‘हिन्दस्वराज’ में गांधी जी की शिक्षा नीति

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शिक्षा के उद्देश्य पर चलने वाली बहस पुरानी है। भारत की आधुनिक शिक्षा पध्दति अंग्रेजी राज की देन है। अंग्रेजी राज की शिक्षा का उद्देश्य भारत की सभ्यता को अंग्रेजी सभ्यता में ढालना था । भारतीय संस्कृति और परम्पराओं के प्रति आत्महीन भाव पैदा करना था। अंग्रेजी राज को जायज ठहराने वाले विद्वान पुरूष पैदा… Read more »

गाँधी जी – कल, आज और कल : इसरार अहमद

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शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा जो गाँधी जैसे महान व्यक्तित्व वाले महापुरुष को नहीं जानता और तस्वीर को पहचानता न होगा. यह भारत और भारत-वासीयो का सौ- भाग्य था जो उनके जैसा सर्व गुण संपन महापुरुष मिला जिसने भारत की तस्वीर और इतिहास बदल दिया. उनके और उनके दुवारा बनाई हुए एक संघठन (जिसमे… Read more »

गाँधी जी और आज की यांत्रिक सभ्यता – भाग-3

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गाँधी जी ने सभ्यता के  जो रूप बताए है, वे  विचारणीय है। संवेदनशील पाठक आत्म-मंथन के लिए विवश होगा और सोचेगा, कि क्या सभ्यता के ये ही नए कँटीले शिखर हैं? गाँधी जी के विचारों का एक लम्बा अंश यहाँ प्रस्तुत करने का मोह संवरण नहीं कर पा रहा हूँ. उन्होंने कहा कि सौ साल… Read more »

गाँधी जी और आज की तथाकथित यांत्रिक सभ्यता – भाग-2

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गाँधी जी ने इग्लैंड की पार्लियामेंट को ‘बाँझ और वेश्या’ कहा था। बाद सें उन्होंने वेश्या शब्द को विलोपित कर दिया था। लेकिन उनका आरोप सही था। आज भारतीय परिप्रेक्ष्य में भी ये दोनों शब्द अप्रासंगिक नही हैं। हमारी संसद जनहित में अनेक निर्णय तो करती है लेकिन वे कार्यरूप में परिणत नही हो पाते।… Read more »

गाँधी जी और आज की तथाकथित यांत्रिक सभ्यता – भाग-1

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‘प्रवक्ता’ के माध्यम से ‘हिंद स्वराज्य’ पर गंभीर-विमर्श की एक सार्थक शुरुआत  हुई. पूरी टीम को बधाई. अनेक विचार पढने के बाद  मेरे  मन भी हलचल हुई. सोचा, कि कुछ तो लिखा जाये. ‘हिंद स्वराज्य’ में गाँधी जी ने यंत्रो को लेकर भी गंभीर चर्चा की है. मै गाँधी जी के दर्शन के सन्दर्भ में… Read more »

अंधेरों की चीरती शब्दों की रौशनी – हिन्द स्वराज्य की शताब्दी वर्ष पर विशेष

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महात्मा गांधी की मूलतः गुजराती में लिखी पुस्तक हिन्द स्वराज्य एक बार फिर अपने सौ साल पूरे होने पर चर्चा में है। महात्मा गांधी की यह बहुत छोटी सी पुस्तिका कई सवाल उठाती है और अपने समय के सवालों के वाजिब उत्तरों की तलाश भी करती है। सबसे महत्व की बात है कि पुस्तक की… Read more »

हिन्द स्वराज में दुनिया के सभी समस्याओं का समाधान नहीं है – गौतम चौधरी

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हिन्द स्वराज पर टिप्पणी करने से पहले इस देश के अतीत और अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि को खंगाला तो लगा कि जो गांधी कह रहे हैं वह हम पीढियों से करते आ रहे हैं। मेरा ननिहाल दरभंगा से सीतामढी की ओर जाने वाली छोटी लाईन के रेलवे स्टेषन कमतौल में है। मेरे मामा साम्यवादी थे और… Read more »

हिंद स्वराज की प्रासंगिकता पर विमर्श का आयोजन

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१० अक्तूबर को भारत नीति संस्थान के द्वारा दीनदयाल शोध संस्थान, नई दिल्ली में ” वर्तमान सन्दर्भ में हिंद स्वराज की प्रासंगिकता ” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया . इस संगोष्ठी में वरिष्ठ गांधीवादी चिन्तक और पूर्व सांसद राम जी सिंह , जेएनयु के प्राध्यापक अमित शर्मा , पांचजन्य के सम्पादक बलदेव… Read more »

हिन्द स्वराज : छुटकारा

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नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्‍मा गांधी की महत्‍वपूर्ण पुस्‍तक ‘हिंद स्‍वराज’ का अंतिम पाठ पाठक: आपके विचारों से ऐसा लगता है कि आप एक तीसरा ही पक्ष कायम करना चाहते हैं। आप एक्स्ट्रीमिस्ट भी नहीं है और माडरेट भी नहीं है। संपादक: यहां आपकी भूल होती है। मेरे मन में तीसरे पक्ष का कोई खयाल नहीं… Read more »

हिंद स्वराज : शिक्षा

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नवभवन द्वारा प्रकाशित महात्‍मा गांधी की महत्‍वपूर्ण पुस्‍तक ‘हिंद स्‍वराज’ का चौदहवां पाठ पाठक: आपने इतना सारा कहा परन्तु उसमें कहीं भी शिक्षा तालीम की जरूरत तो बताई ही नहीं। हम शिक्षा की कमी की हमेशा शिकायत करते रहते हैं। लाजिमी तालीम देने का आन्दोलन हम सारे देश में देखते हैं। महाराजा गायकवाड ने (अपने… Read more »