आमिर सुबहानी पर नीतीश मेहरबान क्यों

रविरंजन आनंद

आम तौर देखा जाये तो जो पढ़े लिखे विशेषकर नहीं हैं , उन्हें शायद ही गृह सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद के बारे में कुछ मालूम होगा. हां राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के आधार पर सामान्य लोगों को भी डीजीपी व चीफ सेक्रेटरी जैसे पदों के बारे में जानकारी रहती है. मैं खुद अपने पिता से गृह सचिव के बारे में पहली बार 2004 में सुना था. चूंकि मेरे पिता पुलिस विभाग से थे. हांलाकि मैं उस समय बहुत छोटा था. हां मुझे बचपन से डीजीपी व मुख्य सचिव के बारे में जानकारी थी. 2004 के बाद मैं सीधे तौर पर गृह सचिव के बारे में मुझे 2009 में जानकारी हुई थी, जब आमिर सुबहानी राज्य के गृह सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे थे. गृह सचिव का पद न सिर्फ महत्वपूर्ण माना जाता है बल्कि लॉ एंड ऑर्डर जैसे संवेदनशील मुद्दे की जिम्मेवारी होती है. सुबहानी 2009 से अब तक राज्य के गृह सचिव बने है. हांलाकि सरकार अपनी सहूलियत व सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए आमिर की पोस्टिंग बीच-बीच में दो-चार महीनों के लिए की जाती रही है। . वहीं आमिर पर नीतीश के काफी करीबी होने का आरोप तो है ही. और इन पर भ्रष्टाचार व सरकार के पक्ष में एक विशेष समुदाय के वोटों का धुर्वीकरण का भी यदा-कदा आरोप लगता रहा है. कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को दरकिनार कर नीतीश ने आमिर को गृह सचिव बनाया था. आज करीब नौ सालों से आमिर राज्य के गृह सचिव है.
कौन है आमिर
खैर अब थोड़ा सा आमिर सुबहानी के बारे में जान ले. आमिर सुबहानी अभी राज्य के प्रधान गृह सचिव के साथ ही एडीशनल चीफ सेक्रेटरी भी है. ये बिहार कैडर के 1987 बैच के आईएस अधिकारी हैं . अपने बैच के टॉर्पर भी हैं . आमिर मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के रहने वाले हैं . बिहार में इनकी गिनती एक तेज-तर्रार व ईमानदार आईएएस अधिकारी के तौर पर होती है.

