हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे मैं जीवित जीव अभिमन्यु हूं

—विनय कुमार विनायक
हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!
यदि तुम चक्रवर्ती हो कहीं के,
तो मैं चक्र सुदर्शन हूं मही के!
यदि तुम आर्य छत्रधारी शीर्ष हो,
तो मैं अर हूं, छत्र हूं उपर सिर के!

हां! हां! दुर्योधन बांध ले मुझे!
यदि तुम ब्राह्मण हो धरा के,
तो मैं ब्रह्म हूं सकल ब्रह्मांड में!
यदि तुम जैन हो,तो मैं चौबीसों जिन हूं!
यदि तुम बौद्ध हो,तो मैं अकेला बुद्ध हूं!

हां! हां! दुर्योधन बांध लो मुझे!
यदि तुम हरिजन हो,तो मैं हरि हूं!
यदि तुम आदिवासी हो,तो मैं आदि हूं!
यदि तुम गुरु हो, तो मुझे गोविंद समझो!
यदि तुम आज के अंगुलीमाल हो,
तो मैं अद्यतन एकलव्य अंगुली विहिन
आरंभ से अंगूठा कटवाए बैठा शिष्य हूं!

हां! हां! दुर्योधन बांध सको तो बांध मुझे!
यदि तुम ईश्वर हो,मैं ईश हूं!
यदि तुम खुदा हो,तो मैं खुद हूं!
यदि तुम अवतार हो कोई परशुराम सा,
तो मुझे सहस्त्रबाहु अर्जुन समझ लो!

हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!
यदि तुम आंख के अंधे के वारिस हो!
यदि कान से चौकन्ने कर्ण के शागिर्द हो!
यदि हाथ शकुनि द्वापर के चौसर के पाशें हो!
यदि तुम धर्म की काली साया अश्वस्थामा यम हो!
और यदि तुम कलि के प्रथम चरण के दुर्योधन हो!
तो मैं निपट अकेला नर अर्जुन, नारायण के सहारे हूं!

हां! हां! दुर्योधन बांध लो मुझे और मारो मुझको!
कि मैं सव्यसाची नर अर्जुन का पुत्र अभिमन्यु हूं!
हां हां दुर्योधन मार मुझे कि अब भी मैं मरा नहीं हूं!
मैं बालक हूं,अभी भी सद्य युवा हूं,किन्तु नाबालिग हूं!

हां! हां! दुर्योधन तुमने इच्छामृत्युधारी मेरे बाबा भीष्म,
मेरे पिता के गुरु द्रोण, मेरे ताऊ कर्ण, फूफा जयद्रथ
और मेरे भाई लक्ष्मण बनकर मुझे मार मारकर मार दिया!
किन्तु मैं मरा! मरा! मरा कहां? मैं राम राममय होकर जीवित हूं!

हां! हां! दुर्योधन मैं भीष्म के आगे
पिता अर्जुन का शिखंडिनी कवच हूं!
मैं गुरु द्रोण के गर्दन पर लटका
मामा धृष्टिधुम्न की असि धार में जीवित हूं!
अर्जुन के गांडीव की टंकार से निकला वो तीर हूं
जिससे जयद्रथ के सिर के सौ-सौ टुकड़े हुए थे!

हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!
कि जब तुम दुशल्ला ओढ़कर मेरी मां को नग्न कर रहे थे,
तब केशव का भेजा बहन का दुपट्टा बना मैं द्रौपदी का चीर हूं!

हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!
कि मैं अबला नारी का खुला केश हूं,जिसने दु:शासन का लहू पिया!
हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!
कि मैं तुम्हारे गोपनीय अंग पर लिपटा वह वल्कल हूं,
जिसकी वजह से तुम्हारी वो कमजोर दोनों जंघाएं टूटी थी,
जिसपर तुमने पराई नारी माता को बिठाने की मंशा पाल रखी थी!

हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!
कि मैं सिख गुरुओं की परम्परा के पांचवें गुरु अर्जुन देव की
पांचवीं पीढ़ी का गोविंद नौ वर्षीय दशमेश पिता हूं!

हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!
मैं सुदर्शन चक्रावतार अर्जुन,नरावतार अर्जुन,
सिखगुरु अर्जुन देव सोढ़ी, कृषक अर्जुन सौंधूँ के
पुत्र पौत्र वंशज सोलह वर्षीय अभिमन्यु मरा नहीं हूं!

हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!
कि जब जब न्याय नहीं मिलता,अधर्म बढता,
कोई डायर बनकर भोली मासूम जनता पर फायर करता!
तब तब नारायण कृष्ण की बहन की कोख से,
कोई नरावतार अर्जुन सोलह वर्षीय बालवीर अभिमन्यु जनता!

हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे!
कि जलियांवाला बाग की मिट्टी से जन्मा मैं अभिमन्यु;
भगतसिंह,आजाद, बटुकेश्वर,ऊधमसिंह,बिस्मिल,असफाक हूं!

हां! हां! दुर्योधन बांध सको तो बांध मुझे!
तुम इरविन हो,तुम गोलमेज की बड़ी-बड़ी कुर्सियां हो,
नाइटहुड सर हो! किन्तु मैं सोलह वर्षीय अभिमन्यु
भगतसिंह,बटुकेश्वर दत्त का संसद में फेंका गया वो बम हूं
जिसका अहिंसक धमाका तुम्हारे अंधे बहरे पिता आका को सुनाई गई थी!

हां! हां दुर्योधन बांध सको तो बांध मुझे!
कि मैं ब्रिटेन में अनाथ ऊधमसिंह के किताब में उपजा वो पिस्तौल हूं!
जिसने जलियांवाला बाग के दरिंदे से हिसाब किताब बराबर की थी!

हां! हां! दुर्योधन बांध सको तो बांध! मार सको तो मार!
मैं माता सुभद्रा की कोख का विरवा अर्जुन द्वारा रोपा गया अभिमन्यु,
अपनी पुत्रवधू उतरा की कोख में सुप्त गुप्त जीव परीक्षित,
नर नारायण की इच्छा से वीर वंश को क्षीण नहीं होने देने वाला,
पीढ़ी दर पीढ़ी प्रतीक्षित भारत के भगवान का भगत अभिमन्यु,
सोलह वर्षीय बालक भगतसिंह आजाद, खुदीराम बनकर शहीद होता हूं!
उम्र सोलह से इकसठ के बीच उलट पलट पैरों से प्रेत ब्रह्म बनकर,
देश धर्म की पहरेदारी करने वाला जीवित जीव अभिमन्यु हूं!

हां! हां! दुर्योधन बांध मुझे! जितना चाहे मार मुझे!
मैं चक्रावतार अर्जुन,नरावतार अर्जुन,सिखावतार अर्जुन,
हल की पूंछ पकड़नेवाला, घनी मूंछ का हलधर किसान
अर्जुन का बेटा अजर-अमर-अविनाशी जीव अभिमन्यु हूं!

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