नेहरू

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद को प्रताड़ित होना पड़ा था 

डा. राधेश्याम द्विवेदी बस्ती जिले से भी सम्बन्ध :-भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

नेहरू, चीन और शांतिपूर्ण सह -अस्तित्व की अवधारणा

नेहरूजी की विदेश नीति की समीक्षा आवश्यक है। विशेषत: तब जबकि हमारी विदेश नीति कई बार हमारे हितों को संरक्षित करने में असफल रही है। जिस समय राष्ट्र ने स्वतंत्रता प्राप्त की थी-हमें देखना होगा कि उस समय की परिस्थितियों का हम किस प्रकार सामना कर रहे थे? हमारे विषय में लोगों की क्या राय थी? हमारे आसपास में, पड़ोस में क्या घट रहा था?

कश्मीर समस्या, प्रजातंत्र, जिहाद और नेहरू |

उसके बाद जमात-ए-इस्लामी के विभिन्न धड़ों ने एकजुट होकर यूनाइटेड मुस्लिम फ्रंट बनाकर 1987 के चुनाव में भागीदारी की | आम मान्यता है कि 1987 के चुनाव कश्मीर के चुनावी इतिहास के सबसे काले चुनाव थे. बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया गया और नेशनल कॉन्फ्रेंस को 40 तथा कांग्रेस को 26 सीटें मिलीं जबकि मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट को केवल 4 | भारी पैमाने पर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर मतदान प्रतिशत 75 तक पहुंचा दिया गया, इस बात को बाद में स्वयं फारूख अब्दुल्ला ने भी एक टीवी इंटरव्यू में स्वीकार किया | और उसके बाद शुरू हुआ 1990 का हिंसक दौर, जिसमें कश्मीर घाटी हिन्दू विहीन बना दी गई | हिंसा का दौर तो अब खत्म हो गया है और एक नया दौर शुरू हुआ है, जिसमें कश्मीर के नौजवान लड़ रहे हैं इस्लाम के नाम पर।

नेहरू और लोकतंत्र पर दाग

गांधी के राजनीतिक शिष्य या उत्तराधिकारी पं. नेहरू थे। इसलिए उन्हेंाने गांधी के कई गुरों को बड़ी सूक्ष्मता से अपनाया और उन्हें सही अवसर आने पर प्रयोग भी किया। अत: नेहरू ने अपने अभिन्न मित्र मौलाना आजाद को देश की संसद में लाने की जिद की, और तत्कालीन मुख्यमंत्री पं. गोविन्दवल्लभ पंत को अपनी इच्छा बताकर सारी व्यवस्था करने का निर्देश दे दिया। मुख्यमंत्री ने रामपुर के जिलाधिकारी पर दबाब बनाया और हारे हुए प्रत्याशी को जीत का सेहरा बांधकर दूल्हा की भांति संसद में भेज दिया।

सत्ता सौंपने से पहले जांच ली गई थी नेहरू की ब्रिटेन-परस्त अंग्रेज-भक्ति

मालूम हो कि ब्रिटेन को सैन्य-शक्ति के सहारे भारत से खदेड भगाने के लिए आजाद हिन्द फौज कायम कर अपनी सरकार बना लेने के पश्चात जर्मनी-जापान के सहयोग से भारत के पूर्वोत्तर सीमा-क्षेत्र में घुस इम्फाल एवं कोहिमा पर कब्जा कर लेने वाले सुभाष चन्द्र बोस ने जुलाई १९४५ में बंगाल पर आक्रमण करने की पूरी तैयारी कर ली थी और खुली धमकी दे रखी थी ।

देश का वास्तविक गद्दार कौन? गांधी-नेहरू या सावरकर

भाग-2 देश की राष्ट्रभाषा हिंदी के साथ कांग्रेस की दोगली और राष्ट्रद्रोही मानसिकता प्रारंभ से

देश का वास्तविक गद्दार कौन? गांधी-नेहरू या सावरकर ? भाग 1

कांग्रेस ने स्वात्रय वीर सावरकर ‘गद्दार’ कहकर राष्ट्रीय भावनाओं के साथ एक बार पुन: ‘गद्दारी’