More
    Homeराजनीतिभारत में रोजगार निर्माण हेतु संघ एवं अन्य कई संगठन मिलकर कर...

    भारत में रोजगार निर्माण हेतु संघ एवं अन्य कई संगठन मिलकर कर रहे हैं प्रयास

    भारत आज विश्व का सबसे युवा राष्ट्र कहा जा रहा है क्योंकि देश की दो तिहाई जनसंख्या की उम्र 35 वर्ष से कम है। देश की 36 प्रतिशत जनसंख्या की आयु 15 से 35 वर्ष के बीच है और देश में 37 करोड़ युवाओं की आयु 15 से 29 वर्ष के बीच है। इतने बड़े वर्ग को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु हालांकि सरकारें विभिन्न स्तरों पर अपना कार्य बखूबी कर रही हैं परंतु देश के प्रत्येक नागरिक को यदि रोजगार उपलब्ध कराना है एवं नागरिकों को स्वावलंबी बनाना है तो अन्य स्वयंसेवी, धार्मिक, सामाजिक, औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों को आपस में मिलकर इस नेक कार्य को आगे बढ़ाना होगा।

    भारत में हालांकि पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक विकास की गति तेज हुई है जिसके चलते भारत में गरीबी घटी है। इस संदर्भ में अभी हाल ही में यूनाइटेड नेशनस ने भी भारत की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। आज देश में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे लोंगों की संख्या घटकर 15 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है जो कभी 50 प्रतिशत से अधिक हुआ करती थी। परंतु, देश की अर्थव्यवस्था में रोजगार के उतने अवसर निर्मित नहीं हो पा रहे हैं जितने अवसरों की आवश्यकता है, क्योंकि आर्थिक विकास के साथ साथ देश में जनसंख्या की वृद्धि दर भी तुलनात्मक रूप से अधिक बनी हुई है। जब तक प्रत्येक नागरिक को रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हो जाते हैं तब तक किसी भी देश का आर्थिक विकास बेमानी ही कहा जाएगा।

    आज विश्व के लगभग सभी देशों की अर्थव्यवस्थाएं पूंजीवाद पर आधारित हैं और इन सभी अर्थव्यवस्थाओं में चार सबसे बड़ी समस्याएं यथा, बरोजगारी, बढ़ती आर्थिक असमानता, मुद्रा स्फीति एवं लगातार बढ़ रहे घाटे की वित्त व्यवस्था, उभरकर सामने आईं हैं। इन समस्यायों का हल विकसित देश भी नहीं निकाल पा रहे हैं एवं अब ये विकसित देश भी कहने लगे हैं कि विश्व में साम्यवाद के बाद अब पूंजीवाद भी धराशायी होता दिख रहा है। इस प्रकार बेरोजगारी की समस्या से केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व ही जूझ रहा है।

    फिर भी, भारत को पूरे विश्व के आर्थिक क्षेत्र में यदि अपना दबदबा कायम करना है तो देश की मानव पूंजी पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना होगा एवं बेरोजगार युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना ही होगें ताकि देश में उपलब्ध मानव पूंजी का देश हित में उचित उपयोग किया जा सके। जब तक भारत पूर्ण रोजगार युक्त नहीं होता, तब तक वह पूर्ण स्वावलम्बन व वैश्विक मार्गदर्शक के रूप में अपने आप को स्थापित करने सम्बंधी लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता। देश की समस्त जनसंख्या के लिए रोजगार के अवसर निर्मित कर आर्थिक विकास की गति को तेज किया जा सकता है और सही अर्थों में भारत के लिए जनसांख्यिकी का लाभांश तो तभी उपलब्ध होगा।

    एक अनुमान के अनुसार, वर्तमान समय में भारत में संगठित क्षेत्र में नौकरियां (सरकारी, अर्द्धसरकारी व निजी क्षेत्र) केवल 6-7 प्रतिशत ही उपलब्ध हैं तथा असंगठित क्षेत्र में (कच्ची, ठेके पर, दिहाड़ी पर) एवं अन्य सभी क्षेत्रों की मिलाकर कुल 20-21 प्रतिशत तक ही उपलब्ध होती हैं। इस प्रकार देश में शेष 79-80 प्रतिशत लोग कृषि, लघु एवं कुटीर उद्योगों तथा स्वरोजगार जैसे क्षेत्रों में अपना रोजगार प्राप्त करते हैं।

    भारत में प्राकृतिक संसाधनों (कच्चा माल) की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता है और मानवशक्ति (श्रम) की विपुलता भी है साथ ही देश के नागरिकों में अंतर्निहित उद्यम कौशल (उद्यमिता) भी उपलब्ध है। देश में उक्त तीनों घटकों की नैसर्गिक उपलब्धता के चलते भारत अपने कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों को संवर्धित करते हुए कार्य (रोजगार) के पर्याप्त अवसर निर्मित कर देश की अर्थव्यवस्था को उच्च स्तर पर ले जाने की क्षमता रखता है।

