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    वैदिक के ये कैसे बोल ?

    वरिष्ठ पत्रकार और विदेशी मामलों के जानकार डॉक्टर वेदप्रताप वैदिक मुम्बई हमले की साजिश रचने वालेved pratap vaidik पाकिस्तान में हाफिज़ सईद से मुलाकात के बाद सवालों से घिर गए थे। पाकिस्तान दौरे पर वहां के पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात के बाद भारत में मोस्‍ट वांटेड हाफिज सईद से मुलाकात की। सईद मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले का मुख्‍य आरोपी है। वेदप्रताप वैदिक पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान विदेश के राजनीति के अच्छे जानकार भी माने जाते हैं। इस मुलाकात को लेकर जब संसद में हंगामा शुरू हुआ। जिसमें वैदिक के ऊपर राजनीतिक दलों ने आरोप लगाने शुरू कर दिए थे कोई उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहा था तो कोई देश द्रोह का मामला दर्ज करने की बात कर रहा था। इस बात को लेकर वैदिक जी ने अपना पक्ष भी सबके सामने रखा था। हर खबरिया चैनल पर उस वक्त इसकी सुर्खियां बनी हुई थी। कुछ दिन मीडिया में सुर्खियां रहने के बाद ये मामला भी हर मामले के तरह ठण्ड़ा हो गया था। पर अचानक राजस्थान के अजमेर में तीन दिवसीय साहित्य महोत्सव के आखिरी दिन ये दबा हुआ जिन्न फिर से बाहर आ गया। साहित्य महोत्सव को सम्बोधित करते हुए वेदप्रताप वैदिक से कुछ पत्रकारों ने दबा हुआ जिन्न हाफिज़ सईद से मुलाकात के बारे में सवाल किया और कहा कि कुछ सांसद आप की गिरफ्तारी की बात करते है और आप पर देश द्रोह का मुकदमा चलाना चाहते हैं तो हैरान कर देने वाला जवाब मिला जिसकी शायद किसी पत्रकार ने उम्मीद भी न की होगी। जवाब को सुनकर तो पत्रकार एकदम से दंग रह गए होंगे । वो कुछ और नही लोकतंत्र का अपमान था। जो कि आक्रोश में आकर वेद प्रताप वैदिक ने सबके सामने किया। सवाल के जवाब में उनका ये कहना कि दो क्या पूरे 543 सांसद अगर सर्वसम्मति से मेरी गिरफ्तारी का प्रस्ताव पारित करते हैं और मुझे फांसी देने की बात करते हैं तो मै उन सांसदों और संसद पर थूंकता हूं। एक बात उन्होने और कही कि वे बुद्धिहीन, मूर्ख है। एक बात तो साफ है कि गड़े मुर्दे उखाड़ने की जरूरत ही नही थी। पर उखाड़ दिया तो वैदिक के ये कैसे बोल सामने आ रहे है। लोकतंत्र के इस मंदिर का अपमान करना कहा तक उचित है। एक कहावत है कि बुद्धिमान लोग अपने को मूर्ख और मूर्ख लोग अपने को बुद्धिमान समझते हैं। डॉक्टर वेदप्रताप वैदिक ने आगे कहा कि सरकार अगर जेल भेजना चाहती है उन्हे तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जेल में अपने बगल देखना चाहते हैं। क्योंकि मनमोहन सिंह भी पाक के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशरफ़ से बातचीत की थी। जो कि कारगिल युद्ध के दौरान सैंकड़ो सेना के जवानों के हत्या के आरोपी माने जाते हैं। क्या बढिया तर्क है वैदिक जी का । मोस्‍ट वांटेड हाफिज सईद से खुद की मुलाकात को अच्छा बताने के लिए कुछ भी बोल दो। मनमोहन सिंह ने किसी आंतकी से नही किसी देश के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी । और कारगिल के दौरान सिर्फ भारत के सैनिकों की जान नही गई थी पाक के सैनिक भी मारे गए थे। वैदिक की हाफिज सईद की मुलाकात के बाद जब स्वदेश वापस आए तो एक खबरिया चैनल पर अपनी इस मुलाकात पर सफाई के लिए अतिथि के रूप में बुलाया गया । उस कार्यक्रम को मै भी देश रहा था। जिसमें एक सवाल ये भी था कि आप की मुलाकात सईद से कैसे हुई किसने कराई। जवाब एक नौजवान पत्रकार ने कराई पर नाम नही पता किस चैनल या अखबार का है ये भी नही पता था। मुलाकात तो करा दी उसमें पर नाम नही बताया। चलो ठीक है पर आप ने मुलाकात कर सईद का साक्षात्कार भी लिया । आप ने अजमेर में कहा कि मै सत्य के लिए हमेशा लड़ा हूं। कभी डरा नही हूं। किसी से कोई समझौता नही किया है। बात में तो दम दिखा पर सईद से साक्षात्कार के समय यही जज्बा रखकर जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर बात कर लेते । आतंकवाद को लेकर बात कर लेते । आप ने कहा प्रभाकरन से मिला सईद से मिला देश द्रोह फैलाने वाले बहुत से लोगों से मिला हूं। आप उनसे मिलकर देश विरोधी सोच को जानना चाहते हैं अच्छी बात है। पर उनसे मिलकर देश विरोधी उनकी सोच को सबके सामने रखो। देश की जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों का अपमान क्यों कर रहे हो। संसद का अपमान क्यों कर रहे हो। उन्हें मूर्ख कहकर क्या जताना चाह रहे हो। जिस विश्वास के साथ जनता उन्हें चुनती है उनका विश्वास क्यों तोड़ रहे हो। खैर इसमें वैदिक जी आप का भी कसूर नही है। लोकतंत्र के मंदिर में उनके पुजारियों ने अपनी छवि ही ऐसी बना ली है। हर सत्र में संसद में झगड़ा होना इनकी छवि पर दाग लगाता जा रहा है। तभी तो आज आप ने उनपर थूकने तक की बात कर दी है।

    पर एक बात और है जब ये बात दोबारा से आप के सामने आई थी तो आप एक अच्छे विद्वान की तरह मुस्कराकर टाल सकते थे। उन पर थूकने के बजाय। क्यों कि वो आप को गिरफ्तार करने की बात करते हैं और देश द्रोह का मुकदमा चलाने की बात करते है, इसलिए उन्हें आप ने मूर्ख और बुद्धिहीन कह दिया। पर अपने इस बयान को आप कहा तक आकते हैं। आप इतने बड़े राजनीति के जानकार ऐसी टिप्पणी शोभा नही देती। आप भी लोकसभा चुनाव में अपना महत्वपूर्ण मत तो किसी न किसी सांसद को तो देते ही होगें। तो ऐसी टिप्पणी उन पर करके आप क्या जताना चाहते हैं। लोकतंत्र के इस मंदिर को पवित्र रहने दीजिए। इसकी पवित्रता की साख को इतना भी न गिराइए को बाकी देश हसें भारत पर।

    ऐसे बोल, टिप्पणी का प्रयोग संसद पर न करे तो ज्यादा अच्छा होगा।

    रवि श्रीवास्तव

    रवि श्रीवास्तव
    रवि श्रीवास्तव
    स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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