क्यों और कैसे लिखा मैंने – कहो कौन्तेय

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विपिन किशोर सिन्हा भारत का सर्वाधिक प्रचलित ग्रन्थ ‘महाभारत’ हमें अनायास ही युगों-युगों से चले आ रहे उस संघर्ष की याद दिलाता है जो मानव हृदय को आज भी उद्वेलित कर रहा है। द्वापर के अन्तिम चरण में, आर्यावर्त और विशेष रूप से हस्तिनापुर की गतिविधियों को कथानक के रूप में, क्रमबद्ध तथा नियोजित विधि… Read more »

कहो कौन्तेय-८५

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विपिन किशोरे सिन्हा कर्ण के लिए अर्जुन का अन्तिम प्रश्न मेरी अनकही अभिव्यक्ति को कर्ण बूझ गया, ऐसा मुझे लगा। सूर्यपुत्र कर्ण से अपने वार्त्तालाप के उद्देश्य को संप्रेषित करते हुए मैंने कहा – “मृत्युंजय! तुम्हारे जीवन के एक सबसे महत्त्वपूर्ण सत्य से आवरण हटाने के लिए मैंने इस निर्जन स्थान का चयन किया है।… Read more »

कहो कौन्तेय-८४

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विपिन किशोर सिन्हा (कर्ण-वध के कारण अर्जुन का विषाद) पिछले अठारह दिनों का कोलाहल अकस्मात ही निःस्तब्ध सायंकाल में परिवर्तित हो गया है। रात्रि के साथ विषाद की काली छाया समस्त पृथ्वी को अपने आप में समा लेने को आतुर है। मनुष्य रूप में धरती पर जन्म लेनेवाले सद्असद् जीव, आत्मा रूप में अचर-अगम ब्रह्मांड… Read more »

कहो कौन्तेय-८३

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विपिन किशोर सिन्हा (अश्वत्थामा द्वारा द्रौपदी-पुत्रों की हत्या) गदायुद्ध में नियमतः कटि के नीचे किसी भी प्रकार का प्रहार वर्जित था। बलराम के अनुसार भीम ने नियम भंग किया था। दुर्योधन उनका सर्वप्रिय शिष्य था। उसके पतन ने बलराम का विवेक हर लिया। अपना हल लेकर चिल्लाते हुए भीम की ओर दौड़े – “कटि के… Read more »

कहो कौन्तेय-८१

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विपिन किशोर सिन्हा (शल्य और शकुनि-वध) कुरुक्षेत्र की घटनाओं से अप्रभावित सूरज, युद्ध के अठारहवें दिन भी वृक्षों के शीर्ष से झांकता हुआ पूरब के क्षितिज पर उदित हुआ। दुर्योधन ने सेनापति के रूप में हमारे मातुल शल्य का अभिषेक किया था। अपनी सेना के लिए सर्वतोभद्र नामक व्यूह की रचना के साथ वे अग्रिम… Read more »

कहो कौन्तेय-८०

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विपिन किशोर सिन्हा (कर्ण-वध) भगवान शंकर का स्मरण कर मैंने पाशुपतास्त्र गाण्डीव पर चढ़ाया, मंत्र पढ़ा और कर्ण पर प्रक्षेपित करने का निर्णय लिया। लेकिन यह क्या? वह तूणीर और धनुष को संभालता हुआ रथ से कूद पड़ा। मैंने समझा, अपने रथ के स्थिर हो जाने के कारण वह दौड़कर भागना चाह रहा है। लेकिन… Read more »

कहो कौन्तेय-७९

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विपिन किशोर सिन्हा अपने ज्येष्ठ भ्राता के वध को अन्य भाई सह नहीं सके। उन्माद के अतिरेक में निषंगी, कवची, पाशी, दण्डधर, धनुर्धर, अलोलुप, सह, वातवेग और सुवर्चा – ये दस धृतराष्ट्र नन्दन एक साथ भीम पर टूट पड़े। क्रोध में भरे हुए भीम उस दिन साक्षात काल के समान प्रतीत हो रहे थे। उन्होंने… Read more »

कहो कौन्तेय-७८

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विपिन किशोर सिन्हा दुशासन का वध मेरे मन में न जाने क्यों आज कुछ शंकाएं घर करती जा रही थीं। आज ही सूर्यास्त के पूर्व कर्ण-वध की प्रतिज्ञा कर ली थी, लेकिन उसको नहीं मार पाया तो? इस महासमर में मैंने जयद्रथ, भगदत्त, सुशर्मा समेत असंख्य महारथियों का वध किया था लेकिन कर्ण उन सबसे… Read more »

कहो कौन्तेय-७७

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विपिन किशोर सिन्हा अहिंसक मत्यु दंड और अहिंसक आत्मघात इधर भीमसेन अत्यन्त प्रचण्ड वेग से कौरव सेना को रौंदते हुए आगे बढ़ रहे थे। उनके प्रचण्ड वेग को सह सकने में कोई भी धृतराष्ट्र पुत्र समर्थ नहीं था। वे ऊंचे स्वर में दुर्योधन को पुकार रहे थे। अचानक संदेशवाहक ने कर्ण के हाथों युधिष्ठिर के… Read more »

कहो कौन्तेय-७६

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विपिन किशोर सिन्हा कर्ण-युधिष्ठिर युद्ध महासंग्राम का सत्रहवां दिन। मुस्कुरता हुआ सूर्य आज भी उदित हुआ। अभी तक एक दिन भी धुंध या मेघों ने सूर्य और कुरुक्षेत्र के बीच आने का साहस नहीं किया था। अपनी सेनाओं का उत्साह बढ़ाने के बाद श्रीकृष्ण के साथ मैंने कौरव सेना पर दृष्टि डाली। उत्साह से भरा… Read more »