लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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मृत्युंजय दीक्षित
विगत लोकसभा चुनावों व कुछ प्रांतों में लगातार पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा को मिल रही लगातार जीत का विजय रथ रोकने के लिए सभी मोदी विरोधी ताकतों ने अभूतपूर्व एकता का परिचय देते हुए आखिरकार पहले दिल्ली फिर बिहार और अब मध्यप्रदेश के लोकसभा उपचुनावों में भाजपा को पराजित करने में आखिरकार सफलता हासिल कर ली है। भाजपा को पराजित करने के लिए विरोधी दल व उनसे संबंद्ध सभी लोग साम, दाम, दंड, भेद व झूठ की राजनति का खुला व आक्रामक सहारा ले रहे हैं। भाजपा को राजनैतिक रूप से कमजोर व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को बदनाम करने के लिए बहुमत की सरकार को विफल करने के लिए आजकल देश के तमाम वामपंथी बुद्धिजीवियों ने एक नया शब्द गढ़ लिया है और वह है असहनशीलता का।
असहनशीलता की बौद्धिक लड़ाई के अंतर्गत सबसे पहले साहित्यकारों ने अपने पुरस्कार वापस किये लेकिन पुरस्कार राशि नहीं वापस की। फिर आगली कड़ी में इतिहासकार और वैज्ञानिक भी शामिल हो गये। जब इतने लोगों से बात नहीं बनी तब फिलीी दुनिया की मशहूर हस्तियों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। अब ताजा विवाद के अंतर्गत फिल्म अभिनेता आमिर खान और लोकप्रिय गायक तथा वंदेमातरम को नयी आवाज और धुन से लोकप्रियता के नये मुकाम तक पहुंचाने वाले ए. आर. रहमान भी इस विवाद में कूद पड़े हैं। एक कार्यक्रम के दौरान फिल्म अभिनेता आमिर खान ने अपनी पत्नी की बातों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें लग रहा है कि देश में असहनीशलता का वातावरण बन गया है लोग डरे व सहमे हुयें है। बातचीत में उनकी पत्नी ने कहीं और जाने की भी बात कही। ज्ञातव्य है कि आमिर खान आजकल अपनी नयी फिल्म दंगल की शूटिंग में व्यस्त हैं। आमिर खान को यह नहीं पता था कि उनका यह बयान देश की राजनीति व सोशल मीडिया में भूचाल ला देगा। आमिर के बयान का असर यह रहा कि उनके समर्थन में मोदी विरोधी राजनेता अरविंद केजरीवाल ,सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव कांगे्रसी युवराज राहुल गांधी भी आ गये वामपंथियों का लक्ष्य ही रहा है कि भारत की संस्कृति व सभ्यता को किस प्रकार से बदनाम किया जाये।
आमिर के बयान के बाद सोशल मीडिया में तो हंगामा हो गया है तो अभी तक जारी है। शिवसेना के मुखपत्र सामना ने अपने संपादकीय में आमिर व रहमान को 2 इडियट की संज्ञा देते हुए रणछोड़दास कहा गया है। आमिर का यह बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व शर्मनाक है। साथ ही आमिर के बयान का समर्थन करने वाले लोग अपनी मुस्लिम परस्ती की आदत से बच नहीं पा रहे हैं।
कांग्रेस व वामपंथी व अन्य सभी दल केवल मुस्लिम वोटबैंक के लालच में आमिर खान के देशद्रोही बयान का समर्थन कर रहे हें। आमिर खान को यह बया देने से पहले सौ बार सोचना चाहिये था । यह भारत और भारत के नागरिकों की असाधारण सहनशीलता ही है कि उनकी हिंदू विरोधी भारतीय संस्कृति की विरोधी फिल्म पीके भारतीय सिनेमाघरों में आसानी से चली और उसे हिंदुओं ने भी देखा जिसमें भगवान शिव का खुला अपमान किया गया था। पता नहीं क्यों आमिर खान को किस बात से देश में असहनशीलता नजर आने लगी अगर उन्हें ऐसा ली लग रहा है तो वे नवाबों की नगरी लखनऊ में आकर देखें, घूमें और लोगों से बात करें तो उन्हें पता चल जायेगा कि वास्तव में सहनशीलता और असहनशीलता है क्या ? आमिर का बयान किसी सदमे व आश्चर्यं से कम नहीं है क्योंकि आमिर खान पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान के ब्रांड एंबेडसर हैं और वे उनके साथ मंच भी साझा कर चुके हैं। पीएम मोदी की सरकार बनने के बाद आमिर खान की पीएम मोदी से सत्यमेव जयते को लेकर मुलाकात भी हुई थी तथा उनके साथ उसके बारे में विस्तार के साथ चर्चा भी की थी। आमिर खान का फिल्मी दुनिया में बड़ा नाम है। वे लगान , मगल पांड,े फना जैसी फिल्में बना चुके हैं। वे गुजरात में नर्मदा विरेधी आंदोलन चला रही मेधा पाटेकर के एंजीओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं तथा उनकी फिलम फना वास्तव में नर्मदा विरोधी आंदोलन को समपिर्त थीं। यह वहीं आमिर खान है जिन्होनें कभी पीएम मोदी को अमेरिकी यात्रा का वीजा न मिले इसका विरोध किया था और हस्ताक्षर अभियान में हस्ताक्षर भी किये थे।
