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    Homeसाहित्‍यकविताप्रेम परिधि

    प्रेम परिधि

    बिंदु और रेखा में परस्पर आकर्षण हुआ
    तत्पश्चात् आकर्षण प्रेम में परिणत
    धीरे-धीरे रेखा की लंबाई बढ़ती गई
    और वह वृत्त में रूपांतरित हो गयी
    उसने अपनी परिधि में बिंदु को घेर लिया

    अब वह बिंदु उस वृत्त को ही
    संपूर्ण संसार समझने लगा
    क्योंकि उसकी दृष्टि
    प्रेम परिधि से परे देख पाने में
    असमर्थ हो गई थी

    कुछ समय बाद
    सहसा एक दिन
    वृत की परिधि टूटकर
    रेखा में रूपांतरित हो गई
    और वह बिंदु विलुप्त

    ✍️आलोक कौशिक

    आलोक कौशिक
    आलोक कौशिक
    शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन सम्पर्क सं.- 8292043472

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