लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

Posted On by &filed under विविधा.


-बीनू भटनागर-
shankaracharya__522608777

हिंदू धर्म सबसे पुराना धर्म है जिसको मानने वालों की विश्व में तीसरे स्थान पर है। हिन्दू धर्म में अनेक देवी देवताओं की पूजा करने की परम्परा है।हर क्षेत्र में कुछ स्थानीय देवी देवताओं की भी पूजा होती है, जिन्हें आम तौर पर मुख्य देवी देवताओं का रूप ही बता दिया जाता है। समय समय पर नये नाम से देवी देवताओं की पूजा का सिलसिला शुरू हो जाता है। एक समय संतोषी माता के व्रत और पूजा हर दूसरा व्यक्ति करने लगा था। हिंदुओं मे तो जीवित गुरुओं को भगवान का दर्जा देकर उनकी पूजा भी की जाने लगी है। राधास्वामी जो बुनियादी रूप से हिन्दू ही हैं अपने गुरु को ‘मालिक’ यानि भगवान ही कहते हैं। इनके अलावा अन्य बहुत से गुरु भगवान की तरह ही पूजे जाते हैं। हिन्दुओं में तो पीपल, बरगद, गाय, नाग, अस्त्र-शस्त्र और वाहन की भी पूजा होती है। किसी को भी पूजने की स्वतन्त्रता इसे दूसरे धर्मों से अलग बनाती है। हिन्दू गुरुद्वारे भी जाकर मत्था टेक लेते हैं और अजमेर मे दरगाह पर चादर भी चढ़ा देते हैं। पिछले कुछ दशकों में पूरे देश क्या विदेशों में भी साईं बाबा के भक्तो की संख्या कई गुना बढ़ी है।
दरअसल, पिछले 40-45 सालों से सांई बाबा के भक्तों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, इसका कारण क्या हो सकता है ये कह पाना तो संभव नहीं है, पर भक्तों की संख्या बढ़ने से मंदिर की आमदनी भी कई गुना बढ़ी है। मंदिर में ख़ूब सोना चांदी और नक़द आने से अब आर्थिक दृष्टि से शिरडी मंदिर तिरुपति और दक्षिण के कुछ अन्य मन्दिरों के समक्ष खड़ा है। इतना अनुदान कौन देता है? क्यों देता है? या मंदिरों को इतना धन स्वीकार करना चाहिये, या नहीं इस पर विवाद हो सकता है। (इस विषय को इस लेख की परिधि से अलग रखना ज़रूरी है)। 4 दशक पहले जहां शिरडी में एक छोटा सा मन्दिर हुआ करता था, वहां अब एक भव्य मन्दिर बन चुका है। बाबा का सिंहासन और छतरी सोने की बन चुकी है। शिरडी में यात्रियों के लिये समस्त सुविधायें हैं। शिरडी गांव से शहर बन चुका है। बाबा जो पहले स्थानीय लोगों में जाने जाते थे, अब पूरे भारत क्या विश्व में पूजे जाने लगे हैं।शंकराचार्य जी का यह बयान कि हिंदुओं को साईं मंदिर में नहीं जाना चाहिये और उनकी पूजा नहीं करनी चाहिये, उनकी इसी खीज का परिचायक है।
पहले भी कुछ हिन्दू कट्टरवादी संगठनों ने साईं बाबा के विरोध में आवाज़ उठाई थीं, पर वो उनकी लोकप्रियता के सामने दब गईं। अब स्वरूपान्द जी का ये कहना कि वो अवतार नहीं थे सूफ़ी संत थे, इसलिये उनकी पूजा नहीं की जा सकती हास्यास्पद लगता है। अवतार कौन था, कौन नहीं, ये कोई सिद्ध नहीं कर सकता, ये बातें विश्वास और आस्था की हैं। हिन्दू जन्म से हिन्दू होता है और वह किसी शंकाराचार्य, या अन्य व्यक्ति की बात मानने के लिये प्रतिबद्ध नहीं होता।

साईं बाबा के बारे में जो भी जानकारी उपलब्ध है, उससे ये पता नहीं चलता कि जन्म से उनका धर्म क्या था। वो एक पुरानी मस्जिद में रहते थे जिसे उन्होंने द्वारकमाई नाम दिया था। उनके जीवन काल में वो आस-पास के गांवों के हिन्दू और मुसलमानों में बराबर रूप से लोकप्रिय थे। कालांतर में उनका मन्दिर बना और पूरे हिन्दू रीति रिवाजों के साथ उनकी पूजा अर्चना होने लगी, दूर-दूर से लोग दर्शन के लिये आने लगे। इस्लाम मुसलमानों को हिन्दू धर्म के विधि विधानों में भाग लेने की स्वतन्त्रता नहीं देता, ऐसा माना जाता है। इसलिये साईं मंदिर में मुसलमान नहीं आते है। साईं हिन्दू अवतार थे, या नहीं इसको कोई प्रमाणित नहीं कर सकता। यदि वो सूफ़ी थे तो हिन्दुओं ने उनकी पूजा अर्चना शुरू ही क्यों की? शुरू होने के बाद मंदिर क्यों बनवाया? अब जब विश्वभर में उनके करोड़ों भक्त है, तो उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का क्या अर्थ है! ऐसी बयानबाज़ी शंकराचार्य को शोभा नहीं देती।

6 Responses to “शंकराचार्य के बयान के संदर्भ में…”

  1. narendrasinh

    binuji ek parampara khadi karne me sadiyon lagti hai ye sayad aap nahi janti aap ne jo khayal lihk diye hai vo sirf ek aisi bahas ko badhava dena hai jo koi mayna nahi rakhti aaj kal tv vale is charcha ko tul dete najar aane lage hai—–is desh ki ye kamnashibi hai ki iski parampara ke khilaf jo bhi bat hoti hai uske samarthan me uske hitechhu kahe jane vale hi hote hai ————–bat paiso ki or sone chandi ki nahi hai ye to ham sab jante hai ki sone chandi kitne mayna rakhati hai—-mahabharat padh lena —lekin jab parampar ke virudh koi kamkaj kiya jata hai to uska virodh jaruri hai or atkav bhi jaruri hai ———-aaj kal log aise jadugar or chamatkar karne valo ke pichhe lage huve hai —–manusya apani shradhdha or nistha use jo pasand hai uski or rakh sakta hai magar jahan parampara ka saval hai vanha use shatra sammat bato ko manana padega —-agar vo nahi manta or parampara ke virodh me jata hai to mahabharat nischit hai —-dusri bat —bhagvan ne gita me kaha hai ki ma maivanso jivloke jivbhut sanatan—-pratyek jiv usika ansh hai to fir harek manushya ko bhagvan ka ansh na mankar bhagvan manana ye to kans ki soch hai (kans khud ko bhagvan manta tha or sare bhogvadi use hi bhagvan mante the parinam kya huva ye sara jag janta hai )or kans ki soch ko to marna padega—tabhi to sabkr jivan me krisna ka janm hoga ?

    mai aapko ek bat batana chahunga 5 sal purv mai jab nokri ke liye ek gaun me gaya vaha matadi ka mandir tha koi pujari nahi tha gaun me se ek maharaj aate or diya karte the –1 sal ke bad ek sadhu aaye or unhone vahan dera jamaya 2 sal ke bad purana mandir ko naya banane ke nam par logo se chanda liya or matadi ki jagah me sai ka mandir bana diya ek mandir ke sthan par do mandir ho gaye or fir sai ke chamatkar or parche ki charcha aisi kardi ki aaj log guruvar ko vahan darsan ke liye jate hai chalke–us sadhu ne aisi ghuti pilai hai ki ladka khetme bap ke sath nahi jata magar dosot ke sath 2/3 km chalke sai ke mandir me jata hai kyon? kyon ki uska brain wash kiya gaya hai or ye ek hindu paramparao par dag hai muje khushi hai ki sankrachary jine ye mudda uthaya hai ——aadhya shankracharyji ne budhdha ke vicharo ko desh se nikal diya tha ye aap jante hai nahi jante honge kyon ki aap log prasidhdhi ke liye padhte hai or usike liye likhte hai —–muje purn vishvas hai ki hamari vaidik paramparao ko ma mughal or nahi angrej mita sake hai to fir aise log kuchh nahi kar sakte magar hamari mojudgime agar koi parde ke pichche hamari ashta or nistha sthan par dharm ke nam par hamala kare uska virodh har hindustani ko hai —————sai kon the or kon nahi the iski bahas nahi honi chahiye magar uske bachav me jo aaye hai unki durandesi kya hai or kyo ye parampar se hatkar aisa karte hai iski charha or iski chhanbin honi chahiye—–koi bhi is desh me rehne vala apani marji se kisi ko bhi man sakta hai magar kisi ke astha or shradhdha sthan par nahi aaj ek feshan bana di hai harek mandir me sai ki murti bithake —kya aap iska javab dengi ki har mandir me murti hone ke bavjud sai ki murti lagana ke pichhe kya ashay hai in logoka—–ye charcha muje lagta hai usi din honi chahiyee tih magar logo ki galat shradha ko najar nadaj kiya gaya or is najarandaj ke parinam aaj ye huva hai is liye jo shastra sammat nahi hai use shuru se hi daba dena chahiye—-nahi to vigrah hona tay hai kyon ki abjo ki aamdani koi thoda chhodega ?????