आज सोशल मीडिया में सबसे बड़े खलनायक बनकर उभरे हैं तथा इनका जमकर उपहास उडाया जा रहा है। आमिर के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं अदालतों में मुकदमें दर्ज हो रहे हैं। देश के कई शहरों में उनकी शवयात्रा निकाली गयी और उनके पोस्टरों पर कालिखपोती जा रही है। आज हर कोई सामान्य देशभक्त अपने आप को आहत महसूस कर रहा है ? आज देश का प्रत्येक नागरिक आमिर से यह जानना चाह रहा है कि आखिर उनके साथ ऐसा क्या हो गया है कि उनकी नजर में देश में असहनशीलता बढ़ गयी है। क्या मेधा पाटकर की विदेशी फंडिग बंद हो गयी है या फिर अपनी नयी फिल्म दंगल का केवल और केवल नये कलेवर के साथ प्रमोशन कर रहे थे। आमिर का यह बयान बहुत बड़ी साजिश हैं। उनका यह बयान उस समय आया है जब पीएम मोदी मलेशिया और सिंगापुर के दौरे में थे तथा वहां पर भारतीयों एव निवेशकों के बीच भारत की सुनहली तस्वीर पेश कर रहे थे और वसुंधैव कुटुम्बकम की परम्परा का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे थे। आज दुनिया में भारत पहली बार संयुक्तराष्ट्र संघ में तेजी से प्रमुख स्थान पाने की ओर बढ़ रहा है लेकिन भारत के अंदर गहरायी तक पैठ बना चुकी भारत विरोधी हस्तियां अपाने विदेशी आकाओं के बल पर भारत को बदनाम करने की साजिश में लगी हुयी है। यह भारत विरोधी ताकतें अब वामपंथी इतिहासकारों , बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों , वैज्ञानिकों का सहारा लेने के बाद फिल्मी दुनिया का सहारा लने लग गयी है।
यह भारत विरोधी विदेशी ताकतों का फैलाया हुआ मायाजाल है कि आज उनके लोग भारत में रहकर भारत के खिलाफ जहरीला बौद्धिक आंतकवाद चला रहे हैं। यह भारत के खिलाफ जहरीला बौद्धिक छापामार युद्ध हैं। मोदी विरोधी लोगों को देश में शांति का वातावरण रास नहीं आ रहा है। असहनशीलता की शब्दावली की रचना करने उसकी आड़ में यह वामपंथी बुद्धिजीवी लोग पूरे भारत में भयानक दंगे करवाकर पीएम मोदी की छवि को आघात पहुचानें की बहुत गहरी साजिश रच रहे है। जब सोशल मीडिया में आमिर बुरी तरह से फसंने लगे उसके बाद उन्होनें जो अपनी सफाई दी है वह भी उनकी बेहूदगी की पराकाष्ठा है। आज आमिर खान को लोकप्रियताव धन देने वला हिंदुस्तान ही है। जब तक वे अतुल्य भारत का विज्ञापन करते रहे तब तक भरत में कहीं असहिष्णुता नजर नहीं आयीं लेकिन आज उन्हंे अचानक असहिष्णुता नजर आने लग गयी है। अब समय आ गया है कि असहिष्णुता की बात करने वाले सभी लोग अपनी बातों के प्रति स्पष्ट प्रमाण दें और कारण बतायें । अब वास्तव में सहनशीलता और असहनशीलता पर गहराई से चर्चा आवश्यक हो गयी है कि यह शब्द क्यों और कहां से आये तथा इनको समाज के समक्ष उठाने की आवश्यकता क्यूँ पड़ी? असहनश्ीलता का मुददा उठाने वालों की असली मंशा क्या है ?असहनशीलता की परिभाषा क्या है ? इससे एक अच्छी बत यह भी हो रही है कि यह सभी लोग देश की जनता के सामने नंगे हो रहो हैं। यही कारण है कि फिल्म पीके के पोस्टर में आमिर खान ने अश्लील पोस्टर पेश करते हुए अपने शरीर के मध्य भाग को ट्रांिजस्टर के सहारे ढक लिया था। आमिर की विकृत मानसिकता अब सबके सामने आ चुकी है। अब उनके सफाई वाले बयानों से कुछ नहीं होने वाला। अभी फिल्म अभिनेता सलमान खान ने याकूब मेनन को फांसी देने का विरोध किया था उसके बाद उनकी प्रदर्शित फिल्म ”प्रेम रतन धन पायो “ कुछ खास सफलता नहीं अर्जित कर सकी है नहीं सुर्खियां बटोर सकी अब आमिर की फिल्मों क्या होता है यह तो भविष्य ही बतायेगा। कहीं आमिर खान इस बयान के बहाने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी तो नहीं कर रहे।
मृत्युंजय दीक्षित

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