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    Homeसाहित्‍यकवितानारी क्या है एक दिन बन के देखो

    नारी क्या है एक दिन बन के देखो

    —विनय कुमार विनायक
    नारी क्या है?
    एक दिन बन के देखो
    सुबह उठ किचन देखो
    नाश्ता टिफीन के साथ
    कार्यालय विदाकर देखो
    जाने से उसके आनेतक
    प्रतीक्षा करके तो देखो!

    नारी क्या है?
    एक दिन बन के देखो
    माहवारी पीड़ा की दौर
    गुजर करके तो देखो
    एक मां बन के देखो
    गहरी नींद से उठकर
    मल-मूत्र में पड़े रोते
    स्व बचपन को देखो!

    नारी क्या है?
    एक दिन बनके देखो
    माता-पिता को छोड़के
    किसी अनजान के घर
    उम्रभर रहने की बात
    जरा सोच करके देखो
    रुलाई में हंसके देखो!

    नारी क्या है?
    एक दिन बनके देखो
    बिना पाकेट पैसे के
    बाजार जाकरके देखो
    एक मन पसंद साड़ी
    खरीद करने के लिए
    उनपे निर्भर हो देखो
    पति के पाकेट देखो!

    नारी क्या है?
    एक दिन बनके देखो
    मैके विदा करके देखो
    बच्चों को खिला पिला
    स्कूल भेज करके देखो
    रोते को हंसा कर देखो
    हंसते संग हंसके देखो!

    नारी क्या है?
    नारी को देखना चाहो तो
    ईश्वर की भक्ति में देखो
    शिव की शक्ति में देखो
    विष्णु की लक्ष्मी में देखो
    ब्रह्मा की लेखनी में देखो
    सृष्टि की उत्पत्ति में देखो!

    नारी क्या है?
    ना दिखे तो घर में देखो
    माता की मूरत में देखो
    पत्नी की सूरत में देखो
    बहन के सत्व में देखो
    बेटी के स्वत्व में देखो
    सारे धर्म तीरथ में देखो!

    नारी क्या है?
    नारी की पहचान देखो
    देखो कि नारी दिखती
    आंगन की तुलसी में
    पूजा पाठ की थाली में
    धूप अगर की खुशबू में
    मंदिर की घंटी में देखो
    ईश्वरीय छवि नारी की!

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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