वाद, विवाद, अनुवाद की छाया से मुक्त हो हिन्दी पत्रकारिता

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ऋतेश पाठक हिन्दी के सर्वप्रथम दैनिक उदन्त मार्तण्ड के प्रथम और अंतिम संपादक पंडित युगल किशोर शुक्ल ने लिखा था ‘‘इस ‘उदन्त मार्तण्ड’ के नांव पढ़ने के पहिले पछाहियों के चित का इस कागज नहोने से हमारे मनोर्थ सफल होने का बड़ा उतसा था। इसलिए लोग हमारे बिन कहे भी इस कागज की सही की… Read more »

कौन सी चीज इतिहास बनाती है और किस पर शर्म करें!

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सुधा सिंह भारतीय मीडिया खासकर हिन्दी मीडिया में शर्म, अपमान, पराजय, हार, असफलता और रोष की भाषा कब बोली जाती है कभी सोचा है आपने ? केवल खेल की खबरों की रिपोर्टिंग करते समय। जनता के मुद्दे पर नहीं। सरकार की नीतियों की आलोचना करते समय नहीं। विपक्ष की भूमिका और दायित्वों की बात करते… Read more »

हिन्दी पत्रकारिता के भविष्‍य की दिशा

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– डा. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री आज जब हम हिन्दी पत्रकारिता की बात करते हैं तो यह जानकर आश्चर्य होता है कि शुरूआती दौर यह ध्वज उन क्षेत्रों में लहराया गया था जिन्हें आज अहिन्दी भाषी कहा जाता है। कोलकाता का विश्वामित्र ऐसा पहला ध्वज वाहक था। उत्तर प्रदेश, बिहार और उन दिनों के सी.पी. बरार… Read more »

बाजार की चुनौतियों से बेजार हिन्दी पत्रकारिता

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आज भूमंडलीकरण के दौर में हिन्दी पत्रकारिता की चुनौतियां न सिर्फ बढ़ गई हैं वरन उनके संदर्भ भी बदल गए हैं। पत्रकारिता के सामाजिक उत्तरदायित्व जैसी बातों पर सवालिया निशान हैं तो उसकी नैसर्गिक सैद्धांतिकता भी कठघरे में है। वैश्वीकरण और नई प्रौद्योगिकी के घालमेल से एक ऐसा वातावरण बना है जिससे कई सवाल पैदा… Read more »