किसान आन्दोलन

किसान आन्दोलन में कृषक पक्ष

हैरानी इस बात पर भी है कि बैंकों के कुल ऋण में उद्योगपतियों की हिस्सेदारी 41.71 फीसदी है, जबकि किसानों की महज 13.49 प्रतिशत ही है। जाहिर है, उद्योगपतियों का ही बैंकों का ज्यादा कर्ज फंसा हुआ है। यही वजह है कि पिछले 17 महीनों में बैंकों का एनपीए बढ़कर दोगुने से ज्यादा हो गया है। कारोबारियों के इन डूबे कर्जों को न्यायसंगत ठहराते हुए रिर्जव बैंक की दलील है कि आर्थिक बद्हाली के कारण कारोबारी कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं।