वायरस तेजी से फैल रहा है। हरियाणा में भी हिसार की ब्लू बर्ड झील में पिछले दिनों 12 बतखों की मौत बर्ड फ्लू के संक्रमण से होने की पुष्टि हो गई है। इसके बाद अब ब्लू बर्ड झील और इसके आसपास के क्षेत्र में करीब 800 बतखों और पक्षियों को मारा जाएगा।

 

मनुष्यों में बर्ड फ्लू के सामान्य लक्षणों में बुखार आना, हमेशा कफ बना रहना, नाक बहना, सिर में दर्द रहना, दस्त होना, जी मिचलाना, गले में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, आंख में कंजंक्टिवाइटिस, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना, सांस लेने में तकलीफ होना, सांस ना आना और निमोनिया होना प्रमुख हैं। बर्ड फ्लू के इलाज के लिए एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जाता है। इस बीमारी में पूरी तरह आराम करना बहुत आवश्यक होता है। अधिक से अधिक तरल पदार्थों के सेवन के साथ साथ उचित व स्‍वस्‍थ आहार लेना भी आवश्यक होता है। बर्डफ्लू का संक्रमण न फैले इसके लिए बहुत सी सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति को एकांत में रखा जाता है और कम से कम लोगों को मरीज से मिलने दिया जाता है। बीमारी की चपेट में आए स्थान के आसपास के एक किलोमीटर के दायरे में इसे नियंत्रित करने के लिए अंडे, चारा, कूड़े और अन्य संक्रमित सामग्री नष्ट करने सहित समस्त पोल्ट्री को समाप्त करने, बीमारी की चपेट में आए स्थान से पोल्ट्री और पोल्ट्री उत्पादों की आवाजाही पर रोक, संक्रमित परिसरों को संक्रमण से मुक्त करने की मुहिम छेड़ी जाती है। इसके अलावा जिन शहरों में बर्ड फ्लू के मामले सामने आते हैं वहां सख्ती से मरे हुए पक्षियों से दूर रहने, वहां नॉनवेज न खाने, मास्‍क पहनकर बाहर निकलने और आस-पास किसी पक्षी की मौत होने पर संबंधित विभाग को तुरंत सूचना देने को कहा जाता है। इन मामलों के बाद से भारत का स्वास्थ्य विभाग ऐहतियाती कदम उठाने में जुट गया है। बर्ड फ्लू से निपटने के लिए अब केंद्रीय कृषि मंत्रालय के पशुपालन विभाग डब्लूएचओ से संपर्क में है। साथ ही पशुपालन विभाग ने डीडीजी एनिमल साइंस की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है, जो इस रोग की प्रकृति, इसके कारणों और इसके खतरों पर शोध करने के साथ साथ उन स्थानों पर नजर रखेगी कि जहां से भी बर्ड फ्लू का मामला पाया जाता है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *