महाराष्ट्र-हरियाणा चुनावों में मोदी मंत्र की सफलता

मयंक चतुर्वेदी
लोकसभा चुनावों में तो सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक प्रबंधन देखा ही था लेकिन एक राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टी की ताकत क्या होती है यह दो राज्यों के विधानसभा चुनावों के आए परिणामों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। अपने सफल नेतृत्व के माध्यम से नमो ने सभी को बता दिया कि भले ही विरोधी कुछ भी कहें वे राजनीति के महागुरू हैं। जब नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लोकसभा चुनावों में परचम फहराने के कुछ ही महीनों के बाद भारतीय जनता पार्टी को उपचुनावों में बड़ा झटका लगा । जिसमें कि दस राज्यों में लोकसभा की तीन और विधानसभा की 33 सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे चौंकाने वाले रहे। तब सभी विरोधि‍यों ने कहना शुरू कर दिया था‍ कि मोदी का मैजिक खत्म हो गया किंतु उस वक्त नमो अपने सहयोगियों के साथ क्या रणनीति बनाने में लगे थे यह किसी को नहीं पता था।
वस्तुत: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के आए परिणामों को इसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए। मोदी यह भलि-भांति समझते हैं कि सरकारों के निर्माण में उपचुनावों का बहुत महत्व नहीं, हां यदि महत्व होता है तो वह प्रतिपक्ष के लिए जरूर है, क्यों कि वहां सदन में संख्याबल बढ़ने से अपनी बात रखने में विपक्ष के नाते मजबूती मिलती है। इसलिए संभतया मोदी का पूरा ध्यान इस बात पर लगा रहा कि कैसे दो राज्यों के होने वाले विधानसभा चुनावों को भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में किया जाए। अब जब महाराष्ट्र और हरियाणा में हुए चुनावी परिणाम सामने हैं तो कहा जा सकता है कि न केवल उनकी पार्टी में बल्कि जनता के बीच भी लोकसभा चुनावों की तरह मोदी मंत्र का प्रबंधन जादू चल गया।
नमो यह अच्छी तरह जान गए हैं कि जीत का सेहरा अपने सिर बांधने के लिए प्रचार का क्या महत्व है। सोशल मीडिया और प्रचार मध्यमों का अपने पक्ष में उपयोग करने के बाद इस बार उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा में जो बेहतर प्रयोग किया, वह है अन्य राज्यों से पार्टी कार्यकर्ताओं को इन दो राज्यों में बुलाकर उनका स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल बैठाकर चुनावी प्रचार में बेहतर उपयोग करना । अब इसके बेहतर और पार्टी पक्ष में सकारात्मक नतीजे सभी के सामने हैं। महाराष्ट्र में 288 सीटों के लिए और हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी 1 नम्बर की राजनैतिक पार्टी बनकर सामने आई है।
वस्तुत: यहां यह भी देखना लाजमी होगा कि आज के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव शुरू होने से लेकर अब तक के सफर में किस तरह अपनी टीम के खासमखास लोगों को भाजपा एवं अन्य जगह केंद्र बिन्दु बनाया और बनवाया। यह तो सिर्फ एक बानगी है कि पहले वह केंद्र की राजनीति में अपनी जीत मुकर्रर करने के लिए अमित शाह को उत्तर प्रदेश का चुनावी प्रभारी बनवाते हैं, क्यों कि वे यह जानते हैं कि देश में राजनीति की सफलता नब्ज यूपी से होकर गुजरती है। शाह का ही कमाल था कि उप्र में कांग्रेस के सफाए के साथ ही भाजपा ने वहां पर 80 में से 71 सीटें हासिल कीं। शाह की सार्वजनिक स्वीकार्यता करवाकर उन्हें फिर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष की आसंदी पर पहुंचाना आखि‍र मोदीजी की दूरदिृष्ट ही तो कहलाएगी।

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