लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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एक समय था, जब अरविन्द केजरीवाल अन्ना हजारे के प्रतिबिंब माने जाते थे। अन्ना आन्दोलन के दौरान आईआईटी, चेन्नई में उनका भाषण सुनकर मैं इतना प्रभावित हुआ कि उनका प्रबल प्रशंसक बन गया। अन्ना ने यद्यपि घोषित नहीं किया था, फिर भी भारतीय जन मानस उन्हें अन्ना के प्रवक्ता और उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता देने लगा था। उन्होंने तात्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी पर भ्रष्टाचार के आरोप क्या लगाए, भाजपा समेत आरएसएस भी हिल गया। संघ के ही निर्देश पर गडकरी को भाजपा के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र भी देना पड़ा। गडकरी ने अदालत की शरण ली। केजरीवाल कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। उन्होंने गडकरी से माफ़ी मांगकर इस घटना का पटाक्षेप किया। गडकरी को उस समय निश्चित रूप से नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन केजरीवाल को ज्यादा क्षति हुई। उनकी स्थापित विश्वसनीयता का ग्राफ अब X-Axis पर लुढ़कने लगा।

इस समय केजरीवाल लालू और दिग्विजय सिंह की श्रेणी में पहुंच गए हैं। मैं आरंभ से ही खेल संघों पर राजनीतिक हस्तियों के नियंत्रण के विरुद्ध रहा हूं। जेटली, शरद पवार, राजीव शुक्ला जैसे कद्दावर नेताओं को क्रिकेट-प्रबन्धन ज्यादा भाता है। मात्र इस कारण उनकी चरित्र हत्या नहीं की जा सकती। केजरीवाल ने अपने प्रधान सचिव के भ्रष्टाचार और उनके कार्यालय पर सीबीआई के छापे से जनता का ध्यान हटाने के लिए बदले की भावना से प्रेरित हो बिना किसी प्रमाण के अरुण जेटली की चरित्र-हत्या करने की अपनी ओर से पूरी कोशिश की। डीडीसीए में हुई कथित अनियमितता के लिए जेटली को दोषी ठहराकर उनसे इस्तीफ़े की मांग भी कर डाली। इसके पूर्व केजरी सरकार ने ही डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए अपने मनपसंद त्रिसदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था जिसकी रिपोर्ट भी आ गई है। जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में अरुण जेटली के नाम का उल्लेख भी नहीं किया है। ज्ञात हो कि इसके पूर्व  शीला दीक्षित की कांग्रेसी सरकार ने भी अरुण जेटली को घेरने का पूरा प्रयास किया था और डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक आयोग का गठान किया था। उसने भी जेटली को क्लीन चिट दी थी। मोदी और अन्य भाजपा नेता राजनीतिक असहिष्णुता के हमेशा से शिकार रहे हैं। पूर्व प्रधान मंत्री नरसिंहा राव ने आडवानी को हवाला काण्ड में लपेटने के लिए भरपूर प्रयास किया था, चार्ज शीट भी दाखिल की थी; लेकिन आडवानी बेदाग सिद्ध हुए। नरेन्द्र मोदी पर जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कांग्रेस ने एक दर्ज़न से अधिक मुकदमे दर्ज़ कराए। सिट से लेकर सीबीआई तक ने वर्षों तक गहन जांच की, लेकिन सत्य, सत्य ही रहा। मोदी पर एक भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ। आज वे देश के प्रधान मंत्री हैं। देश ही नहीं विदेश भी उनके मुरीद हैं।

केजरीवाल कोई आज़म खां, ओवैसी या लालू यादव नहीं हैं। उन्होंने आईआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। आईआरएस में एक जिम्मेदार अधिकारी के पद की शोभा बढ़ाई है। किसी पर अनर्गल आरोप लगाना, कम से कम उन्हें शोभा नहीं देता है। राजनीति में आने के बाद केजरीवाल इतना नीचे गिर सकते हैं, किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।

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25 Comments on "अब तो शर्म करो केजरीवाल"

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डॉ. मधुसूदन
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इंसान
Guest

विपिन किशोर सिन्हा जी, आपके समयोचित व सारगर्भित लेख “अब तो शर्म करो केजरीवाल” में प्रस्तुत आपके वक्तव्य “एक समय था, जब अरविन्द केजरीवाल अन्ना हजारे के प्रतिबिंब माने जाते थे। अन्ना आन्दोलन के दौरान आईआईटी, चेन्नई में उनका भाषण सुनकर मैं इतना प्रभावित हुआ कि उनका प्रबल प्रशंसक बन गया|” ने मानो तीन वर्ष एक माह वर्ष पूर्ण आप ही के लेख, “दिग्विजय की राह पर केजरीवाल” पर मेरी टिप्पणियों में मेरे प्रत्यक्ष अविवेक को क्षण भर में दोषमुक्त कर दिया है| धन्यवाद|

इंसान
Guest
फिरंगी राज से कांग्रेस राज में होते हुए भारत ने बहुत कुछ खो दिया है। कांग्रेस राज की अन्तर्निहित अयोग्यता एवं अनुपयुक्त नीतियों के कारण तथाकथित स्वतंत्र भारत में भारतीयों की निष्ठा और राष्ट्रप्रेम कभी पनप ही नहीं पाया और आज भी हम विद्रोहीमनोभाव नकारात्मक- दृष्टिकोण बनाए हुए हैं। इससे पहले कि हम चिल्ला चिल्ला कर अपने विचारों की दरिद्रता, निर्विरोध असफलता, और चिरस्थाई विवशता को प्रदर्शित करें, क्यों न हम एक बार सकारात्मक ढंग से देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हुए भारत पुनर्निर्माण में यथायोग्य योगदान दें? कक्षा में व्यर्थ छिद्रान्वेषण करते अध्यापक से बच्चों को भयभीत और… Read more »
बीनू भटनागर
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बीनू भटनागर

सभी टिप्पणियां नमो भक्तों या केजरी प्रशसकों की हैं की हैं, क्याा निष्पक्ष चिंतन की इतनी कमी है!अन्य लेखों की तरह यह लेख भी लेख भी एकपक्षीय ही है

Himwant
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आप किसी पर अंध भक्त या प्रसंशक का लेबल लगा कर उसकी बातो को नकारती है तो आप निष्पक्ष चिंतन की हिमायती कैसे हो सकती है। यह लेख और टिप्पणियों ने सर्वाधिक पाठको को आकृष्ट किया है, अतः प्रशंसनीय है। सत्य दो अतियों के बीच कही छुपा होता है। आप अंध मोदी विरोधी है और यह भी एक अति ही तो है।

बीनू भटनागर
Guest
बीनू भटनागर

जिनको मैने नमो भक्त या केजरी प्रशंसक कहा है, उनकी लेखनी और विचारों को बहुत बार पढ़ा है। मै मोदी जी की इज्जत करती हूँ, जब कभी कुछ सही लगा है वह भी कहा है।

अनिल सिंह
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अनिल सिंह
अब तक के सबसे ज्यादा अभद्र और रोड छाप टपोरी भाषा से अलंकृत मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल है ! झूठ ऐसा बोलते हैं वो भी कैमरे के सामने जैसे लगता है की वे ही एक सच बोलते हैं बाकि श्रोता उनके चमचे जो हर बात को बिना सोचे समझे स्वीकार कर लेंगे ! आज तक कोई बात ठोस और सबूत से इस आदमी ने नहीं प्रमाणित किया न ही न्यायलय तक पहुचाया ! हर बार पल्टी मारी ! इस बार भी डेफरमेसन के केश में जेटली जी से माफीनामा लेकर पहुच जायेंगे ! क्युकी शर्म तो उनको लगती है जो… Read more »
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