2009 में आमिर पहली बार बने गृह सचिव
आमिर 1987 में आईएएस की परीक्षा पास करने के बाद बिहार के कई जिलों में डीएम भी रहे. डीएम रहने के दौरान इन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे. आमिर लालू के शासन काल में भी अच्छी पोस्टिंग पर रहे. हालांकि राबडी जब मुख्यमंत्री थी तब आमिर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गये थे. आमिर के बारे में लोग बताते है कि लालू नीतीश कोई भी मुख्यमंत्री रहे आमिर के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. ये अपने मन मुताबिक विभाग में रहते है. वहीं जब नीतीश कुमार 2005 नवंबर के आखिरी सप्ताह में राज्य की सत्ता की बागडोर संभाली तो आमिर उस समय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली थे. दो महिना के अंदर ही नीतीश कुमार ने आमिर को बिहार वापस बुला लिया. आमिर को बिहार कम्फेड का चैयरमैन बना दिया गया. मात्र चार माह के अंदर नीतीश सरकार ने आमिर को प्रमोशन देकर ज्वांइट सेक्रेटरी लेवल पर पहुंचा दिया गया. 2008 में आमिर को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव के रास्ते अक्टूबर 2009 में आमिर को राज्य का गृह सचिव बना दिया गया. लगातार चार सालों तक गृह सचिव रहने के बाद आमिर को सामान्य प्रशासन विभाग में भेज दिया गया. आमिर 2010 के विधान सभा चुनाव के समय गृह सचिव के पद से हटाये गये थे .लेकिन 2010 में नीतीश कुमार की सरकार बनते ही सुबहानी को पुन: गृह सचिव के पद पर बैठा दिया गया. वहीं 2015 के विधान सभा चुनाव में विपक्षी दलों के शिकायत पर चुनाव आयोग ने सुवहानी को गृह सचिव से हटाकर 1983 बैच के आईएएस अधिकारी राकेश कुमार को गृह सचिव बना दिया. लेकिन पुन नीतीश जब 2015 में महागठबंधन के साथ सत्ता में वापस आये तो पुन: आमिर को राज्य का गृह सचिव बना दिया. जबकि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राकेश कुमार पंचायती राज का मुख्य सचिव बना दिया गया. वहीं जीतन राम मांझी जब कुठछ महीनों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे तो सुबहानी को गृह सचिव के पद से हटा दिया था. जब राजनीतिक उठा-पटक के बाद नीतीश की वापसी हुई तो नीतीश ने पुन: सुबहानी को गृह सचिव बना दिया.
2016 में एक आईपीएस अधिकारी ने आमिर पर प्रताड़ित करने का लगाया था आरोप
वहीं 2016 में विभागीय व्यवस्था से पीड़ित होकर आईपीएस अधिकारी मोहम्मद मंसूर अहमद ने गृह सचिव पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था. उसने एक बेवसाइट से बातचीत के दौरान कहा था कि किस तरह फर्जी जांच में फंसाकर दर्जनों आईपीएस अफसरों का प्रमोशन रोका गया है. इसका बड़ा खुलासा कर सकते है. हांलाकि इस मामले को सरकार व गृह विभाग द्वारा किसी तरह दबा दिया गया.
आरा में डीएम रहते हुए भी इन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था
आमिर जब 90 के आस-पास आरा के डीएम थे तो इन पर जनता दल के नेताओं ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. साथ ही तत्कालीन सरकार से आमिर की स्थांनतरण की मांग की थी. वर्तमान लोक जन चेतना मंच के संयोजक मिथिलेश सिंह ने बताया कि सुबहानी जब आरा के डीएम थे. तो इन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. जिसको लेकर उस समय मैं (मिथिलेश सिंह) व लतफाश हुसैन जनता पार्टी में थे. हम लोगों ने आरा के गोपाली चौक पर डीएम के भ्रष्टाचार को खिलाफ नुक्कड़ सभा का आयोजन किया था. तत्कालीन सरकार से डीएम की स्थांनतरण की मांग की थी. लेकिन वहीं एक दो दिन बाद डीएम ने मुझे व लताफश को अपने कार्यालय में बुलाया. और वहीं गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. हांलाकि तीन दिन बाद बेल मिलने के बाद हम दोनों जेल से बाहर आ गये. पुन हम लोगों ने डीएम के खिलाफ आंदोलन शुरू किया.जिस आंदोलन में जन नायक कर्पूरी ठाकुर भी आये. तब जाकर सुबहानी का आरा से ट्रांसफर हुआ. मिथिलेश आगे बताते है कि आमीर को लालू नीतीश दोनों सरकारों में अच्छी पोस्टिंग मिलती रही है. चूंकि आमीर सत्ताधारी दल के लिए एक राजनीतिक एंजेडा के तहत काम करते है. एक समुदाय विशेष के वोटों को सत्ताधारी दल के पक्ष में धुर्वीकरण कराने के लिए निजी स्तर पर काम भी करते है. सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार में आमिर सुबहानी से कोई और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नहीं है जिसे राज्य का गृह सचिव बनाया जा सके. नीतीश कुमार ने नियमों को ताक पर रखकर एक ही पदाधिकारी को अपने सहूलियत के अनुसार राज्य का आठ ,नौ सालों से गृह सचिव बनाकर रखा है. जबकि पदाधिकारियों का एक विभाग में अधिकतम कार्यकाल तीन वर्ष का होता है. ऐसे में नीतीश कुमार को ऐसी क्या मजबूरी है कि चुनाव आयोग के हटाने के बाद भी सुबहानी को गृह सचिव बनाया गया है. वहीं उन्हें केंद्र सरकार से आमिर सुबहानी के पूरे गृह सचिव के कार्यकाल को सीबीआई जांच कराने की मांग की है.

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