यह माकपा की हार है, वामपंथ की नहीं

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राजीव रंजन प्रसाद 1) सचमुच अभी तो बदलाव हुआ नहीं है, बदलाव की संभावना उभरी है। इस उभार की अगली परिणति केन्द्र से यूपीए शासन का सत्ताच्यूत होना है। और भी कई जगह जो कथित विकास के डंके तले सरकारी रकम डकार रहे हैं; आमूल बदलाव वहाँ भी होंगे। जिन साम्राज्ञियों के यहाँ आदमकद मुर्तियाँ… Read more »

परिचर्चा : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम

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दलगत स्थिति राजनीतिक दल ——2006——-2011 तृणमूल कांग्रेस——-30———–184 कांग्रेस—————- 24———- 42 माकपा—————175———- 41 स्‍वतंत्र भारत में वामपंथ इन दिनों सबसे कमजोर स्थिति में है। तीन राज्‍यों में प्रभावशाली वामपंथ पश्चिम बंगाल और केरल दोनों जगह से सत्ताच्‍युत होकर केवल त्रिपुरा में ही सत्तासीन है। 13 मई 2011 को आए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम ने तो भारतीय राजनीति की… Read more »

वाम मोर्चे की इस पराजय से उग्र वाम का आक्रमण और तेज होगा

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श्रीराम तिवारी अप्रैल-मई -२०११ में पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव संपन्न हुए; इन चुनावों के परिणामों से न केवल सम्बन्धित राज्यों का बल्कि सम्पूर्ण भारत का राजनैतिक परिदृश्य चिंतनीय बन गया है.देश और दुनिया के राजनैतिक विचारक ,हितधारक अपने-अपने चश्में से इस वर्तमान दौर की बदरंग तस्वीर को अभिव्यक्त कर रहे हैं.राजनीति विज्ञान का… Read more »

पश्चिम बंगाल में ‘स्वशासन’ बनाम ‘सुशासन’ की जंग

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जगदीश्‍वर चतुर्वेदी पश्चिम बंगाल में इसबार का विधानसभा चुनाव ‘स्वशासन’ ( पार्टी शासन) बनाम ‘सुशासन’ के नारे के तहत लड़ा जा रहा है। ‘सुशासन’ की धुरी है जनता और कानून का शासन। ‘स्वशासन’ की धुरी है पार्टीतंत्र की मनमानी और सामाजिक नियंत्रण। इसके आधार पर वोट पड़ने जा रहे हैं। इसबार का चुनाव नव्य आर्थिक… Read more »

मुस्लिम मतदाताओं पर सबकी नजर

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संतोष कुमार मधुप पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाता सौ से अधिक सीटों पर निर्णायक भूमिका में होंगे। राज्य के 35 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं को मालूम है कि उनके समर्थन के बगैर सरकार गठन करना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। दूसरी तरफ राजनीतक पार्टियां भी इस सच्चाई को समझती है। इसीलिए… Read more »

विधानसभा चुनावों में परिवर्तन की बयार

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मृत्युंजय दीक्षित अप्रैल और मई माह में देश के पांच महत्वपूर्ण प्रान्तों पं. बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम एवं पुड्डुचेरी के विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने जा रहे हैं। इस बार के चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक, महत्वपूर्ण व परिवर्तनकारी होने जा रहे हैं। इन चुनावों मे सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन पं.बंगाल व केरल में होने जा रहा… Read more »

बंगाल की प्रथम शाखा के स्वयंसेवक: कालिदास बसु

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विजय कुमार कोलकाता उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता तथा पूर्वोत्तर भारत में संघ कार्य के एक प्रमुख स्तम्भ श्री कालिदास बसु (काली दा) का जन्म 1924 ई0 की विजयादशमी पर फरीदपुर (वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था। 1939 में कक्षा नौ में पढ़ते समय उन्होंने पहली बार श्री बालासाहब देवरस का बौद्धिक सुना, जो उन दिनों… Read more »

ममता के भक्त क्यों हैं नव्यउदार अमीर

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जगदीश्‍वर चतुर्वेदी ममता बनर्जी की पिछले दिनों हुई दमदम की जनसभा में खूब भीड़ थी। वहां ममता बनर्जी ने वाम के पिछले विधानसभा चुनाव के नारे ‘उन्नततर वामफ्रंट’ के विकल्प के रूप में ‘ उन्नततर मानुष’ का नारा दिया है। उनका मानना है वे यदि आगामी विधानसभा चुनाव जीतती हैं तो पश्चिम बंगाल में ‘उन्नततर… Read more »

सुरक्षा बलों पर राजनीति करने से बचिए ‘सरकार’

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नीरज कुमार दुबे पश्चिम बंगाल में वामपंथियों के सशस्त्र कैडरों को निहत्था करने और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कथित दुरुपयोग के आरोपों पर जो राजनीति शुरू हुई है वह अंततः राज्य में माओवादियों और नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर रही है। जहां केंद्र का सारा ध्यान माओवादियों से निपटने की राज्य की नाकामी… Read more »

पश्चिम बंगाल की शिक्षा में बाहुबलियों की जंग के निहितार्थ

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जगदीश्‍वर चतुर्वेदी पश्चिम बंगाल के शिक्षाजगत में वफादारों और बाहुबली गिरोहों में जंग छिड़ी हुई है। राज्य में छात्रसंघ चुनावों का सच है कि वाम छात्र संगठन अपने विरोधी को नामांकन जमा नहीं करने देते। फलतःहिंसा हो रही है। एक-दूसरे पर हिंसक हमले किए जा रहे हैं। मीडिया प्रबंधन ने हिंसा को अर्थहीन और रूटिन… Read more »