‘मुल्क हिंदुस्तान हूँ….’

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कुलदीप विद्यार्थी झाड़ियों पर वस्त्र, लोहित देह से हेरान हूँ, कल मैं कब्रिस्तान था औ’ आज मैं शमशान हूँ। कौनसी वहसत भरी हैं आपके मस्तिष्क में, पाँव पर कल ही चली मैं, एक नन्हीं जान हूँ। नोच लूँगा मैं हवस में बाग की कलियाँ सभी, मत कहो इंसान मुझको, मैं तो बस शैतान हूँ। हैं… Read more »

दर्दो को कागजो पर लिखता रहा

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जिन्दगी के दर्दो को,कागजो पर लिखता रहा मै बेचैन था इसलिए सारी रात जगता रहा जिन्दगी के दर्दो को,सबसे छिपाता रहा कोई  पढ़ न ले,लिख कर मिटाता रहा  मेरे दामन में खुशिया कम् थी,दर्द बेसुमार थे खुशियों को बाँट कर,अपने दर्दो को मिटाता रहा मै खुशियों को ढूढता रहा,गमो के बीच रहकर वे खुशियों को… Read more »

साहित्य प्रकाशन बनाम सोशल मीडिया का प्रभाव

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डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’   एक दौर था, जब साहित्य प्रकाशन के लिए रचनाकार प्रकाशकों के दर पर अपने सृजन के साथ जाते थे या फिर प्रकाशक प्रतिभाओं को ढूँढने के लिए हिन्दुस्तान की सड़के नापते थे, परंतु विगत एक दशक से भाषा की उन्नति और प्रतिभा की खोज का सरलीकरण सोशल मीडिया के माध्यम से… Read more »