    Reply
  2. इंसान

    आजकल भगवान स्थापित किये जाते हैं कि नहीं मुझे मालूम नहीं लेकिन परम्परा अनुसार आदिकाल से ब्रह्मा विष्णु और महेश को हिन्दू भगवान मानते हैं| यदि आप लेख में दिए अपने विचारों के बचाव में कोई भी तर्क देते हैं तो यह आपका अधिकार है लेकिन कटाक्ष से आप अपने लेख की महत्वता ही खो देते हैं| आपका लेख हिन्दू में धर्म नहीं बल्कि हिन्दू का आचरण व्यक्त करता है| इसी आचरण के कारण हिन्दू अनादिकाल से अल्पसंख्यक से मत भेद होते हुए नानक, महावीर, दयानंद, व अन्य साधु संतों और उनके अनुयायिओं का आदर सम्मान करता आया है| जहां तक हिन्दू में धर्म की बात है मेरा विश्वास है कि शंकराचार्य स्वामी स्‍वरूपानंद सरस्वती जी ने अपने पद की मर्यादा में रह ऐसा वक्तव्य दिया है क्योंकि हिन्दू शास्त्रों में मनुष्य की पूजा का कोई विधान नहीं हैं|

    मुझे खेद तो इस बात का है कि बीच सड़क के कोई शंकराचार्य का विरोध करे तो क्यों करे? क्या हिन्दू आज इतने अशक्त और अनैतिक हो गए हैं कि शंकराचार्य से मत भेद का प्रतिरोध उन पर कीचड़ उछालते अथवा बीच चौराहे उनका पुतला जला कर करें?

    इस से पहले हरी बिंदल जी की टिप्पणी में दिए उनके अधिकतर विचारों से सहमती में मैंने टिप्पणी लिखी थी जो किन्हीं कारण वश प्रकाशित नहीं की गई है|

    Reply
  3. Hari Bindal

    1. On personal level, one can worship anybody or any Pathar, but to worship them in temple is demeaning already established Hindu gods, Vishnu Laxmi, Ram Pariwar, Radha Krishn, Shiv Pariwar, Hanuman, Ganesh, and Durga.
    2. It some people worship Sai baba as god, that mean they are not accepting the benchmark ideals and attributes of already established gods, this is an insult to Hinduism.
    3. One can worship anybody or Murthy, but to compare or giving equal or higher value than the Hindi gods is not only inappropriate, but diluting Hinduism. That what what Shankaracgarya mean.
    4. Sikhs do not worship Nanak Dev as god but as the great Guru. Same should be Sai Baba, he is not even equal to Guru Nanak.
    5. Worshiping Sai Baba is blind faith and copying other who do.

    Reply
    • Binu Bhatnagar

      आजकल भगवान भी ESTABLISHED होने लगे हैं कमाल है… !उन्हे तो बख़्श दो इस चक्कर से…. वैसे किसी भगवान को ESTABLISHE करने मे कितना समय नहीं… युग लगते … कुछ अंदाज़ा हो तो मेरा ज्ञान बढ़ाये। मुझे नही मालू था कि धर्म DILUTE हो सकते है धन्यवाद

      Reply
  4. scmaheshwari38@gmail.com

    B-48, 2nd floor, Ashoka Niketan
    Delhi-110092

    Shankaracharya dhongi hai. Lekin Sai baba ke bhakt bhi mannat ke chakkar mein sai baba ko poojte hain.

    suresh maheshwari

    Reply
  5. बीनू भटनागर

    मैने ग़लती से छतरी और मूर्ति को सोने का लिख दिया जब कि सिंहासन और छतरी सोने की लिखना चाहिये था,मूर्ति तों सफेद संगमरमर की है। इस त्रुटि के लियें क्षमा करे।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *