लेखक परिचय

सत्यव्रत त्रिपाठी

सत्यव्रत त्रिपाठी

लेखक भाजपा ( युवा) उत्तर प्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं

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सत्यव्रत त्रिपाठी

रेल को देश के विकास की रीढ़ कहा जाता है। रेलवे लगभग 14 लाख कर्मचारियों के साथ दुनिया में सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाला विभाग है। यह एकमात्र ऐसा व्यवसाईक संस्थान है जिसके पास ना सिर्फ अपने माल की बिक्री( रेल टिकेट एवं माल ढूलाई ) समय से पहले होती है बल्कि 30 % ग्राहक अग्रिम होते हैं , इसलिए पूरा रेल बजट हर भारतीय के लिए बहुत महत्व रखता है। आज जरुरत नित नई घोषणायें करने की नहीं है बल्कि अपने सभी संसाधनों के उपयुक्त दोहन की है  शायद यही सब कुछ सोचकर और सोशल मिडिया पर मिले 30 हज़ार से अधिक सुझावों को मिलाकर रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने रेल बजट-2015 में कुछ ऐसी ही घोषणाएं की हैं, जो एक ओर आम आदमी की उम्मीदों पर खरा उतरेगी तो वही दूसरी ओर इससे रेलवे के ढांचें और संचालन में भी आमूल चूल परिवर्तन आयेगा ।

भारतीय ट्रेनों में सफाई की बहुत समस्या रहती थी जिसके लिए अगल विभाग बनाया जायेगा । साफ-सफाई एक ऐसा प्रमुख क्षेत्र है, जिस पर यात्री असंतुष्ट रहते हैं। सर्वोत्तम प्राथमिकता साफ-सफाई में उच्चतर मानकों को सुनिश्चित करना है ।इसलिए सफाई के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। रेल डिब्बों में शौचालयों की हालत में सुधार किया जाएगा। हवाई जहाज की तरह ट्रेनों में भी वैक्यूम टॉयलेट लगाए जाएंगे जिसे होने वाले जल की बर्बादी को कम किया जा सकेगा । कूड़े-कचरे के लिए डिस्पोजल बैग देने से लोग यहाँ वहां अपना कूड़ा नहीं फेंकगे जिससे स्वच्छ भारत अभियान को भी बल मिलेगा । डिपोजल बिस्तर देने से जहाँ एक ओर सफाई और रख रखाव से बचत होगी तो वहि दूसरी ओर संक्रामक रोगों को भी बढ़ने से रोका जा सकेगा। एकीकृत साफ-सफाई के कार्य को एक विशेषज्ञता वाले कार्य के रूप में शुरू किया जाएगा, जिसमें प्रोफेशनल एजेंसियों की सेवाएं लेना और अपने कर्मचारियों को साफ सफाई की नवीनतम पद्धति का प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल होगा।

किराए में कोई बढ़ोतरी न करके यह साफ़ संकेत दिया है कि हमें देश की जनता से कोई अतिरिक्त शुल्क या प्रभार नही लिया जायेगा , इसकी भरपाई ट्रेनों और स्टेशनों पर विज्ञापनों के जरिए पूरी होगी जो की पूरी तरह से फायदे का सौदा है इसके साथ साथ यदि स्थानीय सांसद चाहे तो वो अपनी निधि को भी स्टेशनों पर खर्च सकेंगे। 200 नए आदर्श स्टेशनों को बनाने का भी वायदा है जिससे आने वाले दिनों में हवाई अड्डों जैसी सफाई और सुविधाओ को स्टेशनों पर भी पा सकेंगे हालांकि रेल मंत्री ने कोयला, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लौह एवं इस्पात जैसे उत्पादों के माल ढुलाई की दरों में वर्गीकरण के जरिये कुछ संशोधन का प्रस्ताव किया है। बजट में उत्पादों की ढुलाई के दूरी एवं उत्पादों के हिसाब से ऐसा वर्गीकरण किया गया है, जिससे कुछ उत्पादों का माल माड़ा 2 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

सुरक्षा को लेकर सरकार ने नया हेल्पलाइन नंबर 138 शुरू किया  हैं। हेल्प लाइन एप्स भी जल्द शुरू करने की योजना है। सभी प्रमुख स्टेशनों पर लिफ्ट और एस्कलेटर लगाए जाएंगे। पिकअप एंड ड्रॉ सेवा होगी शुरू। बुजुर्गों के लिए ऑनलाइन व्हील चेयर बुकिंग सुविधा मुहैया कराई जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। लेकिन इसके साथ ही महिलाओं की निजता का भी ध्यान रखा जाएगा। महिलाओं के लिए रेलने सुरक्षा हेल्पलाइन 182 शुरू करने की योजना बना रहा है। महिला रेल यात्रियों के लिए निर्भया फंड का इस्तेमाल होगा।

