क्या पाया प्रेम करके

कोई पूछे अगर मुझसे
क्या पाया?
प्रेम करके,
सहज कह दूंगा!

वहीं ढेर सारी यादें
जो अक्सर रह जाती हैं
एक प्रेमी के पास!

कई दिवा स्वप्न
जो दिवा स्वप्न ही रहे
साकार ना हो सके!

कुछ किरचें वेदनाओ की
चुभी हैं अब तक
रिस रही है मवाद जिनसे!

टूटा हुआ दिल
जो धड़कता था वफादारी से
प्रेम ही के लिए
दम तोड रहा है उसी की दहलीज पर!

एक प्रेमपत्र
इसे वहीं स्थान प्राप्त है
प्रेमियों के बीच में
जो बुद्ध को उनके अनुयायियों में!

और, हां..
बेशुमार अधूरापन
जो पूरा होने की आशा लगाए बैठा है अब तक!

कितना कुछ तो है मेरी झोली में
प्रेम करने के बाद!

० आशीष मोहन

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