लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

Posted On by &filed under महत्वपूर्ण लेख.


डॉ. मधुसूदन

आदरणीय निवृत्त एयर वाइस मार्शल, विश्व मोहन तिवारी जी, एवं आदरणीय ”सत्यार्थी जी” की टिप्पणियों से प्रेरित, निम्न आलेख प्रस्तुत है।

(१)

एक शोध पत्र

एक शोध पत्र हाथ लगा, जो Pathana Pengapala नामक व्यक्ति द्वारा लिखा गया था,और जो मुझे राम ख्मांग युनीवर्सीटी के अभिलेखो में मिला। उसका संक्षेप प्रस्तुत करने में मुझे हर्ष है।

संक्षेप में लेखक कहता है, कि पाली से भी पहले संस्कृत का फैलाव सुवण्ण (सुवर्ण) भूमि (आज के थायलॅन्ड) में हुआ था। पाली और संस्कृत दोनो के शब्द प्रयोग थाइ भाषा में अत्यधिक मात्रा में पाये जाते हैं।

(२)

पाली और संस्कृत का प्रभाव

”The impact of Pali and Sanskrit words on Thai are the most significant, taking other foreign languages, namely, English, French, Chinese, etc. into account.”

आगे कहता है, कि ”This is because Brahmanism and Buddhism which utilized these languages are credited with having such a great impact on Thai people and Thai culture.”

(३)

पाली और संस्कृत थाई से हटाए तो?

पाली और संस्कृत भाषा के शब्दों का उपयोग थाइ की दिन प्रति दिन की बोलचाल की भाषा में, और लेखन में सर्वाधिक पाया जाता है। ( लेखक ने प्रति शत प्रमाण दिया नहीं है।) पाली और संस्कृत दोनों, थाई भाषा में और संस्कृति में, अनेकविध रीति से घुल-मिल गयी है। इतनी, कि आगे वह कहता है, यदि पाली और संस्कृत शब्द थाई भाषा से हटा दिए जाए तो देश के लिए बडा भारी संकट (Crisis) खडा हो जाएगा।

मेरा प्रश्न: भारत में ऐसा करने पर क्या होगा? मुझे लगता है, कि, फिर वर्चस्ववादी इसाइयत को समन्वयवादी भारत पर खुल्लम खुल्ला मैदान मिल जाएगा।

(४)

निम्न शब्द समानार्थी पर उच्चारण में बदले हुए, प्रतीत होते हैं।

थाय शब्द बाईं ओर देकर —————प्रति शब्द संस्कृत दाहिनी ओर दिया है।

(१) किरिया ———क्रिया ——(२) वात्सना ———–वासना

(३) लाप———लाभ ————(४) खति———–गति

(५) कामा—-कर्म—————- (६) विबाक——विपाक

(७) ख्रोव —–ग्रह —————-(८) चारीत —–चरित

(९) संदान—-संतान ————-(१०) निमोन—-निमन्त्र

(११) आराध्ना —–आराधना —-(१२) आत्सना —-आसना

(१३) आफत —अबाधा ———– (१४) लिखित—–लिखित

(१५) संहान —–संहार ———–(१६) खवरप—–गौरव

(१७) फूत—–भूत —————–(१८) फत्चन —-भजन

(५)

निम्न शब्दों के अर्थ का विस्तार हुआ है।

(१९) खॉन्खा —–गंगा —- थाय भाषा में किसी भी नदी के लिए प्रयुक्त होता है।

(२०) दॉन्त्री—–तंत्री (संस्कृत में कोई भी तार का बाजा)—पर थाय भाषा में किसी भी संगीत के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

(६)

शब्दों को नये पर सम्बन्धित अर्थ देकर निम्न प्रयोग किये जाते हैं।

(२१) फ्रॉम्मचारी(पवित्र जीवन जीने वाला व्यक्ति) ——-ब्रह्मचारी (ब्रह्मचर्याश्रम का संयमित छात्र )

(२२) थित्सना (डाँट फटकार)—–देशना (प्रवचन)

(२३) प्रणाम- प्रनाम (दोष देना)———–प्रणाम (आदर करना)

(२४) संवात –(संभोग) —–संवास (साथ रहना)

(२५) माला ( पगडी-टोपी)——माला (फूल माला)

(२६) कमल ( हृदय)—–कमल( फूल)

(७)

शब्द वही रूढि से अर्थ बदले हुए हैं।

(२७) अप्रिय ( अश्लील, दुष्ट, कपटी, दंभी)——अप्रिय ( बिना प्रेम, बिना स्नेह)

(२८) अनाथ (दया का पात्र) —-अनाथ ( नि:सहाय, पालक बिना का)

(२९) इच्चा ( मत्सर)—–इच्छा

(३०) सवात (प्रेम)—–स्वाद (रूचि)

(३१) अखॉम (जादु)—-आगम (शास्त्र ग्रन्थ)

(३२) अनेत अनात (दु:खी)—अनित्य (अस्थिर, भंगुर)

सूचना:

