demonetization of higher denomination banknotes

स्वान्त्र्योत्तर भारत का सर्वाधिक बड़ा निर्णय : उच्च मूल्यवर्ग के बैंकनोटों का विमुद्रीकरण

कल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए 500 और एक हजार रुपये के पुराने नोट बंद करने की घोषणा की और कि अब लोगों के पास मौजूद पांच सौ और एक हजार के नोट बाजार में मान्य नहीं होंगे तो देश भर में गजब का उत्साह छा गया. सम्पूर्ण देश के आम नागरिक इस स्थिति में अपनी विकट व विकराल समस्याओं को भी समझ रहें थे तब जिस प्रकार के प्रसंशा भाव को वे व्यक्त कर रहे थे या देश के नेतृत्व पर जिस प्रकार विश्वास व्यक्त कर रहे थे वह गजब के चरम राष्ट्रवाद के क्षण थे

भारतीय मुद्रा का विमुद्रीकरण : एक बार फिर

ख्यतः अघोषित धन पर नियंत्रण रखने के प्रयोजन से, जनवरी 1946 में उस समय संचलन में मौजुद `.1000 और `.10000 के बैंकनोटों का विमुद्रीकरण किया गया था। वर्ष 1954 में `.1000, `.5000 और `.10000 के उच्च मूल्यवर्ग के बैंकनोटों को फिर से जारी किया गया और जनवरी 1978 में इन बैंकनोटों (`.1000, `.5000 और `.10000) को एक बार फिर विमुद्रीकृत किया गया।