क्यों हुये डाक्टर लुटेरा एक समान

ओ नाच जमूरे छमा-छम,
सुना बात पते की एकदम
हाथपैर में हड़कन होती है,
सर में गोले फूटे धमा-धम
आं छी जुकाम हुआ या
सीने में दर्द करे धड़ाधड़क,
छींकें गरजे तोपों सी या
खून नसों में फुदकें फुदकफुदक
मेरा जमूरा बतायेगा,
क्यों डाक्टर लूटेरा नहीं किसी से कम
सुन मेरे प्यारे सुकुमार जमूरे
तेरी बात लगे सही एकदम।
यह जुमूरा बतलाता है
एक डाक्टर और लूटेरे का तानाबाना
हे भाई तूने अपने डाक्टर को
क्या अब तक नहीं पहचाना है।
गौर से देख डाक्टर और
लुटेरे में एक समानता है
लुटेरा नकाब में मुंह छिपाये,
डाक्टर मास्क पहनता है।
जान बचाना चाहो तो,
माल सारा बाहर निकालो
लुटेरे की इस धमकी से
झुकजाता है इंसान यारों।
जमूरा कहता है
जान की धमकी अब डाक्टर भी देता है
कईप्रकार के टेस्ट कराकर,
वह मरीज को लूट लेता है
लुटेरा हाथ में चाकू थामे,
और डाक्टर थामे छुरी
दोनों के हाथों लुटना ही हैें,
इंसान की किस्मत बुरी।
पेशा लुटेरे का खून से खेलना,
खेले खूनी घटनायें
खून खराबे से बचने,
लुटरे से सब लुट जाये।
जमूरा कह रहा
डाक्टर और लुटेरा दोनों एक समान
लुटेरा पहने नकाब,
मास्क सर्जन की पहचान
जान बचाना चाहते
धमकाना दोनों का काम
आदमी खुद ही लुट जाता,
दोनों को मिलते मुंहमाॅगे दाम।
हथियार लुटेरे का चाकू,
डाक्टर के हाथ में छुरी
जान चली जाने के डर से,
दोनों की इच्छायें हो पूरी।
जमूरा बता रहा
डाक्टर और लुटेरा, दोनों एक समान
खून से खेलने का पेशा,
है लुटेरे ओर डाक्टर के नाम
धन के भूखें दोनों है,
डराना-धमकाना दोनों का काम
आज व्यापारी हुये डाक्टर,
मुनाफा कमाना इनका ईमान
पीव वैद्य सुसेण से कहाॅ
मिलेंगे, पुकार रहा भारत का आवाम।

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