डेबिट कार्ड से स्टेशनों पर टिकेट वेंडिंग करना भी डिजिटल इण्डिया की योजना का ही हिस्सा है जिससे लोगों को टिकट लेने में कोई परेशानी न हो। इसके साथ ही आगमन-प्रस्थान के लिए यात्रियों को SMS अलर्ट भेजा जाएगा। ताकि लोगों को रेलवे स्टेशनों पर गाड़ी लेट होने की स्थिति में पेरशानी न हो।इनके साथ साथ सामान्य टिकेट भी मोबाइल पर मिलेगा । ए1 और ए श्रेणी के स्टेशनों के बाद अब बी श्रेणी के 400 स्टेशनों पर वाई – फाई देकर युवा और कामकाजी वर्ग को भी लाभान्वित किया है वही शताब्दी ट्रेनों में मनोरजन की सुविधा देकर सफ़र को अधिक आरामदायक बनाया जायेगा

ट्रेनों में सफ़र करते हुए हम को रेलवे के कुछ निश्चित खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहना पढता था लेकिन अब भारतीय रेल यात्रियों को स्थानीय व्यंजन भी उपलब्ध कराएगी। आप हवाई जहाज की तरह टिकट बुक कराते समय ही व्यंजन भी बुक करा सकते हैं। इसके साथ ही पहली बार फास्ट फूड की सुविधा भी दी जा रही है। ऑनलाइन खाने का ऑर्डर भी कर सकते हैं। यात्री IRCTC की वेबसाइट से खाने का ऑर्डर दे सकेंगे। वहीं कम दामों पर स्वच्छ पानी की उपलब्धता कराई जाएगी । साफ पानी के लिए वाटर वेंडिंग मशीन लगाई जाएंगी।

ट्रेनों में  वेटिंग लिस्ट कम करने के सवारी डिब्बों की संख्या बढाई जाएगी। अब गाडि़यों में 24 के स्थान पर 26 डिब्बे जोड़े जाएंगे। जनरल डिब्बों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी । अपर बर्थ में चढ़ने के लिए नई डिजाइन की सीढि़यां लगाई जाएंगी। सीटों का डिजाइन भी सुविधाजनक बनाया जाएगा। महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को निचली सीटें प्राथमिकता से दी जाएगी ।

ट्रेने समय से पहुंचे इसके भारतीय रेल को तेज बनाया जाएगा, 9 नए हाई स्पीड कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इस पर हाई स्पीड ट्रेन चलेंगी, जिससे लंबी दूरी भी कम समय में तय हो जाएगी। ट्रेनों की स्पीड 160 से 200 किमी प्रतिघंटा करने की योजना है।

अब रेल टिकट 120 दिन पहले बुक कर कराई जा सकती है। इससे पहले यह अवधि 60 दिनों की थी। वहीं यदि आप गलती से बिना टिकट लिए ट्रेन में चढ़ गए, तो पांच मिनट में आपको टिकट मिल जाएगी। ऐसी स्थिति में यात्री को जुर्माना नहीं देना पड़ेगा जिससे टी टी राज को खत्म किया जा सकेगा ।

आजादी के 6 दशकों बाद यह अपनी तरह का पहला रेल बजट है जिसमें कोई नई और लोक लुभावन बात नहीं है यह ऐसा पहला बजट है जिसमे अपने पास उपलब्ध संसाधनों से ही आय बढ़ने की बात की गयी है ट्रेन लेट होना एक आम बात है इसका प्रमुख कारण ट्रेनों का धीरे चलना जो कि पटरियों एवं पुलों की हालत के कारण है जिसपर सुधार की जरुरत सरकार ने महसूस कर ट्रेनों को गति को बढाने के लिए गंभीर दिख रही है इसके अलावा स्टेशनों की साफ़ सफाई और उच्चीकरण के लिए धीरे धीरे ही सही लेकिन माडल स्टेशन बनाने की योजना भी बिलकुल सटीक है  जैसे जैसे स्टेशनों की ग्रेडिंग होगी उसी के अनुसार यह सभी सुविधाये देर से ही सही किन्तु  छोटे एवं ग्रामीण अंचलो के स्टेशनों पर भी आएँगी  कोई नई ट्रेन ना चलाने से यह साफ़ है कि सरकार ट्रेनों की समय एवं गति के मामले में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है क्योंकि पहले से ही इतनी ट्रेने और मालगाड़ियाँ हैं उनका सही तरह से समय नियोजन ना हो पाने से घंटों लेट लतीफी चलती रहती है मेक इन इण्डिया पर जोर देने के लिए सरकार ने  बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में मालवीय चेयर फ़ॉर रेलवे टेक्नोलॉज़ी नाम से रेलवे रिसर्च इंस्टीट्यूट खोलना टी किया है  .यह पहला मौका है कि जब सरकारी स्तर पर रेलवे सुधर के लिए रिसर्च किया  जायेगा अब तक कुछ एन जी ओ या सरकारी कमेटियां कुछ निश्चित बिन्दुओं पर रिसर्च करती थी

कुल मिलाकर लब्बोलुवाब यह है रेलवे देश की रीड को दुरुस्त करने के लिए पूरी तरह तैयार है । जिस तरह से सरकार विकास के लिए पंचवर्षीय योजनायें बनती है बिलकुल उसी तर्ज पर रेलवे के विकास एवं आधुनिकरण के लिए अगले पांच वर्षों के लिए पञ्चवर्षीय योजना बनायीं गयी है।  जिसकी बहुत लम्बे समय से जरुरत थी । जब यह तय होगा कि पिछले वर्ष क्या हुआ और क्या करना चाहिए था । यह काम बिलकुल तय समय के अंदर पूरा होना चाहिए।  इस तरह से हम यह आशा कर सकते हैं कि आनेवाले वर्षों में हम भी भारतीय रेल में भी वह सब कुछ पा सकेंगे जो अन्य देशों में हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय परिवेश में ट्रेने लेट होना बीते हुए कल की बात हो जाएगी ।  यह बजट उसी तरह से है जैसे सोफ्टवेयर अपडेट होता रहता है।  इसे हम रेलवे 2.0 कह सकते है । एक बार फिर से प्रधानमंत्री और रेलमंत्री को इस दूरदर्शी , सुधारवादी एवं कालजयी रेल बजट के लिए बहुत बधाइयाँ !!!

लेखक उत्तर प्रदेश भाजपा ( युवा ) के प्रदेश मिडिया प्रभारी हैं

2 Responses to “प्राथमिक सेवाओं को आधुनिक बनाने वाला रेल बजट”

  1. sureshchandra.karmarkar

    रेलमंत्री ने वास्तविकताओं को मद्देनजर रखकर ,बुजुर्ग,लोगों की सुविधा को दृष्टिगत,रखकर और कई आवश्यक अपने आप हो सकनेवाली व्यवस्थाओं को देखकरबजट रख्हा है. आमदनी के लिए मामूली भाड़ा बढ़ाने का प्रस्ताव जरूर है. एक कदम आमदनी बढ़ने के लिए किया जा सकता था. टिकेट चेकिंग स्टाफ की भर्ती का कोटा कम से कम ५०%अर्धसैनिक बलों या सेवनिवररत सैनिकों से किया जाने की घोषणा करनी थी,या सीटिंग का आरक्षण जिन स्टेशन से होता है वहां रेल विभाग के अतिरिक्त किसी अन्य विभाग के स्टाफ को अकस्मात चेकिंग की व्यवस्था की घोषणा करनी थी. यदि सीटिंग ,और अन्य प्रकार से सीट देने के बदले जो वसूली की जाई है सब भलीभांति जानते हैं. इसे रोक कर यदि दंड वसूला जाय तो आशा से अधिक आय बढ़ जाएगी. जैसे एक व्यक्ति किसी दोतंतो या सुपर फ़ास्ट से काम अन्तर के लिए यात्रा कर रहा है। उसके पास टिकट है। किन्तु वह आरक्षित टिकेट नहीं है तो वह जुगाड़ लगाकर बैठ जाता है. यदि अकस्मात चेकिंग में जुगाड़ जमानेवाले और जुगाडित दोनों को एक अच्छी सजा मिल जाए जो आर्थिक अधिक हो ,(जेल की नहीं और स्टाफ को नौकरी से सम्बधित भी नहीं)तो इन महत्वपूर्ण गाड़ियों में एक तो चोरी की घटनाएं कम होंगी दूसरे आय बढेगी। सब जानते हैं ,(म. प्र.)के उज्जैन,रतलाम ,भोपाल ,नागदा आदि स्टेशनों में यात्री धड़ल्ले से जुगाड़ के जरिये से बैठते हैं. बजाय स्टाफ के इन यात्रिओं पर दंड हो. सफाई की समस्या का हल भी आसान है, जनप्रतनिधियों,समाजसेवकों ,स्वयंसेवी संघटनों,स्काउट, रेडक्रॉस ,ncc ,एवं सेवा निव्रर्त कर्मचारियों (जो इच्छुक और स्वस्थ हों )को ४-६ माह तक नाम मात्र के मानधन पर इस कार्य के लिए आमंत्रित किया जाय की वे स्टेशन पर सफाई के बारे में विनम्रता पूर्वक ,यात्रिओं को समझाइश दे. यदि वे कोई चीज निर्धारित जगह पर नहीं फेंकते तो उनके हाथ से लेकर स्वयं फेंके. और ६ माह के बाद जुर्माने की व्यवस्था हो.फिर इसका मानिटरिंग करे. अपने आप सफाई की समस्या हल्, रेल मंत्री इस बजट के लिए बधाई के पात्र हैं.

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    • जगदीश प्रसाद

      १२० दिन पूर्व आरक्षण होना कतई भी ठीक नहीं है |
      इतना पहले अपनी प्रवास यात्रा की योजना कोई भी परिवार या व्यक्ति का बनाना बहुत ही कठिन है | ऐसे में बाद में आरक्षण की मारा मारी होगी | बहुत जनों को अपनी संभावित यात्राओं के कई टिकट बनाने होंगे | बाद में निरस्त भी कराने होंगे | इससे अनावश्यक खर्च और श्रम यात्रा करने वाले आम जन का बढ़ता जायेगा |
      अतः ६० दिन की अवधि ही उचित है |

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