    26 अप्रेल 2020 को परम पूज्य सरसंघचालक श्री मोहन जी भागवत ने देश को सम्बोधित करते हुए कहा था कि कोरोना महामारी की समाप्ति के बाद देश में जब आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत हो तो क्यों न इन आर्थिक गतिविधियों को नए मॉडल के अंतर्गत प्रारम्भ किया जाय ताकि विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अधिक से अधिक नए अवसर निर्मित हो सकें। इस प्रकार देश में आज आवश्यकता है आर्थिक विकास के एक नए मॉडल को लागू करने की। जो मानव केंद्रित हो, पर्यावरण के अनुकूल हो, श्रम प्रधान हो तथा विकेंद्रीकरण एवं लाभांश का न्यायसंगत वितरण करने वाले भारतीय आर्थिक प्रतिमानों को महत्व देता हो। आर्थिक विकास के इस नए मॉडल के अंतर्गत ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सूक्ष्म उद्योग, लघु उद्योग और कृषि आधारित उद्योगों को संवर्धित किया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में, असंगठित क्षेत्रों में एवं महिलाओं के लिए, रोजगार के पर्याप्त अवसर निर्मित हो सकें।

    भारत में बेरोजगारी की समस्या को हल करने के मुख्य उद्देश्य से अभी हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अन्य कई संगठनों को अपने साथ लेकर एक स्वावलंबी भारत अभियान की शुरुआत की है। संघ ने अपने साथ इस अभियान में सहकार भारती, लघु उद्योग भारती, ग्राहक पंचायत, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भाजपा एवं स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठनों को जोड़ा है एवं कई अन्य सामाजिक, आर्थिक एवं स्वयंसेवी संगठनों को भी इस अभियान के साथ जोड़ा जा रहा है।

    स्वावलंबी भारत अभियान को चलाने हेतु एक कार्यक्रम की घोषणा भी की गई है। जिसके अंतर्गत उद्यमिता, रोजगार व अर्थ सृजन को एक जन आंदोलन बनाते हुए युवाओं को श्रम का महत्व समझाया जाएगा एवं उन्हें जॉब सीकर के बजाय जॉब प्रवाइडर बनाने के प्रयास वृहद स्तर पर किए जाएंगे। साथ ही, जॉब सीकर एवं जॉब प्रवाइडर के बीच समन्वय स्थापित करने के प्रयास भी किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में वहां के प्रमुख विश्वविद्यालय अथवा महाविद्यालय के सहयोग से एक रोजगार सृजन केंद्र की स्थापना की जाएगी जहां केंद्र एवं राज्य सरकारों की रोजगार सृजन सम्बंधी विभिन्न योजनाओं की जानकारी, उद्यमिता प्रशिक्षण एवं युवाओं में कौशल विकास करने के प्रयास किए जाएंगे। साथ ही उस केंद्र पर बैंक ऋण प्राप्त करने संबंधी मार्गदर्शन, स्वरोजगार के क्षेत्र में आने वाली सम्भावित कठिनाईयों का समाधान एवं सफल स्वरोजगारियों तथा उद्यमियों से संवाद आदि की व्यवस्था भी की जाएगी। युवाओं में कौशल विकसित करने हेतु सबंधित कम्पनियों को आगे आना चाहिए एवं इस सम्बंध में केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने से यह कार्य सम्भव नहीं होगा। इन केंद्रों पर स्थानीय एवं स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के सम्बंध में नागरिकों में जागरूकता उत्पन्न करने सम्बंधी प्रयास भी किए जाएंगे। साथ ही, ग्रामीण स्तर पर ग्रामोद्योग व ग्रामशिल्प को बढ़ावा देने संबंधी प्रयास किए जाएंगे।

    कोरोना महामारी के दौरान यह देखने में आया था कि कई स्वयंसेवी, धार्मिक, सामाजिक, औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों ने केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ मिलकर कार्य करते हुए समाज के गरीब वर्ग को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध करायी थी। इसी प्रकार, भारत के नागरिकों को स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से देश में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर निर्मित कराने में केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ साथ स्वयंसेवी, धार्मिक, सामाजिक, औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों को एक बार पुनः आगे आकर बेरोजगारी जैसी विकराल समस्या को हल करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कर्णावती में दिनांक 11-13 मार्च 2022 को आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में भी समाज के सभी घटकों का आह्वान किया गया है कि विविध प्रकार के कार्य के अवसरों को बढ़ाते हुए हमारे शाश्वत मूल्यों पर आधारित एक स्वस्थ कार्य संस्कृति को प्रस्थापित करें, जिससे भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर पुनः अपना उचित स्थान अंकित कर सके।

    प्रहलाद सबनानी

    प्रह्लाद सबनानी
    प्रह्लाद सबनानी
    सेवा निवृत उप-महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक ग्वालियर मोबाइल नम्बर 9987949940

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    12,308 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read