कहानी कहानी / प्रश्नचिह्न(?) July 12, 2011 / December 9, 2011 by आर. सिंह | 2 Comments on कहानी / प्रश्नचिह्न(?) आर. सिंह मार्क्स ने कहा था, “चर्च का पुजारी जानता है कि ईश्वर नहीं है, और अगर है भी तो चर्च में तो कभी नहीं आयेगा.” मोहन ने यह पढा था और यह बात घर कर गयी थी उसके दिल में. वह था भी कुछ असाधारण सा.बचपन से ही अत्यंत तीव्र बुद्धि वाला होते हुए […] Read more » God ईश्वर
व्यंग्य वो भगवान से भी बड़ा है… July 4, 2011 / December 9, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव आज के दौर का सबसे ताकतवर प्राणी-दलाल है। सतयुग के जंगलों में जो शौर्य कभी डायनासौर का हुआ करता था कलयुग के सभ्य समाज में वही जलवा दलाल का है। इस प्रजाति के जीव की आज यत्र-तत्र-सर्वत्र पूजा होती है। यह किसी पद पर नहीं होता मगर नाना प्रकार के पद इसके […] Read more » God दलाल
धर्म-अध्यात्म ईश्वर डराने के लिए नहीं है ? May 28, 2011 / December 12, 2011 by प्रमोद भार्गव | 4 Comments on ईश्वर डराने के लिए नहीं है ? प्रमोद भार्गव अकसर हमारे प्रवचनकर्ता और कर्मकाण्ड के प्रणेता कहते सुने जाते हैं कि ईश्वर से डरो ! अतीन्द्रीय शक्तियों से डरो ! ऐसा केवल हिन्दू समाज के धर्माधिकारियों का कहना नहीं है, मुस्लिम, ईसाई, बौध्द और जैन धर्म के प्रवर्तक भी परलोक सुधारने व अगले जन्म में सुखी व समर्ध्द जीवन व्यतीत करने हेतु […] Read more » God ईश्वर
धर्म-अध्यात्म प्रकृति ईश्वर ही तो है… April 30, 2011 / December 13, 2011 by दिवस दिनेश गौड़ | 13 Comments on प्रकृति ईश्वर ही तो है… दिवस दिनेश गौड़ मित्रों अभी कुछ दिन पहले किसी ने मुझसे कहा कि भाई आज से मैं मंदिरों में भगवान की पूजा नहीं करूँगा, आज से मैं प्रकृति की पूजा करूँगा| मैंने कहा यह तो अच्छी बात है, प्रकृति ईश्वर ही तो है| किन्तु मंदिर में रखी पत्थर की मूरत भी तो प्रकृति है| […] Read more » God ईश्वर जाकिर नाइक
राजनीति ईश्वर प्रेम से बड़ा है मजदूर प्रेम October 18, 2010 / December 20, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 4 Comments on ईश्वर प्रेम से बड़ा है मजदूर प्रेम -जगदीश्वर चतुर्वेदी समाज में कई तरह के लोग हैं। कुछ हैं जो कॉमनसेंस की नजर से दुनिया देखते हैं,कुछ ऐसे हैं जो विचारधारा की परिपक्व नजर से दुनिया देखते हैं,और कुछ ऐसे हैं जो असत्य या गप्प की नजर से देखते हैं। इनमें कॉमनसेंस और असत्य की नजर से देखने वालों की संख्या ज्यादा है। […] Read more » God ईश्वर मजदूर साम्यवाद
विज्ञान अवैज्ञानिक क्यों हो गये हाकिंग? September 26, 2010 / December 22, 2011 by डॉ. सुभाष राय | 11 Comments on अवैज्ञानिक क्यों हो गये हाकिंग? -डॉ.सुभाष राय भगवान एक ऐसी कल्पना है, जो हमारे संस्कारों में इस तरह बसी हुई है, कि अनायास उसकी असम्भाव्यता के बारे में नास्तिक भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं होता। नास्तिक जब कहता है कि भगवान नहीं है, तो वह प्रकारांतर से यह स्वीकार कर रहा होता है कि बहुलांश का विश्वास है कि वह […] Read more » God भगवान
धर्म-अध्यात्म ईश्वर या ब्रह्म होना सबकी संभावना है August 23, 2010 / December 22, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 4 Comments on ईश्वर या ब्रह्म होना सबकी संभावना है – हृदयनारायण दीक्षित ऋग्वेद के ऋषि संसार में उल्लास देखते थे। तब संसार में उल्लास था भी। तब धन और संपदा जीवन निर्वाह के साधन थे। मुद्रा का प्रभाव आज जैसा नहीं था। मुद्रा के प्रभाव से ही धनसंग्रही लोलुपता बढ़ती। जीवन दुःखमय होता गया। वैदिक ऋषियों ने संसार को दुखमय नहीं कहा था लेकिन […] Read more » God ईश्वर ब्रह्म
राजनीति पंच परमेश्वर की अवधारणा और ग्राम स्वराज September 3, 2009 / December 26, 2011 by पंकज झा | 18 Comments on पंच परमेश्वर की अवधारणा और ग्राम स्वराज साहित्य, सिनेमा, कला आदि हर विधा में आज भले ही गाँव, गरीब, किसान, पंचायत आज कही नहीं हो, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। लोक-रुचि की हर विधा में ग्रामीण परिवेश पहले बिखरा पड़ा होता था। या ऐसा भी कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अभिव्यक्ति का हर रास्ता पहले गाँव के चौपालों से हो कर […] Read more » God पंच परमेश्वर