“देश के युवाओं को आज अभद्रता करने की छूट दी गई है। हम अपने बच्चों को अभद्रता नहीं परोस सकते : डॉ. विनोद शर्मा”

मनमोहन कुमार आर्य

वैदिक साधन आश्रम तपोवन देहरादून का पांच दिवसीय शरदुत्सव 3 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक हर्षोल्लास से सफलतापूर्वक आयोजित व सम्पन्न हुआ। आश्रम के अन्तर्गत तपोवन विद्या निकेतन नाम से एक नर्सरी से कक्षा 8 तक विद्यालय संचालित होता है जहां 400 बालक व बालिकायें पढ़ते हैं। यह विद्यालय  वैदिकसाधन आश्रम अपने सीमित साधनों से संचालित करता है। विद्यालय को एक समर्पित प्रधानाचार्या श्रीमती उषा नेगी की सेवायें प्राप्त हैं जो इसे सफलता के शिखर पर ले जाने के लिये प्रयासरत हैं। विद्यालय में अधिकांश निर्धन बच्चे पढ़ते हैं परन्तु विद्या अर्जन की दृष्टि से बच्चों का बौद्धिक स्तर किसी पब्लिक स्कूल से कम नहीं है। दिनांक 4-10-2018 को इस विद्यालय का वार्षिकोत्सव मनाया गया जिसमें मुख्य अतिथि डा. नीरज मोहन, सहायक लेबर कमिश्नर सहित आश्रम के उत्सव में पधारे सभी ऋषि भक्त श्रद्धालु भी सम्मिलित हुए। हमने इस कार्यक्रम का आनन्द लिया और वहां जो देखा व सुना उसे आपके लिये प्रस्तुत कर रहे हैं।

 

कार्यक्रम का आरम्भ दीप प्रज्जवलन से हुआ। दीप प्रज्जवलन स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती सहित आश्रम के प्रधान व मंत्री जी आदि अनेक व्यक्तियों के द्वारा सम्पन्न हुआ। इसके बाद सरस्वती वन्दना हुई जिसे विद्यालय की 9 छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया। इन छात्राओं ने विशेष प्रभावशाली वेशभूषा धारण की हुई थी। इसके बाद स्वागत गीत भी विद्यालय की इन्हीं छात्राओं द्वारा गाया गया। स्वागत गीत के कुछ शब्द थे गीत हम गायेंगे, आगे बढ़ते जायेंगे, प्रकाश हम फैलायेंगे, स्वागतम्, स्वागतम्, स्वागतम् स्वागत गीत के बाद छोटे बच्चों द्वारा समूह नृत्य किया गया। इस गीत में आठ बच्चे आगे और आठ बच्चे उनके पीछे खड़े थे। सभी बच्चों ने लाल व सफेद रंग की वेशभूषा पहन रखी थी जो बहुत सुन्दर दीख रही थी। इस नृत्य में लड़के व लड़कियां दोनों थीं। इन बच्चों का आयुवर्ग लगभग 5 से 8 वर्ष के बीच था। इन बच्चों ने रिकार्ड किये हुए गीत की आवाज पर नृत्य किया। सभी बच्चे आत्मविश्वास से भरे हुए दिखाई दे रहे थे।

 

