अपने जवान को ही स्वीकार करने और सम्मान देने में पाकिस्तान को क्यों आ रही है शर्म?


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भारतीय वायुसेना के हीरो विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान सकुशल अपने देश लौट आए हैं। लेकिन सरहद पार पाकिस्तानी वायुसेना का एक परिवार चुपचाप शोक में डूबा है। उसके ही देश में उसकी पहचान छिपा दी गई है। शर्मिंदगी से बचने के लिए उसकी शहादत को उसके ही देश ने मानने से इन्कार कर दिया है। उस परिवार को दुनिया के सामने आने से मनाकर ब्लैकआउट किया है।

चूंकि पाकिस्तानी सेना के उस पायलट को उसके ही देश के लोगों ने मार डाला। कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तानी विमान एफ-16 के जिस विमान को भारतीय वायुसेना ने मार गिराया था, वह पाकिस्तानी कब्जे वाली जमीन पर गिरा था। पाकिस्तान ने पहले तो अपना विमान गिरने की बात को नकारते हुए दावा किया था, लेकिन बाद में भारतीय सेनाओं ने एफ-16 के मलबे के फोटो जारी करके अपने दावे को सही साबित किया। लेकिन अब तक एफ-16 विमान के पाकिस्तानी पायलट का क्या हुआ किसी को पता नहीं चला।

दरअसल एफ-16 फाइटर जेट क्रैश होने के बाद पायलट शहाजुद्दीन पैराशूट के जरिए बाहर निकल गए थे। पैराशूट के जरिए वह पीओके के नौशेरा सेक्टर में पहुंच गए। लेकिन जैसे ही वो अपनी सरजमीन पर उतरे, वहां मौजूद लोगों ने उन्हें भारतीय पायलट समझ लिया।

आपको याद होगा पाक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा था कि हमने भारतीय विमान को मार गिराया और उनके दो पायलटों को पकड़ लिया है। उन्होंने ट्वीट में बताया था कि एक पायलट (अभिनंदन) सेना के कब्जे में है और दूसरा अस्पताल में भर्ती है। हालांकि, बाद में अपने बयान से यू-टर्न लेते हुए पाकिस्तान ने कहा था कि उनके कब्जे में भारत का एक ही पायलट है।

लेकिन यह पायलट कोई भारतीय़ नहीं बल्कि पाकिस्तान के पायलट शहाजुद्दीन ही थे, जिसे पाकिस्तानी भीड़ ने पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। जिन्हें गंभीर चोटें आई और उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। जवान शहाजुद्दीन रिटायर्ड एयर मार्शल के बेटे थे।

शहाजुद्दीन की मौत की खबर का खुलासा लंदन के एक वकील खालिद उमर ने किया। उनके पोस्ट के मुताबिक अपने एक करीबी से उन्हें एफ-16 विमान के क्रैश होने की जानकारी मिली थी। खालिद उमर के सोशल मीडिया पेज के मुताबिक, एफ-16 विमान क्रैश होने के बाद पाकिस्तानी विंग कमांडर पैराशूट के जरिए सुरक्षित तरीके से पीओके के दक्षिण तरफ लाम वैली में इजेक्ट हो गया था। लेकिन यहां भीड़ ने उसे घेर लिया। लोगों ने समझा कि वो भारतीय पायलट हैं और जमकर पिटाई कर दी। खालिद उमर का दावा है कि पाक कमांडर को गंभीर चोटें आई थीं। जहां उसकी मौत हो गई।

यहां वास्तविक तो यही है कि पाकिस्तानी सरकार और मीडिया के जाहिलपन और झूठे बयानबाज़ी ने पाकिस्तानियो द्वारा ही F16 के पायलट को पीट पीट कर मरवा दिया और उसकी पहचान इसलिए जाहिर नहीं होने दी क्योंकि उसकी पूरी दुनिया में भद पीटनी तय थी।  जबकि होना तो ये चाहिए था कि वो जैसा भी था, पाकिस्तान को उस जवान का सम्मान करना चाहिये था। हर सैनिक अपने देश के लिए लड़ता है। लेकिन पाकिस्तान ने सिर्फ खुद को हिंदूस्तान के सामने शर्मसार होने से बचाने के लिए वह शर्मनाक हरकत की है। जो किसी भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है।  आप सोचिए, जनता तो जनता, उनकी सेना भी कितनी फूहड़ है। जो अपने ही पायलट मार डाला।

आपको बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान ने इस तरह की हरकत की है। इससे पहले उसने करगिल वार में भी अपने शहीद हुए सैनिकों को पहचानने से इंकार कर दिया था। करगिल का नतीजा भी पाकिस्तान के लिए बहुत शर्मनाक था, लेकिन अपने देश के लिए मर मिटने वाले शहीदों को सम्मान न देने का सीधा सा अर्थ यही निकलता है कि एक बेशर्मी को छुपाने के लिए दूसरी बेशर्मी को सीना ठोककर किया जा रहा है। इतिहास इस कृत्य के लिए भी पाक को कभी माफ नहीं करेगा।

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