बिना पन्हैंयां-प्रभुदयाल श्रीवास्तव

बिना पन्हैंयां तपी धूप में, कैसे चल पायें|

चलो नीम के नीचे बैठें ,थोड़ा सुस्तायें||

 

दौड़ भाग में टूटे जूते, कहीं छोड़ आये|

हार गये पापा से कहकर, नये नहीं लाये||

 

अम्मा ने की नहीं सिफारिश ,दादाजी चुपचाप|

जूते नहीं लायेंगे पापा ,बिना कहे ही आप||

 

चलो आज इसकी खातिर, दादी को उकसायें

चलो नीम के नीचे बैठें ,थोड़ा सुस्तायें||

 

जूतों के बिन एक कदम भी ,चला नहीं जाता|

इस पर भी मम्मी पापा को ,तरस नहीं आता||

 

बड़ी बहन ने मुझको ही ,पल पल में डांटा है|

मेरा हुआ गरीबी में ही, गीला आटा है||

 

माफी मांग मांग पापा से, उनको समझायें|

चलो नीम के नीचे बैठें, थोड़ा सुस्तायें||

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