लेखक परिचय

अनुज अग्रवाल

अनुज अग्रवाल

लेखक वर्तमान में अध्ययन रत है और समाचार पत्रों में पत्र लेखन का शौक रखते हैं |

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अनुज अग्रवाल

बचपन में पिताजी कहानियां सुनाया करते थे | उसमे एक कहानी थी बिच्छू और साधू की | होता क्या है कि एक बिच्छू पानी में डूब रहा था | वही पास में स्नान कर रहे एक साधू उसे उठा कर पानी से बाहर ले जाने लगे | पर बिच्छू तो बिच्छू है उसने कई बार साधू को काटा पर साधू ने उसे पानी से बाहर ले जाकर ही दम लिया | उस संत के शिष्य ने उससे पूछा कि गुरूजी इस बिच्छू ने आपको कई बार काटा पर फिर भी आपने इसकी जान बचाई ! क्यों ? मर जाने दिया होता वैसे भी ये तो बिच्छू है इसका तो स्वभाव ही डंक मारना है भला ये संसार के किस काम का ?

उस साधू ने जवाब दिया कि जब “ये बिच्छू होकर अपने स्वभाव(डंक मारना ) को नहीं त्याग सकता तो मैं साधू होकर अपने स्वभाव (पतितो का उद्धार करना ) कैसे त्याग सकता हूँ ?

मैंने पापा जी से पूछा कि भला एसा भी कही होता है ? कोई आदमी आपको पीड़ा पहुंचाए और आप उसकी मदद करें ? ये कैसे संभव है ? तब पापाजी ने कहा था कि ये संभव है हमारी भारतीय संस्कृति है ही एसी | हर गिरे को उठाना हर जरूरतमंद की मदद करना हमारा कर्तव्य है चाहे वो कितना ही गिरा आदमी क्यों न हो |

आज यही कहानी मैं कश्मीर में चरितार्थ होते देख रहा हूँ | कश्मीर की स्थिति से आप अनभिज्ञ तो नहीं होंगे | जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ उसी कश्मीर की जिसमे देश का तिरंगा जलाया जाता है | वही कश्मीर जहाँ पकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते हैं | जहाँ कश्मीरी पंडितो को मार मार कर भगा दिया जाता है | जहाँ सेना को हत्यारा, बलात्कारी और न जाने क्या कहा जाता है | उस पर पत्थर बरसाए जाते हैं | उनके वाहन जला दिए जाते हैं | आज वही कथित “हत्यारी” सेना उन्ही पत्थर फेकने वाले बिच्छुओ को अपनी जान पर खेल कर बाढ़ से बचा रही है | मानवता की इससे बड़ी मिसाल न देखने को मिली है और न मिलेगी | बचपन की वो सारी भ्रान्तिया कि “साधू बिच्छू को क्यों बचाएगा ?” आज टूट रही हैं |

आज उनके अपने उन्हें संकट में छोड़ दूरी बनाये हुए हैं | कोई अलगाववादी कोई फईवादी उन्हें बचाने के लिए हाथ आगे नहीं कर रहा | जिस पाकिस्तान का झंडा ये लोग १४ अगस्त को फहराते हैं उसने भी हाथ खड़े कर दिए हैं | संकट की घडी में यदि कोई सहारा है तो वो है सेना और संघ का | जहाँ सेना बाढ़ में फंसे लोगो की जान बचा रही है वही संघ भी इनके लिए खाने कपडे आदि की यथासंभव मदद कर रहा है |

दिन भर सेना और संघ पर टिप्पणी करने वाले बुद्धिजीवी, सेव गाजा का नारा बुलंद करने वाले कथित सेक्युलर , ISIS में भर्ती होकर जन्नत का रास्ता खोजने वाले नौजवान अगर अपना बहुमूल्य समय में से थोडा सा समय भी देश की इस आपदा से लड़ने में लगाए लोगो को बचाए तो शायद खुदा खुद उन्हें जन्नत बक्श दे | आशा करता हूँ कि शायद अब आपके मन में सेना और संघ के प्रति भरी कड़वाहट कम होगी या वास्तविकता को आप समझेंगे | आप पत्थर फेकते रहिये हम आपको बचाते रहेंगे |

“आ ओ सिकंदर हुनर आजमाए | तू तीर आजमा हम जिगर आजमाए ||

2 Responses to “संत न छोड़े संतई कोटिक मिले असंत ..”

  1. mahendra gupta

    जब शैतान दिमाग में घुस जाता है तो उसे निकालना कठिन ही होता है, शायद अब कोई सध्बुधि आ जाये , अब न तो हाफिज सईद काम आ रहा है न लश्कर ए तैयबा और न अलगाववादी घाटी नेता , जो अपने घरों में दुबके पड़े हैं , सेना को उमर अब्दुल्ला कोस कोस कर हटाने की बात कर रहे थे, वह ही उनको बचा रही है, खुद अब्दुल्ला घर में में घुसे बैठे है,जिस मोदी सरकार वह हिकारत से देखते थे , वही मोदी व गृह मंत्री राजनाथ सिंह सबसे पहले सहायता के लिए आगे आये , देखो अब यहाँ बिच्छू अब भी अपना डंक मारना छोड़ेगा या साधु अपनी साधुवादिता , इंतजार करना होगा

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    • Anuj Agarwal

      सर ये तो बिलकुल स्पष्ट है कि बिच्छू डंक मारना नहीं छोड़ सकता | महात्मा गाँधी जी ने बहुत प्रयास किया था | खिलाफत आन्दोलन तक का समर्थन किया पर हुआ क्या ? एक २ टके का पाकिस्तानी नेता बोल गया कि हमारे यहाँ सबसे पतित मुसलमान भी गाँधी से बड़ा फकीर है | अब आप सोच सकते है कि गाँधी जी सोच परिवर्तित नहीं कर सके | सेना या संघ क्या करेगा . .??

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