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    गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी के उपकुलपति के खिलाफ टीचर यूनियन ने की सीबीआई जाँच की मांग

    विषय: यूनिवर्सिटी के तत्कालीन रजिस्ट्रार श्री अनिल कुमार पुंडीर को गैर क़ानूनी तरीके से डीन ऑफ़ कॉलेजिस लगाने
    मामले में IPC व Prevention of Corruption Act की सम्बंधित धाराओं में FIR दर्ज करके अनुसन्धान के लिए CBI या
    किसी स्वतन्त्र जाँच एजेंसी को भिजवाने बारे व जाँच पूरी होने तक इस पद पर श्री अनिल कुमार पुंडीर की नियुक्ति
    को रोकने बारे प्रार्थना पत्र !

    महोदयगण


    यह कि पानीपत निवासी श्री पी. पी. कपूर, C/o M/s Kapoor Architects, G.T. Road, Samalkha -132 101, District Panipat,
    Mob. No: +91-87082-72105; Email: ppkapoor2011@gmail.com ने एक शिकायत दिनांक 23.08.2018 को हमारी
    यूनिवर्सिटी के उपकुलपति श्री टंकेश्वर कुमार सचदेवा व अन्य के विरुद्ध उच्चाधिकारियों को भेजी थी, जिसमे बिंदु 4
    पर यूनिवर्सिटी के तत्कालीन रजिस्ट्रार श्री अनिल कुमार पुंडीर को हमारी यूनिवर्सिटी में ही डीन ऑफ़ कॉलेजिस के पद
    पर गैर क़ानूनी तरीके से लगाने के उपकुलपति श्री टंकेश्वर कुमार सचदेवा के गैर क़ानूनी प्रयासों की शिकायत की गई
    थी जोकि निम्न प्रकार से हैं
    “He is trying to appoint Sh. Anil Kumar Pundir, another illegal appointee, working on the post of Registrar in the
    University, on the post of Dean of Colleges of the University and to do so, he had changed the requirement of
    experience on the post of Professor in the Grade Pay of Rs. 10000, as approved by Haryana Vidhan Sabha to Rs. 9000
    by using his extraordinary powers under Section 11 (5) and get the scrutiny of the application forms received in the
    University from outside professors within a week time of the last date of filing of the application forms.”
    शिकायत के 3 पेज पृष्ठ 6 से पृष्ठ 9 पर संलग्न हैं ! इस शिकायत पर माननीय मुख्यमंत्री, हरियाणा ने टेक्निकल
    एजुकेशन विभाग, हरियाणा द्वारा रखे गए जाँच के प्रस्ताव का अनुमोदन भी कर दिया था व विभाग ने इस शिकायत
    के मामले की तफ्तीश के लिए समिति बनाने के लिए फाईल को दिनांक 05.12.2018 को माननीय राज्यपाल, हरियाणा
    को बजरिया डायरेक्टर जनरल, टेक्निकल एजुकेशन, हरियाणा भेज दिया था, जिसकी नोटिंग शीट के 3 पेज पृष्ठ 10 से
    पृष्ठ 12 पर संलग्न हैं ! परन्तु आज तक उपरोक्त शिकायत पर असल में सरकार द्वारा कोई जमीनी कार्यवाही नहीं की
    गई व यूनिवर्सिटी के तत्कालीन रजिस्ट्रार श्री अनिल कुमार पुंडीर का डीन ऑफ़ कॉलेजिस के पद पर पूरी तरह से गैर
    क़ानूनी तरीके से चयन कर दिया गया !
    डीन ऑफ़ कॉलेजिस के पद को वर्ष 2012 में कॉन्ट्रैक्ट पर भरने के लिए विज्ञापित किया गया था व तब
    इसके लिए 10 साल का प्रोफेसर या प्रिंसिपल पद का एक्सपीरियंस माँगा गया था जोकि 10000 रूपये के ग्रेड पे पर
    होता है व उस समय नॉन टचिंग पदों के लिए निर्धारित अधिकतम उम्र 50 वर्ष रखी गई थी जिसकी सम्बंधित
    विज्ञापन व जरुरी योग्यताये की जानकारी नीचे दी गई हैं

    “ADVT. NO. 1/2012

    Applications on the prescribed form for the following posts are invited on regular basis :- xxxxx

    (ii) Dean of Colleges: 1-Gen. (37400-67000+10000 AGP) xxxxx
    xxxxx DOC is a non-vacation contract post. Xxxxx
    Age limit: 18 to 50 years for non-teaching posts Xxxxx”

    “QUALIFICATIONS FOR THE POSTS MENTIONED AT SR.NO.24 ARE REPRODUCED BELOW:-

    DEAN OF COLLEGES

    (i) Master’s Degree with 50% marks from a recognized University.

    (ii) Ph.D. or equivalent published work.

    (iii) 20 years teaching experience in a recognized College/ University out of which at least 10 years should be

    Principal/ Professor of a recognized College/University.”

    यह कि हमारे उपकुलपति श्री टंकेश्वर कुमार सचदेवा, यूनिवर्सिटी के तत्कालीन रजिस्ट्रार श्री अनिल कुमार पुंडीर
    को, जिसका कार्यकाल दिनांक 31.03.2019 को समाप्त होने वाला था, को डीन ऑफ़ कॉलेजिस पद पर गैर क़ानूनी
    तरीके से लगाना चाहते थे, लेकिन वह इस पद के लिए जरुरी 10 साल का प्रोफेसर या प्रिंसिपल पद का एक्सपीरियंस
    नहीं रखते थे, जोकि 10000 रूपये के ग्रेड पे पर होता है, क्योंकि श्री अनिल कुमार पुंडीर का पूर्व एक्सपीरियंस एसोसिएट
    प्रोफेसर के 9000 रूपये के ग्रेड पे में ही था ! इसके साथ ही श्री अनिल कुमार पुंडीर की उम्र भी 50 वर्ष की हो चुकी
    थी, इसके चलते उपकुलपति श्री टंकेश्वर कुमार सचदेवा ने यूनिवर्सिटी के उपकुलपति को एक्ट की धारा 11 (5) में दी

    2
    गई असाधारण शक्तियों का प्रयोग दिखाते हुए पद के लिए जरुरी योग्यता व अधिकतम उम्र की सीमा को पूरी तरह से
    बदलकर श्री अनिल कुमार पुंडीर के एक्सपीरियंस यानि एसोसिएट प्रोफेसर के एक्सपीरियंस व 9000 रूपये के ग्रेड पे के
    मुताबिक ही बनवा दिया व अधिकतम उम्र सीमा की 50 से बढाकर 57 वर्ष करवा दिया, जबकि यूनिवर्सिटी के
    उपकुलपति एक्ट की धारा 11 (5) में दी असाधारण शक्तियों का प्रयोग नियुक्तियों के सन्दर्भ में नहीं कर सकते थे,
    जिसका जोकि निम्न प्रकार से हैं
    “The Vice-Chancellor may, if he is of the opinion that immediate action is necessary on any matter, exercise any
    power conferred on any authority of the University by or under this Act, except in the matters involving creation or
    abolition of a Faculty, Department or Post, the matter involving APPOINTMENT or removal of an employee.
    Provided that the Vice-Chancellor before exercising powers under this section shall record in writing the reasons, why
    the matter cannot wait till the meeting of the authority concerned …”
    11 (5) धारा में उपकुलपति को सिर्फ उन्ही तुरंत की बेहद जरुरत के मामलों में निर्णय लेने के अधिकार प्राप्त
    है जिसकी शक्तियां यूनिवर्सिटी की किसी अन्य अथॉरिटी के पास है, पर किसी नियुक्ति के पद के सम्बन्ध में इस
    प्रकार से जरुरी योग्यताओं, एक्सपीरियंस व जरूरी पे स्केल को बदलने की शक्तियां तो यूनिवर्सिटी की किसी भी
    अथॉरिटी के पास इस मामले के सन्दर्भ में नहीं थी व हरियाणा सरकार के पत्र Memo no. 18/23/2012 UNP (2), दिनांक
    30.10.2013 से स्पष्ट हैं कि ऐसे सभी मामलों में एक तो हरियाणा सरकार की व साथ ही अलग से हरियाणा के वित्त
    विभाग की प्रशासनिक मंजूरी लेनी अनिवार्य थी, जोकि इस मामले में नहीं ली गई थी व पत्र का सम्बंधित भाग निम्न
    हैं
    “xxxx that matter regarding creation, upgradation, down gradation and conversion of posts involves not only financial
    issues but also other technical issues like qualificaitons etc. Therefore, it is essential for Universities to obtain
    administrative approval of the State Govt. and approval of Finance Department in the all such matters.”
    दिनांक 08.09.2018 को उपकुलपति के उपरोक्त गैर क़ानूनी कदम की यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव कौंसिल
    की मीटिंग में उपरोक्त श्री अनिल कुमार पुंडीर के बतौर सचिव मौजूदगी में हुई मंजूरी हुई थी, जबकि दिनांक
    08.09.2018 तक तो श्री अनिल कुमार पुंडीर खुद डीन ऑफ़ कॉलेजिस के पद के लिए आवेदन जमा करवा चुका था,
    अत: उसको तो इस पद से सम्बंधित कार्यवाही में बैठना ही नहीं चाहिए था ! जिसका सम्बंधित विवरण निम्न हैं
    “Minutes for 81st Meeting of the Executive Council held on 08.09.2018 at 11.00 A.M.

    xxxx
    Secretary
    Dr. Anil Kumar Pundir,
    Registrar
    xxxx”

    वर्ष 2018 में श्री अनिल कुमार पुंडीर को इस पद पर लगाने के लिए उसकी योग्यताओं के मुताबिक बदली हुई
    योग्यताओं के अनुसार पद को विज्ञापित किया गया जिसे श्री अनिल कुमार पुंडीर ने ही बतौर यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार
    जारी किया था! जिसकी सम्बंधित विज्ञापन व जरुरी योग्यताये की जानकारी नीचे दी गई हैं:

    “ADVT. No. 2/2018

    Applications on the prescribed online form for the non-teaching posts of Dean of Colleges, Director (Distance
    Education) and Assistant Director (Distance Education) are invited on regular basis. The online applications forms will
    be available on the University website w.e.f. 29.05.2018 from 9:00 AM and the last date for submission of application
    forms on the university website will be 18th June 2018, 5.00PM. The copy of qualifications may be downloaded from
    University website. Detailed information with regard to number of posts, qualifications, selection criteria etc. may be
    seen on the University website (www.gjust.ac.in).

    REGISTRAR”

    “Qualifications

    1. Ph. D. in any discipline
    2. Master’s Degree with at least 55% marks (or its equivalent grade of ‘6’ in the UGC-7 point scale) from a recognised
      University.

    3

    1. At least 15 years of teaching experience in a recognised College/ University or other institute of higher education,
      out of which at least 5 years should be as Associate Professor/ Professor in the regular grade with AGP of Rs. 9000/-
      or above in a recognised College/ University or other institute of higher education.
      Note:
      (i) Not more than 57 years of age as on the last date of application for the post of Dean of Colleges xxxx”
      इसके उपरांत उपकुलपति महोदय ने यूनिवर्सिटी में दिनांक 12.01.2019 को दिखावे के लिए लिये डीन ऑफ़
      कॉलेजिस के पद का इंटरव्यू रख दिया, जिसके सन्दर्भ में इंटरव्यू से पहले ही दिनांक 11.01.2019 को The Tribune
      अख़बार में छपी खबर व दिनांक 12.01.2019 को अमर उजाला अख़बार में छपी खबर के सम्बंधित 1 – 1 पेज पृष्ठ
      13 व पृष्ठ 14 पर संलग्न हैं ! दिनांक 04.05.2019 को दैनिक जागरण में छापी खबर से ये भी स्पष्ट है कि
      अकादमिक योग्यताओं में काफी कम अंक होने के बावजूद भी उपरोक्त श्री अनिल कुमार पुंडीर को इस पद के लिए
      चुन लिया गया, जिसका 1 पेज पृष्ठ 15 पर संलग्न हैं!
      यूनिवर्सिटी एक्ट के मुताबिक डीन ऑफ़ कॉलेजिस पद पर नियुक्ति का कार्य Selection Committee के जरिये
      किया जाना था जोकि निचे इस प्रकार हैं “The Dean of Colleges shall be a whole-time salaried officer of the University
      and shall be appointed by the Executive Council on the recommendations of the Selection Committee…”, जबकि
      उपरोक्त मामले में Establishment/ Selection Committee बनाकर, पूरी तरह से गोलमाल तरीके से चयन समिति का
      गठन किया गया, जोकि न तो Establishment Committee थी व न ही Selection Committee थी व यूनिवर्सिटी एक्ट में
      किसी प्रकार की Establishment/ Selection Committee का प्रावधान ही नहीं है ! डीन ऑफ़ कॉलेजिस पद 10000 रूपये
      के ग्रेड पे पर विज्ञापित किया गया था जोकि प्रोफेसर के पद के लिए निर्धारित होता है व जिसके लिए यूनिवर्सिटी के
      एक्ट के प्रावधानों के अनुसार Selection Committee बारे दिए गए प्रावधानों की अनुपालना नहीं की गई, जोकि निम्न
      प्रकार से हैं:
      “1. Vice-Chancellor to be the Chairperson of the Selection Committee.
    2. An academician who is the nominee of the Chancellor.
    3. Three experts in the concerned subject/ field, out of the list recommended
      by the Vice-Chancellor and approved by the Executive Council.
    4. Dean of the Faculty.
    5. Chairperson of the Department, if he/she is a Professor.
      At least four members, including two outside subject-experts, must constitute the quorum.”
      यूनिवर्सिटी एक्ट में selection Committee में दिए गए प्रावधानों के बिंदु 3 के मुताबिक रजिस्ट्रार selection
      Committee का Secretary होता है, जोकि इस प्रकार है “The Vice-Chancellor shall preside at the meetings of a
      Selection Committee and the Registrar shall act as its Secretary ….” यूनिवर्सिटी एक्ट में Establishment Committee में
      दिए गए प्रावधानों के बिंदु 1 (V) के अनुसार रजिस्ट्रार इस समिति का अभिन्न अंग होता है, जोकि इस प्रकार से हैं
      “The Registrar.” व बिंदु 2 के मुताबिक समिति का member secretary होता है जोकि इस प्रकार है “The Vice-
      Chancellor shall preside at the meetings of the Establishment Committee and the Registrar shall be the Member-
      Secretary of the Committee” जबकि उपरोक्त मामलें में बनाई गई गोलमाल समिति में किसी को भी रजिस्ट्रार की जगह
      अधिकृत करके बतौर सदस्य नहीं लिया गया व न ही किसी को member secretary बनाया गया, जबकि यूनिवर्सिटी
      एक्ट में साफ लिखा है कि जब किसी भी वजह से रजिस्ट्रार अपने जिम्मेवारियो का निर्वाह करने में असमर्थ होगा तो
      उपकुलपति उनकी जगह किसी को अस्थायी तौर पर नियुक्त करेंगे, जोकि इस प्रकार है “When the Office of the
      Registrar is vacant or when the Registrar is by reason of illness, or any other cause unable to perform the duties of his
      office, the duties of the office shall be performed by such person as the Vice-Chancellor may appoint temporary for
      the purpose till regular appointment is made by the Chancellor on the Advice of the Government.”, जिसका पालन
      उपरोक्त भर्ती के सन्दर्भ में नहीं किया गया जिससे स्पष्ट हैं कि उपरोक्त गोलमाल समिति में Establishment या
      Selection Committee के लिए बने एक्ट के प्रावधानों व रजिस्ट्रार के अपने कार्य को न कर पाने की स्थिति में लागु
      होने वाले प्रावधानों का भी घोर उलंघन किया गया !
      डीन ऑफ कॉलेज के पद पर उपरोक्त अनिल कुमार पुंडीर के चयन को यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव कौंसिल ने
      दिनांक 21.02.2019 को मंजूरी देकर उसे नियुक्ति पत्र दे दिया, जोकि उस समय इस पद के लिए दी गई निर्धारित
      ज्वाइन करने की अवधि में इस पद पर ज्वाइन भी नहीं कर पाया व गैर क़ानूनी तरीके से अपने रजिस्ट्रार के पद की

    4
    अवधि दिनांक 31.03.2019 को समाप्त होने के बावजूद उसी पर लगा रहा व उसे इस पद से भी केन्द्रीय चुनाव
    आयोग के हस्तक्षेप के बाद किसी नागरिक की शिकायत संख्या 3382463515 के आधार पर हटाया गया था व अब शायद
    इसके डीन ऑफ़ कॉलेजिस के पद पर ज्वाइन करने के समय को भी आचार संहिता लगे होने पर भी आगे के लिए बढ़ा
    दिया गया है व अलग से चुनाव आयोग से भी इसकी नियुक्ति बारे मंजूरी मांगी गई हैं ! उपरोक्त श्री अनिल कुमार
    पुंडीर को रजिस्ट्रार के पद पर भी गैर क़ानूनी ढंग से लगाया गया था व वर्ष 2015 में हरियाणा सरकार ने गुरु
    जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी हिसार में रजिस्ट्रार के पद के लिए 500 रुपए फीस के साथ दिनांक
    02.03.2015 तक एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों से उनके नियोक्तायों के माध्यम से
    आवेदनपत्र आमंत्रित किये थे व स्पष्ट लिखा था कि अंतिम तिथि के बाद आये या अधूरे आये या अयोग्य उम्मीदवारों
    के आये आवेदनपत्रों पर या बिना योग्यता के प्रमाणपत्रों की कापियों के साथ आये आवेदनपत्रों पर कोई विचार तक
    नहीं होगा व लिखा था कि सरकार इंटरव्यू के लिए निर्धारित योग्यता से ज्यादा योग्यता को भी साक्षात्कार के लिए
    बुलवाने का मापदंड बना सकती है व यदि किसी उम्मीदवार ने खुद या किसी के जरिये किसी सिफारिश की कोशिश
    की तो उसे अयोग्य माना जायेगा ! पारदर्शिता रखने के लिए चयन का कार्य तकनीकी महानिदेशक की अध्यक्षता में
    समिति को दिया गया व इस यूनिवर्सिटी के लिए लगभग 30 योग्य उम्मीदवारों ने अपना आवेदन भेजा ! लेकिन ये
    सब सिर्फ दिखावा व जनता को बेवकूफ बनाने जैसा ही साबित हुआ व मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्री राजेश
    खुल्लर ने श्री अनिल कुमार पुंडीर का बिना हस्ताक्षर का बायोडाटा उसे उपरोक्त यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार लगाने की
    सिफारिश के साथ भेज दिया व उसे इस पद पर लगा दिया गया ! कमाल की बात तो ये है कि श्री अनिल कुमार
    पुंडीर इस पद के लिए हरियाणा व केंद्र सरकार दोनों द्वारा निर्धारित एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन का अनुभव ना होने
    के कारण अयोग्य थे व उसने तो निर्धारित तिथि से पहले या बाद में फीस के साथ अपने प्रमाणपत्र लगाते हुए निर्धारित
    आवेदनपत्र खुद या अपने नियोक्ता के माध्यम से भी नहीं दिया था ! यहाँ तक उसने तो अपने हस्ताक्षरों के साथ भी
    कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया था ! बड़े कमाल की बात ये है कि सरकार ने स्पष्ट लिखा था कि यदि किसी उम्मीदवार
    ने खुद या किसी अन्य के जरिये किसी सिफारिश से इस पद पर लगने की कोशिश की तो उसे अयोग्य माना जायेगा
    ! पर खुद सरकार ने श्री अनिल कुमार पुंडीर को महज मुख्यमंत्री कार्यालय की सिफारिश पर ही सब कुछ दरकिनार
    करके लगा डाला ! एक तरफ तो सरकार ने लिखा था कि इंटरव्यू के लिए निर्धारित योग्यता से ज्यादा योग्यता को भी
    मापदंड बना सकती है लेकिन जिसे लगाया वो तो निर्धारित न्यूनतम योग्यता भी नहीं रखता था व भर्ती में पारदर्शिता
    रखने के लिए तकनीकी महानिदेशक की अध्यक्षता की समिति भी धरी की धरी ही रह गयी ! व इस यूनिवर्सिटी के
    जिन लगभग 30 योग्य उम्मीदवारों ने आवेदन किया था वो इंटरव्यू की इन्तजार करते ही रह गए ! उनके तो फार्म के
    साथ दिए 500 रुपए तक सरकार ने ना लोटाये गए ! श्री राजेश खुल्लर ने श्री अनिल कुमार पुंडीर के बायोडाटा के
    साथ एक अख़बार में छापी खबर भेजी थी, जिसमें श्री अनिल कुमार पुंडीर ने पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा की गई
    प्रिंसिपल की भर्ती में अपना सिलेक्शन न होने पर सीबीआई जाँच की मांग की थी, जिससे स्पष्ट है कि जब इसका
    सिलेक्शन नहीं हुआ तो ये CBI जाँच व भर्ती में पारदर्शिता की मांग करता रहा व मौका लगते ही खुद पिछले दरवाजे
    से रजिस्ट्रार लग गया ! रजिस्ट्रार लगने से पहले श्री अनिल कुमार पुंडीर मुकंद लाल नेशनल कॉलेज, यमुनानगर में
    अध्यापक थे व उसे इस कॉलेज ने भी रजिस्ट्रार लगने पर हरियाणा सरकार के नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर तीन साल
    की छुट्टी तुरंत दे दी गई, जबकी हरियाणा सरकार के इस बारे स्पष्ट नियमों के अनुसार इसे ये छुट्टी मिल ही नहीं
    सकती थी व इस पर हरियाणा सरकार का उच्चतर विभाग चुप बैठा रहा !
    उपरोक्त डीन ऑफ़ कॉलेजिस मामले में IPC व Prevention of Corruption Act की सम्बंधित धाराओं में FIR दर्ज
    करके अनुसन्धान के लिए CBI या किसी स्वतन्त्र जाँच एजेंसी को भेजा जावे व यदि जाँच एजेंसी उपरोक्त श्री अनिल
    कुमार पुंडीर को रजिस्ट्रार लगाने के मामले की भी उपरोक्त डीन ऑफ़ कॉलेजिस पद के मामले के साथ जाँच करना
    चाहे तो हम सभी सबूत तुरंत उपलब्ध करवाने को तैयार हैं ! हम इस मुद्दे को तार्किक निष्कर्ष तक बिना किसी देरी के
    पहुँचाना चाहता हैं व इस बात की जिम्मेवारी आप पर रहेगी कि आप भी आरोपियों की चालबाजी से बचकर जाँच को
    पुख्ता तोर पर निश्चित समय में सभी सबूत जुटाकर पूरा करवाएंगे !

    (President) (Secretary)

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