इसके बाद शहीद भगत सिंह जी पर एक लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। यह नाटिका बहुत प्रभावशाली थी। इसने श्रोताओं के हृदय को द्रवित कर दिया। हमारी आंखे भी गिली हो गई और अन्यों में बहुतों के साथ भी ऐसा ही होने का अनुमान है। इसके बाद आर्य विद्वान एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. विनोद कुमार शर्मा जी ने बच्चों को सम्बोधित किया। उनका विषय था युवा शक्ति व राष्ट्र भक्ति। उन्होंने कहा कि मातृभूमि, धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिये हमारे क्रान्तिकारियों ने अपना बलिदान दिया। हमारे धर्म व संस्कृति की हत्या हो रही है। हम बच्चों के जीवन का निर्माण करना चाहते हैं। हमारे सामने जो स्थितियां हैं वह शर्मनाक हैं। पिछले दिनों विवाहेत्सव सम्बन्धों पर जो न्यायिक निर्णय आया है उसकी डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से हमारे बच्चे और युवा कुण्ठाओं का शिकार होंगे। उन्होंने कहा कि हमारे देश में लिविगं रिलेशन, समलैंगिकता एवं विवाहेत्तर सम्बन्धों पर कानून आदि पास किये गये हैं। समाज के लिये भद्दे नियम बना दिये गये। उन्होंने कहा कि आज देश के युवाओं को अभद्रता करने की छूट दी गई है। हम अपने बच्चों को अभद्रता नहीं परोस सकते। वर्तमान कानून के अनुसार एक पति अपनी पत्नी को अभद्रता करने से नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि सरकारी निर्णय गलत है और वैदिक सत्य परम्पराओं तथा हमारे धर्म एवं संस्कृति के सिद्धान्तों के विरुद्ध है। मैं इसका विरोध करता हूं। मैं इनका समर्थन किसी स्थिति में नहीं कर सकता। स्थितियां विकृत हो गई हैं। आधुनिक जीवन शैली बच्चों को कहां ले जा रही है? इससे बच्चे विक्षिप्त अवस्था में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम गलत बात को नहीं रोकते तो इसका अर्थ है कि हम उस गलत बात के पक्षधर हैं। आचार्य विनोद शर्मा जी ने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने लिखा है कि सन्तान का कल्याण तभी हो सकता है कि जब उसके माता-पिता वैदिक सिद्धान्तों का पालन करने वाले धार्मिक हों। सन्तान को अपने धार्मिक माता-पिता की आज्ञाओं का पालन करने वाला होना चाहिये। उन्होंने कहा कि जब माता-पिता का चरित्र अच्छा नहीं होगा तो बच्चों व समाज का उद्धार नहीं हो सकता।

 

आचार्य डॉ. विनोद कुमार शर्मा जी ने कहा कि आर्यसमाज के वेद प्रचार के कार्यक्रम आर्यसमाज की चारदिवारी में सीमित रहते हैं। हमें आर्यसमाज मन्दिरों से बाहर जाकर आर्यसमाज की वेद विषयक मान्यताओं का प्रचार करना चाहिये। उन्होंने कहा वर्तमान में हम आर्यसमाज का प्रचार आर्यसमाजी विचारधारा के लोगों में ही करते हैं जिससे कोई विशेष लाभ नहीं होता। उन्होंने आगे कहा कि हम विद्यालयों में जाकर छात्र-छात्राओं को जगाने का कार्य करेंगे। श्री शर्मा ने कहा की बच्चों को बैठना आना चाहिये। कमर को सीधा करके बैठने से रीढ़ की हड्डी स्वस्थ एवं बलवान रहती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को दिन में कम से कम सात बार भूमि पर बैठना चाहिये। भोजन नीचे बैठकर करना चाहिये। सन्ध्या व यज्ञ तो नीचे बैठकर ही सम्पन्न होता है। नाश्ता भी यदि नीचे बैठकर करेंगे तो इससे हमारे पांचन तन्त्र को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि बूढ़ा वह है जो धरती पर न बैठ सके, जिससे चला फिरा न जाये और रुग्ण हो। आचार्य विनोद शर्मा जी ने कहा कि यह नियम है कि प्रत्येक मनुष्य को सूर्योदय से एक घण्टा पूर्व सोकर उठ जाना चाहिये। शौच से निवृत होकर प्राणायाम व ध्यान करें। इससे आपको लाभ मिलेगा। कानों को बन्द करके ओ३म् की ध्वनि करने से मनुष्य की स्मरण शक्ति बढ़ती है। शाकाहारी भोजन मे बहुत शक्ति है। बलवान हाथी और तेज दौड़ने वाला घोड़ा दोनों शाकाहारी प्राणी हैं। आचार्य जी ने कहा कि मांसाहार न करें। अण्डों में विष है इसलिये इनका सेवन भी कदापि न करें। अंकुरित अन्न को खाना चाहिये। आचार्य जी ने कहा कि बच्चे सुगन्धित पदार्थों परफ्यूम आदि का प्रयोग करते हैं इससे दमें की बीमारी हो सकती है। उन्होंने आजकल युवाओं में फटे हुए कपड़े पहनने के फैशन की आलोचना की। ऐसा करने वाले लोग समझदार नहीं है। उन्होंने कहा कि आप अपने ऊपर नियंत्रण रखेंगे तभी अच्छे काम कर सकेंगे। आपको सही दिशा में चलना है जिसका उपदेश वेद व शास्त्रो ंसहित वैदिक विद्वान करते हैं। आप अपने माता-पिता व गुरुजनों का सम्मान करें। उन्होंने बताया कि सन् 1992 में वैदिक साधन आश्रम में एक गुरुकुल चलाया गया था। उसमें वह एक विद्यार्थी थे। आचार्य भद्रकाम जी बच्चों को सारा दिन व्यस्त रखते थे और उनके सभी कृत्यों पर दृष्टि रखते थे। उन्होंने कहा कि लड़की व लड़कों का आपस में हाथ मिलाना अच्छी परम्परा नहीं है। लड़का लड़की को एक दूसरे का स्पर्श नहीं करना चाहिये। इससे अनेक प्रकार की हानियां होती हैं। आचार्य जी ने सबको प्रेरणा देते हुए कहा कि अपने जीवन का उद्देश्य महान बनाईये। आप राजा बन सकते हैं, चपरासी मत बनिये। इसी के साथ डॉ. विनोद कुमार जी ने अपने सम्बोधन को विराम दिया।

 

डॉ. विनोद कुमार शर्मा जी के सम्बोधन के बाद विद्यालय के बच्चों ने एक अंग्रेजी नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के बाद पं. नरेश दत्त आर्य जी का एक भजन हुआ जिसके बोल थे नाम बताना नाम बताना यह भजन पं. सत्यपाल पथिक जी का रचा हुआ है। पथिक जी भी इस आयोजन में उपस्थित थे। इसके बाद मुख्य अतिथि श्री नीरज मोहन जी का स्वागत आश्रम के मंत्री सहित स्कूल की प्रधानाचार्या एवं अन्य गणमान्य लोगों ने किया। इसके बाद कन्याओं का एक नृत्य हुआ। कन्याओं के नृत्य के बाद कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों द्वारा एक अंग्रेजी गीत गाया गया। स्कूल के विद्यार्थियों ने इसके बाद संस्कृत श्लोकों का गायन प्रस्तुत किया। इसके अन्तर्गत वेद मन्त्र सहित कुछ प्रसिद्ध श्लोकों का उच्चारण किया गया और उनके हिन्दी में अर्थ भी बताये गये। 4 कन्याओं द्वारा यह आकर्षक प्रस्तुति दी गई। इसके बाद ठीक 11.46 बजे एक हिन्दी नाटक प्रस्तुत किया गया। इस नाटक में आज की राजनीति में स्वार्थ व वोटरों के प्रति नेताओं की धोखाधड़ी को रेखांकित किया गया। नाटक बहुत प्रभावशाली था। जिस कलाकार ने नेता का रोल किया वह बहुत ही प्रभावशाली व कृत्रिमता रहित तथा वास्तविकता को लिये हुए था। इसमें नेताओं की सोच व करतूतों का भी सजीव चित्रण हुआ। अगला प्रोग्राम छात्राओं द्वारा देश भक्ति के गीत पर नृत्य करने का था। इस कार्यक्रम की समाप्ती के बाद बच्चों ने योगासनों का कार्यक्रम किया। अनेक बच्चों ने मंच पर सभी महत्वपूर्ण आसनों को बहुत खूबी के साथ प्रस्तुत किया। सभी बच्चों की एक जैसी वेशभूषा बहुत सुन्दर लग रही थी। अध्यापिका महोदया ने सभी आसनों के महत्व व लाभों को श्रोताओं को बताया। अगला कार्यक्रम डॉडिया नृत्य का था। बताया गया कि यह नाटक गुजरात में नवरात्रों में किया जाता है। बहुत ही मनमोहक एवं प्रभावशाली नृत्य था जिसे बालिकाओं ने चित्रित व प्रस्तुत किया।  बच्चों का अन्तिम कार्यक्रम एक कव्वाली के रूप में हुआ। इस कव्वाली में बच्चों ने अपनी पढ़ाई-लिखाई की परेशानियां व बड़ों की उनसे बड़ी बड़ी अपेक्षाओं को गाकर प्रस्तुत किया।

 

बच्चों के कार्यक्रमों की समाप्ति पर विद्यालय की प्रधानाचायर्या श्रीमती उषा नेगी जी द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद किया गया। उन्होंने कहा कि आपको हमारे विद्यालय के बच्चों के सभी कार्यक्रम पसन्द आये होंगे। आयोजन में उपस्थित श्रोताओं से किसी भी प्रकार के सुधार के लिए उन्होंने सुझाव देने को कहा। उन्होंने बताया कि तपोवन विद्या निकेतन की स्थापन सन् 1988 में हुई थी। समाज में लोग आर्यसमाज, वेदों के ज्ञान तथा वैदिक संस्कृति को भूल रहे थे। कुछ निर्धन लोग अपने बच्चों को महंगे व बड़े स्कूलों में पढ़ा नहीं सकते। अतः एक ऐसे विद्यालय की आवश्यकता अनुभव की गई जिसमें वैदिक मूल्यों व सिद्धान्तों की जानकारी सहित बच्चों को सरकारी पाठ्यक्रम की शिक्षा भी दी जाये। उन्होंने कहा कि आज ऐसे स्कूलों की आवश्यकता है जहां बच्चों में नैतिकता व चारित्रिक गुणों का विकास किया जाये। प्रधानाचार्या जी ने कहा कि बच्चों के निर्माण में शिक्षकों सहित माता-पिता का भी योगदान है। उन्होंने माता-पिताओं को अपने बच्चों के क्रियाकलापों का ध्यान रखने को कहा। बच्चे मोबाइल फोनों का दुरुपयोग न करें। आचार्या जी ने कहा कि यदि छोटे बच्चों पर अच्छे संस्कार पड़ेंगे तो वह बाद में बिगडेंगे नहीं। प्रधानाचार्या जी ने कहा कि हमारे स्कूल में अनेक निर्धन बच्चें हैं जिनके अभिभावक उनका शिक्षा शुल्क नहीं दे पाते। आश्रम से जुड़े कुछ लोग इसके लिये आर्थिक सहायता करते हैं। उन्होंने बताया कि श्री सुनील अग्रवाल जी ने सभी 400 बच्चों को ओसवाल गु्रप के अच्छे ऊनी स्वेटर प्रदान किये हैं। प्रधानाचार्य जी ने स्कूल को सहयोग देने वाले सभी महानुभावों का धन्यवाद किया। प्राचार्या जी ने बताया कि विद्यालय में बच्चों की संख्या 400 हो गई है। हमारे पास इससे अधिक बच्चों को विद्यालय में प्रवेश देने के लिये साधन नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यालय खुलने चाहियें जहां आर्यसमाज के सिद्धान्तों की शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाये। उन्होंने बताया कि उनके विद्यालय का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहता है। श्रीमती उषा नेगी जी ने विद्यालय की सभी शिक्षिकाओं का उनके सहयोग के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने आश्रम से जुड़े विद्यालय के सहयोगियों को भी धन्यवाद दिया।

 

आश्रम के मंत्री श्री प्रेम प्रकाश शर्मा ने अपने सम्बोधन में विद्यालय की प्रधानाचार्या एवं शिक्षिकाओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि आज विद्यालय के बच्चों ने जो कार्यक्रम प्रस्तुत किये हैं वह सभी बहुत अच्छे थे। कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व जिला जज श्री इन्द्रजित् मलहोत्रा जी ने बच्चों को पारितोषिक के रूप में दस हजार रुपये प्रदान किये। यह जज साहब इतने विनम्र एवं सज्जन है कि मंच व कुर्सी पर न बैठकर नीचे फर्श पर ही बैठे थे। कार्यक्रम में आये मुख्य अतिथि श्री नीरज मोहन जी ने भी बच्चों के लिये दस हजार रुपये प्रदान किये। श्री प्रेमप्रकाश शर्मा जी ने बताया कि कि हमारे विद्यालय के निकट अनेक विद्यालय चल रहे हैं। हमारे विद्यालय में सबसे अधिक बच्चे हैं। हमारे विद्यालय के बच्चों के शिक्षा के स्तर की सर्वत्र प्रशंसा की जाती है। शर्मा जी ने कहा कि यह सब विद्यालय के स्टाफ के कारण है। शर्मा जी ने बताया कि उनके दामाद श्री सुनील अग्रवाल जी ने स्कूल के बच्चों के लिए चार सौ ऊनी स्वेटर दिये हैं। उन्होंने बताया कि श्री अग्रवाल भी एक विद्यालय चलाते हैं। मंत्री श्री प्रेम प्रकाश शर्मा ने बताया कि आश्रम के चैरिटेबल अस्पताल में स्कूल के सभी बच्चों के अभिभावकों को मात्र 50 रुपये प्रतिमाह देने पर उन्हें अस्पताल से निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श दिया जा रहा है। सभी बच्चों व उनके माता-पिता के लिये हैल्थ कार्ड जारी किया जा रहा है।

 

स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि विद्या का क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है। विद्या ददाति विनयं का उन्होंने उच्चारण किया। जिस पेड़ में फल लगते हैं वह झुक जाता है। स्वामी जी ने कहा कि अपनी संस्कृति को बचाकर रखना हमारा कर्तव्य है। इसके बाद कक्षा आठ के विद्यार्थियों को स्वामी जी, मुख्य अतिथि एवं श्री पी.डी. गुप्ता आदि ने स्वेटर वितरित किये।

 

मुख्य अतिथि डॉ. नीरज मोहन ने अपने उद्बोधन में बच्चों को कहा कि आप मेरे से अच्छे विद्यार्थी हैं। मेरा अपने बारे में यह भ्रम दूर हो गया कि अपने विद्यार्थी जीवन में मैं बहुत अच्छा विद्यार्थी था। मुख्य अतिथि महानुभाव ने पं. नरेशदत्त आर्य जी के भजन की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि मैं आज प्रस्तुत एक कार्यक्रम की प्रस्तुति में रानी लक्ष्मी बाई का नाम सुनकर भावुक हो गया था। हमारी बच्चियां बालकों से अधिक प्रतिभावान हैं। हमें किसी छात्र को कम या किसी को अधिक नहीं आंकना है। हमारे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी को चैम्पियन आफ द वर्ल्ड पुरस्कार मिला है। इस पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। प्रकृति के पांच तत्व व पंचभूतों का संरक्षण हमारा उत्तरदायित्व है। सभी आवश्यक पदार्थ परमात्मा ने हमें निःशुल्क दिये हैं। दुनिया के सबसे बड़े आश्चर्य हम खुद हैं। मुख्य अतिथि महोदय डॉ. नीरज मोहन जी ने मानव शरीर की विशेषतायें बताईं। उन्होंने वेदों के शब्दों ‘मनुर्भव’ की चर्चा की। उन्होंने आज के आयोजन में भाग लेने के लिये स्वयं को सौभाग्यशाली बताया। उन्होंने कहा कि सन् 1875 में स्थापित आर्यसमाज आज पूरे देश को मार्ग दर्शन दे रहा है। उन्होंने बच्चों को कहा कि मोबाइल का प्रयोग कम करें तथा खेल के मैदान में खेलें। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति के कार्यक्रम की भी सराहना की। विद्यार्थियों को उन्होंने कहा कि वह अपने जीवन में दैविक, मानवीय व वैदिक धर्म के गुणों को धारण करें। पूरे विश्व व देश में हम नैतिक गुणों का प्रचार करें। उन्होंने कहा कि मैं इस विद्यालय के बच्चों में वह नैतिक गुण देख रहा हूं जो हमने अपने विद्यालय के दिनों में नैतिक शिक्षा के अन्तर्गत पढ़े थे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों तथा विद्यालय के शिक्षकों सहित सभागार में उपस्थित सभी बन्धुओं का धन्यवाद किया।

 

कार्यक्रम की संचालिका विद्यालय की एक शिक्षिका महोदया ने मुख्य अतिथि के उत्तम सम्बोधन के लिये उन्हें धन्यवाद दिया। स्कूल के दो छात्रों श्री वैभव एवं सचिन टमटा ने शान्ति पाठ कराया। इसी के साथ तपोवन विद्या निकेतन का वार्षिकोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न हुआ।

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