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    Homeसाहित्‍यकविताये देश है अपना

    ये देश है अपना


    ये देश है अपना
    हिम शिखर सिरहाने में
    कैलाश मानसरोवर उपर
    गंगा जमुना का कछार
    देश का बिछौना!

    ये देश है अपना
    कश्मीर बड़ी हसीन है
    वादियां बड़ी रंगीन है
    छोड़ो संगीन की बोली
    छेड़ो राग तराना!

    ये देश है अपना
    दिल्ली देश का दिल
    हरियाणा की हरियाली
    पंजाब की गेहूँ बाली
    पूर्व में सतबहना!

    ये देश है अपना
    गुजरात शेर का जब्ड़ा
    अरावली महाबली है
    विंध्याचल झुकल, मान
    अगस्त का कहना!

    ये देश है अपना
    बिहार है दान-पुण्य की
    नदियां खूनी जुनून की
    बहाती साथ खून पानी
    माने ना कहना!

    ये देश है अपना
    कृष्णा, कावेरी, गोदावरी
    कल-कल करती,देती सोना
    करती नही मनमानी
    शांति का गहना!

    ये देश है अपना
    मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर
    सदियों से साथ में रहकर
    करते गलबांही, सिखलाते
    शांति, शांति रहना!

    ये देश है अपना
    कैलाशी शिवशंकर जटा से
    निकली गंगा, जमुना, सिंधु
    सतलज,झेलम,व्यास, ताप्ती
    काम जीवन जल देना!

    ये देश है अपना
    मुकुट मणि हिमालय से
    बंगाल की खाड़ी का मानसून
    टकराना, जीवन रस बरसाना
    हिन्द महासागर पांव पखारे
    ऐसा देश है अपना!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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