लोदी वंश की दिल्ली सल्तनत

—विनय कुमार विनायक
आलम शाह सैयद ने आराम से
बहलोल लोदी अफगान को
दिल्ली की सल्तनत सौंपी थी
(1451 से 1526 ई.)
सन् चौदह सौ इक्यावन में
बहलोल लोदी एक अफगान
पख्तून बना दिल्ली का सुल्तान
इसके पहले सभी तुर्क थे
(पहले तीन वंश गुलाम,खिलजी,
तुगलक तुर्क नस्ल के चौथा सैयद
तुर्क-अफगान,पाँचवाँ लोदी अफगान)
प्रथम अफगानी सल्तनत का
बहलोल लोदी ने किया निर्माण
सन् चौदह सौ नब्बासी तक
दिल्ली रही बहलोल की दासी
फिर लोदी सिकंदर के अंदर
(1489-1517ई.)
जिसने बसाया आगरा शहर
फिर दिल्ली से आगरा
आया राजधानी को बदलकर
हिन्दू मां हेमा की संतान
कुछ उदार मन का निजाम खान
‘गुलरुखी’ इसका उपनाम
शेरों-शायरी भी था इसका काम
संगीत में रुचि थी जिसपर
लज्जत-ए-सिकंदरशाही रचना कराई
सुन्दर दिखने के लिए दाढ़ी नहीं बढ़ाई
लेकिन हिन्दुओं पर लगाया कर जजिया
मुस्लिम का बंद किया जुलूस ताजिया
मुस्लिम स्त्री की प्रतिबंधित पीर मजार पूजा
उसका गुरु था कबीर परमेश्वर
उसने संस्कृत के आयुर्वेद ग्रंथ का
कराया अनुवाद फरहद-ए-सिकंदरी
पर ज्वालामुखी मंदिर नगरकोट की मूर्ति तोड़कर
बाट बनाकर कसाइयों को मांस तोलने दे दी,
ज्वालामुखी से मुख में गलकंठी बीमारी ले ली,
बाधित हुई गीत संगीत शेरो शायरी की बोली,
अंततः मृत्यु मिली सिकंदर को बड़ी दुखदाई!
उसने कभी लिया नहीं लूट पे खुम्स कर
न्याय से लगाव था भूमि माप की उसको चाव
इसके तीस ईंचा सिकंदरी गज ने मापा था
सल्तनत का रज-रज पंद्रह सौ सत्रह से सब तजकर
गया स्वर्ग सिधार सुलतान लोदी सिकंदर
उसका ज्येष्ठ पुत्र इब्राहिम था सज-धज कर तैयार
(1517-1526 ई.)
दिल्ली के संग रास रचाने को सत्ता सुख पाने को
किन्तु दिल्ली अब नहीं षोढसी
और न सल्तनत में वो सत्त
सल्तनत तब खड़ा था शिशुवत्
उसको जो अपना ले छीन-झपट कर पा ले
संरक्षक का नाम मिटाकर
पाल्य पुत्र सा पा ले अपना नाम पता दे डाले!
ऐसे ही वक्त में आलम खान के बुलावे पर
आया बाबर इब्राहिम को मिट्टी में मिलाकर
सल्तनत को पानी पिलाया पानीपत में
नवीन पर्याय में बादशाहत को उसने पाया
बीस अप्रैल पन्द्रह सौ छब्बीस में
सल्तनत में विष फैला था चहुदिश
गिरा अफगानी शीश मुगल हुआ उन्नीस से बीस।
ऐ गोरी ! ग्यारह सौ बेरानबे की
तराईन में जो ‘गुल’ ‘खिला’ ‘तु’ ‘से’ ‘लो’
यानि गुलाम खिलजी तुगलक सैयद लोदी
की दिल्ली सल्तनत चली थी
अब बाबर मुग़ल का पानी पी!
पानीपत में पन्द्रह सौ छब्बीस में
सल्तनत बादशाहत में बदली!
—विनय कुमार विनायक

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