शोध पत्र अंग्रेज़ी में था, उच्चारण रोमन से अनुमान और तर्क के आधारपर चयन किए हैं

5 Responses to “थायलॅन्ड पर संस्कृत (और पाली) प्रभाव: दो”

  1. मुकुल शुक्ल

    मधुसूदन जी को मेरा ह्रदय से धन्यवाद जिनके कारण मुझे अपने राष्ट्र की संस्कृति और अपनी भाषा पर गर्व करने का एक और कारण मिला | इस से पहले मैंने बहुत सारी बातें श्री राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों में सुनी थी जिनके कारण मुझे भारतीय होने पर गर्व महसूस हुआ जिसकी जड़ों को धीरे धीरे डा. साहब के लेखों ने और भी अधिक मज़बूत किया है | मै मधुसूदन जी का बहुत ही आभारी हूं की उन्होंने विदेश में रह कर भी अपने देश की भाषा के बारे में इतनी बहुमूल्य जानकारियाँ हम तक पहुंचाई जिनके कारण से आज मै तर्क और प्रमाणों के साथ संस्कृत और हिंदी को बढ़ावा देने के पक्ष में बोल सकता हूं | अब तो मेरी इच्छा संस्कृत को सीखने की और भी अधिक बढती जा रही है क्योंकि मुझे धीरे धीरे ये समझ आ रहा है की यदि मै संस्कृत सीख लूं तो दुनिया की किसी भी भाषा को सीखने में कोई भी कठिनाई नही होगी |

    Reply
    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ. मधुसूदन उवाच

      मुकुल जी नमस्कार.
      सही है ।
      मेरे पिताजी ने संस्कृत प्रोत्साहन दिया, और मेरी गुजराती,हिन्दी, मराठी सहित अनेक भाषाओ में प्रगति होती गयी।
      आप “संस्कृत भारती” नामक संस्था से सम्पर्क करें. वहाँ १० दिनका पहला सीधे संस्कृत वार्तालाप का पाठ्यक्रम है.=> जैसे बालक घर में सुन सुन कर मातृभाषा सीखता है,डब्ल्युडब्ल्युडब्ल्यु. संस्कृतभारती.कॉम<—–पर जाईए
      (मेरा फॉंट अंग्रेज़ी अक्षर नहीं लिख सकता़)
      ॥शुभस्य शीघ्रम्‌ ॥ शुभ संकल्प हो तब विलम्ब नहीं करना चाहिए।
      धन्यवाद।

      Reply
  2. Vishwa Mohan Tiwari

    मधुसुदन जी
    बहुत धन्यवाद।
    अब और समझ में आया, आनंद आया, ज्ञान बढ़ा।
    एक प्रश्न : जब वे कहते हैं कि संस्कृत तथा पाली के शब्द हटाने से वहां संकट आ जाएगा, तब क्या उनकी‌भाषा में अंग्रेज़ी का आक्रमण भारत की अपेक्षा कम है?
    इसमें‌क्या संदेह, क्योंकि तात्कालीन ब्रिटिश प्रधान मंत्री टोनी ब्लेयर जब थाइलैंड गए थे तब उऩ्होंने स्वयं वहां अंग्रेज़ी‌ भाषा की ज़बरदस्त पैरवी की थी ( देखें “भाषाई उपनिवेशीकरन ज़ोरों पर : राबर्ट फ़िलिप्सन की १३.३.१२ की गार्जियन में‌प्रकाशित रिपोर्ट ( यदि पाठक चाहेंगे तब मैं उसका सार इस स्थान पर डाल दूँगा।))
    पर अब मेरे मन में एक प्रश्न आता है कि थाय भाषा में अंग्रेज़ी शब्द कितने – अधिक या कम – हैं? क्योंकि वियतनाम युद्ध के समय अमैरिकी सैनिक बैंकाक में मनोरंजन के लिये जाते थे !!
    कुछ सुझाव :
    १९ वें‌ शब्द ‘खांखा’ जो कि गंगा से बना है, मुझे लगता है कि इसका अर्थ विस्तार नहीं हुआ है क्योंकि भारत में भी गंगा का अर्थ नदी‌ होता है, इस शब्द के पहले एक विशेषण लगाने वह उस विशेष नदी‌का नाम हो जाता है, जैसे धौली गंगा, बैनगंगा, पैनगंगा, पागल गंगा, राम गंगा आदि अनेकानेक नदियों के नाम इस तरह हैं। वैसे यह भी सच है कि गंगा नाम से हमारी एक विशिष्ट सम्मनित नदी‌भी‌है। बहुत संभव है कि इस पावन नदी का कुछ पुण्य लेने की‌भावना से गंगा शब्द के अर्थ का विस्ता हुआ हो.. और भी – गंगा ‘गं’ या ‘ग’ या ‘गं गं’ से बना है जिसका अर्थ होता है गतिशील, जो कि नदी का आवश्यक गुण है।
    २९ वें शब्द ‘इच्चा’ पर मेरा अनुमान है कियह ‘ईर्ष्या’ से बना होगा, इच्छा से नहीं।
    मुझे ३१ वें शब्द ‘अखाम’ के श्रोत पर संदेह है, पर कुछ और नहीं कह सकता।
    पुन: धन्यवाद
    विश्वमोहन तिवारी

    Reply
    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ. मधुसूदन उवाच

      श्री तिवारी जी।
      शोध पत्र का लेखक कहता है।
      (१)
      पाली और संस्कृत का प्रभाव
      ”The impact of Pali and Sanskrit words on Thai are the most significant, taking other foreign languages, namely, English, French, Chinese, etc. into account.”
      (२) १९ वे और २९ वे शब्द के विषय में आपका तर्क बहुत ही उचित पाता हूँ, अतः शत प्रतिशत सहमति।
      शेष, शोध पत्र से प्रामाणिक रहकर ही लिखा है।
      पर आपकी बाल में बहुत तर्क शुद्धता पाता हूँ।
      कृतज्ञता सहित धन्यवाद।

      Reply
  3. अवनीश सिंह

    क्या बात है| जानकारियों से भरपूर लेख|
    अब तो ऐसा लग रहा है जैसे थाई भाषा सीखना भी भारतीय भाषाओँ के जैसा ही आसान है|
    ये तो एक बानगी भर है| इस तरह तो पूरे शब्दकोश पर ही संस्कृत का प्रभाव होगा|

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *