अभिजीत मुहूर्त में राम मंदिर निर्माण भूमि पूजन करना कैसा रहेगा ? – शुभ या अशुभ आईये जानें

5 अगस्त 2020 को सनातन हिन्दू धर्म के प्रतीक भगवान राम के मंदिर का भूमि पूजन किया जाएगा। राम मंदिर निर्माण का शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त में रखा गया है। घनिष्ठा नक्षत्र में यह शुभ कार्य शुरु होगा और शतभिषा नक्षत्र में मुहुर्त कार्य संपन्न होने के योग बन रहे हैं। 5 अगस्त 2020 के दिन मुहूर्त का समय 32 सेकेंड का रखा गया है। दोपहर 12 बजकर 44 मिनट 8 सेकेंड से 12 बजकर 44 मिनट 40 सेकेंड के बीच है। इस समयावधि में नींव की प्रथम ईंट रखनी आवश्यक है। 

राम मंदिर निर्माण का भूमि पूजन होने के साथ ही राम राज्य की नींच, राम राज्य का शुभारम्भ हो जाएगा। अभिजीत मुहूर्त में भूमि पूजन कार्य करने की बात जब से खबरों में सामने आई है, तब से इस मुहूर्त को लेकर अनेक विवाद और मतभेद भी सामने आ रहे हैं। सभी यह जानने के इच्छुक है कि क्या यह मुहूर्त शुभ हैं या अशुभ हैं। राम मंदिर निर्माण भूमि पूजन मुहूर्त से जुड़े सवालों को ध्यान में रखते हुए, आज हम इस आलेख के माध्यम से हम सभी सवालों का जवाब देने का प्रयास करेंगे- 

सामान्यजन के शब्दों में मुहूर्त शब्द से अभिप्राय ऐसे समय / काल से हैं जो शुभ कार्यों के योग्य हो। अर्थात ऐसा काल जिसमें शुभता का अंश हों, जो शुभता से युक्त होकर अशुभता से मुक्त हों, वही मुहूर्त है। सामान्यता एक मुहूर्त दो घटी का समय काल होता है। दो घटी को हम 48 मिनट का समय भी कह सकते हैं। इस प्रकार मुहूर्त से अर्थ 48 मिनट की ऐसी शुभ घड़ी हैं जिसमें शुभता का अंश हों, जिससे संबंधित कार्य की कार्यसिद्धि की प्राप्ति हो। किसी भी मुहूर्त में तीन विषयों का होना आवश्यक है।

  • प्रथम कार्यसिद्धि की प्राप्ति हों, अर्थात कार्य से जुड़ा उद्देस्य पूर्ण हों।
  • द्वितीय कार्य सहजता से पूर्ण हों।
  • तृतीय कार्य बाधारहित पूर्ण हों।

राम मंदिर निर्माण भूमि पूजन मुहूर्त में उपरोक्त सभी उद्द्श्यों को ध्यान में रखते हुए ही मुहूर्त तय किया गया है। अभिजीत मुहूर्त अपने नाम के अनुरुप फल देने वाला मुहूर्त कहा गया है।

आईये अब अभिजीत मुहूर्त के विषय में भी जान लेते हैं कि अभिजीत मुहूर्त से क्या अभिप्राय है-  किसी भी दिन के मध्य भाग से पूर्व के 12 मिनट का समय और मध्य भाग के बाद के 12 मिनट का समय अभिजीत मुहूर्त समय के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अभिजीत मुहूर्त में किए जाने वाले सभी कार्य सफल होते हैं और व्यक्ति को कार्यसिद्धि की प्राप्ति होती है।  दिन का आठवां मुहूर्त होने के नाते  इसे आठवां मुहूर्त का नाम भी दिया जाता है। ज्योतिष विद्या में मुहूर्त शास्त्रों को विशेष महत्व दिया गया है। मुहूर्त शास्त्र जिसमें मुहूर्त मार्तंड, मुहूर्त चिंतामणि, मुहूर्त चूड़ामणि, मुहूर्त माला, मुहूर्त गणपति, मुहूर्त कल्पद्रुम, मुहूर्त सिंधु, मुहूर्त प्रकाश, मुहूर्त दीपक इत्यादि महान ग्रंथों का अध्ययन करने पर हम यह पाते हैं, वैसे तो अभिजीत मुहूर्त में सभी शुभ कार्यों का प्रारम्भ किया जा सकता है।

अभिजीत मुहूर्त के विषय में सभी शास्त्र यह कहते हैं कि यह अत्यंत शुभ मुहूर्त हैं।  परन्तु इस मुहूर्त को बुधवार के दिन प्रयोग नहीं करना चाहिए। अर्थात सभी मुहूर्त शास्त्रों में अभिजीत काल को बुधवार के दिन त्याज्य कहा गया है। 

पंचांग शुद्धि , लग्न शुद्धि के बाद अन्य मुहूर्त नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।  यहां यह जान लेना सही रहेगा कि  मुहूर्त दो तरह के होते हैं शुभ मुहूर्त और अशुभ मुहूर्त। शुभ को ग्राह्य समय और अशुभ को अग्राह्‍य समय कहते हैं। शुभ मुहूर्त में रुद्र, श्‍वेत, मित्र, सारभट, सावित्र, वैराज, विश्वावसु, अभिजित, रोहिण, बल, विजय, र्नेत, वरुण सौम्य और भग ये 15 मुहूर्त है। रविवार के दिन चौदहवां सोमवार के दिन बारहवां, मंगलवार के दिन दसवां, बुधवार के दिन आठवां, गुरु के दिन छ्ठवां, शुक्रवार के दिन चौथा और शनिवार के दिन दूसरा मुहूर्त कुलिक शुभ कार्यों में वर्जित हैं।

पंचांग शुद्धि , लग्न शुद्धि के बाद अन्य मुहूर्त नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए। इस प्रकार देखें तो अभिजीत मुहूर्त में राम मंदिर निर्माण का भूमि पूजन मुहूर्त बुधवार अभिजीत काल में करना शुभ न होकर अशुभ है। जहां तक संभव हो इसका त्याग करना ही उचित रहेगा। मुहूर्त में शुभता की कमी कार्यसिद्धि में बाधक का कार्य करती हैं, और विवादों के जन्म का कारण बनती है।  

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