विपक्ष

नोटबंदी पर विपक्ष हो गया फ्लाप ?

देश के राजनैतिक परिदृश्य व सामाजिक परिवेश में एक बहुत बड़ा बदलाव महसूस किया जा रहा है। घोर वामपंथी राज्यों में भी बंद फ्लाप हो गया । एक समय था जब वामदलों की एक आवाज से ही पूरा दक्षिण भारत व बंगाल पूरी तरह से बंद हो जाता था। तब मीडिया बिलकुल अगल तरह से भारत बंद आदि को पेश करता था। लेकिन इस बार तो सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि स्वयं वामपंथी दलों के कार्यालयों के बाहर लगने वाली दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान भी पूरी तरह से खुले रहे।

लोकतांत्रिक मर्यादा का चीरहरण करता विपक्ष

वर्तमान में देश में विरोधी दलों द्वारा जिस प्रकार की राजनीति की जा रही है, वह देश को पीछे ले जाने की कवायद मानी जा सकती है। इसे लोकतांत्रिक मर्यादा का चीरहरण भी कहा जा सकता है। विपक्ष द्वारा किए गए भारत बंद का आहवान देश की जनता ने पूरी तरह से नकार दिया। यहां तक कि देश के व्यापारियों ने भी इससे किनारा करके विपक्ष को यह जता दिया कि वह भारत बंद के विरोध में है।

नोटबन्दी : विपक्ष का ‘भारत बन्द’ फेल होना क्या दर्शाता है ?

आज #नोटबन्दी के फैसले को 20 दिन पूरे हो रहे हैं और लगभग इतने ही दिन की मेहनत सरकार की आलोचना करते हुऐ विपक्ष को भी हो चुके हैं । जब से मोदी सरकार ने नोटबन्दी का फैसला लिया है तब से लगातार विपक्ष के विरोध के कारण शीतकालीन सत्र भी बाधित है ।

#नोटबन्दी: मोदी के मास्टर स्ट्रोक के बाद क्या हारी हुई बाजी खेल रही है विपक्ष

केंद्र सरकार के नोटबन्दी वाले फैसले के एक हफ्ते के बाद विपक्ष अचानक मुखर हुआ और पीएम मोदी के ऊपर एक के बाद एक हमले शुरू कर दिए ।फ़िलहाल विरोध का आलम ये है कि शीतकालीन सत्र भी नोटबन्दी की भेंट चढ़ने वाला है । ये सारे हमले गरीबों की कंधे पर बन्दूक रखकर किये जा रहे हैं क्योंकि सरकार द्वारा अचानक लिए गये इस फैसले से आम लोगो को कुछ दिक्कतों का सामना तो निःसन्देह करना पड़ रहा है लेकिन अधिकांश लोग सरकार के इस फैसलों को सही बता रहे हैं । शायद विपक्ष भी एक हारी हुई लड़ाई लड़ रही है जिसका नेतृत्व भी कांग्रेस के स्थान ममता बनर्जी कर रही हैं ।