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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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980cd71ff33d2209b2420f572fb184b3-grandeदेश की सर्वोच्च अदालत ने वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के मामले में राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 62 अन्य लोगों के खिलाफ जांच के आदेश दिए। इसमें उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों समेत कई पुलिस अधिकारी व नौकरशाह शामिल हैं। इससे दंगे का भूत लोकसभा चुनाव के मध्य फिर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पीछे पड़ गया है।अदातल के इस आदेश ने कांग्रेस को चुनाव के बीच मोदी के इस्तीफे की मांग करने का नया आधार दे दिया है। न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली की खंडपीठ ने कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया नसीम की शिकायत पर विशेष जांच दल से अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी की घटना में मोदी की कथित संलिप्तता के आरोप की जांच करने का निर्देश दिया।

फैसले के बाद कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यह संवैधानिक पदाधिकारी के गाल पर एक तमाचा है। हमें इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। मोदी न माफी मांगेंगे न इस्तीफा देंगे और न यही महसूस करेंगे कि उनके राज्य में कोई गलत घटना घटित हुई थी।”

दूसरी ओर भाजपा महासचिव अरुण जेटली ने कहा, “चुनावों के पूर्व गुजरात संबंधी मामलों को उठाए जाने की परंपरा बन गई है।”

अदालत के आदेश के बाद मोदी ने एक टीवी संवाददाता के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर पहले बोल चुके हैं। ज्ञात हो कि अदालत ने जांच दल को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

मोदी के अलावा जिन लोगों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं उनमें मोदी के 11 कैबिनेट सहयोगी, तीन वर्तमान विधायक और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव व पूर्व पुलिस प्रमुख शामिल हैं।

यह आदेश पूर्व सांसद दिवंगत अली अहसान जाफरी की विधवा जाकिया नसीम अहसान द्वारा दायर एक संयुक्त कानूनी याचिका पर आया है।

जाकिया ने नवंबर 2007 के गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने गुजरात दंगे में मोदी और अन्य की भूमिका की जांच की मांग से जुड़ी उनकी याचिका खारिज क दी थी।

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