कला-संस्कृति अब न बुद्ध हैं, न आम्रपाली, न ही वह वैशाली रही; क्या गणतंत्र है? July 31, 2012 by राजीव रंजन प्रसाद | 3 Comments on अब न बुद्ध हैं, न आम्रपाली, न ही वह वैशाली रही; क्या गणतंत्र है? [वैशाली, बिहार से यात्रा संस्मरण] राजीव रंजन प्रसाद भगवान महावीर की जन्मस्थली –वैशाली तीन बार भगवान बुद्ध के चरण रज पडने से भी पवित्र हुई है। पटना से लगभग सत्तर किलोमीटर की यह यात्रा मैनें बाईक से की और रास्ते भर नयनाभिराम नजारों से गुजरता रहा। एशिया के सबसे बडे पुल गाँधी सेतु पर से […] Read more » आम्रपाल गणतंत्र बुद्ध वैशाली
लेख हमारा गणतंत्र ‘धनतंत्र और गनतंत्र’ में तब्दील हो चुका है! January 25, 2012 / January 25, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी राजनेताओं की विश्वसनीयता ख़त्म होने से लोकतंत्र को ख़तरा ? गणतंत्र आज धनतंत्र और गनतंत्र में तब्दील होने से सवाल उठ रहा है कि इन हालात में हमारा लोकतंत्र और संविधान सुरक्षित रह सकेगा? इसकी वजह यह है कि नेताओं का विश्वास जनता में बिल्कुल ख़त्म होता जा रहा है। उनमें से अधिकांश […] Read more » ‘धनतंत्र republic day गणतंत्र गनतंत्र
लेख गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र August 5, 2011 / December 7, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 2 Comments on गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र शादाब जफर “शादाब’’ 15 अगस्त बहुत ही करीब है। में सोच रहा हॅू कि आखिर हमारे भोले भाले नादान प्रधानमंत्री जी लाल किले की प्राचीर से गणतंत्र का झंडा फहरायेगे या भ्रष्टतंत्र का कहना मुश्किल है। आईपीएल घोटाला, राष्ट्रमंडल खेलो में घोटाला, मुंबई के आदशर आवास सोसायटी घोटाला, टुजी स्पेक्ट्रस आवंटन घोटाला, सतर्कता अधिष्ठान में […] Read more » independence गणतंत्र गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र भ्रष्टतंत्र
विविधा भारतीय गणतंत्र के साठ वर्ष February 5, 2011 / December 15, 2011 by प्रभात कुमार रॉय | Leave a Comment प्रभात कुमार रॉय 26 जनवरी 2011 को भारतीय गणतंत्र ने अपने 60 वर्ष पूरे कर लिए और अपनी 61 वीं वर्षगाँठ का जश्न भी मना लिया। भारतीय गणतंत्र की सबसे महान उपलब्धि रही है कि देश में उठे समस्त झंझावातों के मध्य इसने स्वयं को बाकायदा कायम बनाए रखा है। जबकि भारत के पडौ़सी मुल्क […] Read more » 60 years of Indian REPUBLIC गणतंत्र
विविधा गणतंत्र दिवस के बहाने January 26, 2011 / December 15, 2011 by सतीश सिंह | 1 Comment on गणतंत्र दिवस के बहाने सतीश सिंह राष्ट्रध्वज को फहराने का अधिकार नागरिकों के मूलभूत अधिकार और अभिव्यक्ति के अधिकार का ही एक हिस्सा है। यह अधिकार केवल संसद द्वारा ऐसा परितियों में ही बाधित किया जा सकता है जिनका उल्लेख संविधान की कण्डिका 2, अनुच्छेद 19 में किया गया है। खण्डपीठ में साफ तौर पर कहा गया है कि […] Read more » Democracy republic गणतंत्र लोकतंत्र
विविधा “गण”से दूर होता “तंत्र” January 19, 2011 / December 16, 2011 by अंकुर विजयवर्गीय | 4 Comments on “गण”से दूर होता “तंत्र” अंकुर विजयवर्गीय “26 जनवरी को मैंने सोचा है कि आराम से सुबह उठूंगा, फिर दिन में दोस्तों के साथ फिल्म देखने जाना है, इसके बाद मॉल में जाकर थोड़ी शॉपिंग और फिर रात में दोस्तों के साथ दारू के दो-दो घूंट। क्यूं तुम भी आ रहे हो ना अंकुर।” अब आप बताएं कि इतना अच्छा […] Read more » republic गणतंत्र