लेखक परिचय

विजय कुमार सप्पाती

विजय कुमार सप्पाती

मेरा नाम विजय कुमार है और हैदराबाद में रहता हूँ और वर्तमान में एक कंपनी में मैं Sr.General Manager- Marketing & Sales के पद पर कार्यरत हूँ.मुझे कविताये और कहानियां लिखने का शौक है , तथा मैंने करीब २५० कवितायें, नज्में और कुछ कहानियां लिखी है

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……और फिर तुम्हारी याद !

एक छोटा सा धुप का टुकड़ा

अचानक ही फटा हुआ आकाश

बेहिसाब बरसती बारिश की कुछ बूंदे

और तुम्हारे जिस्म की सोंघी सुगंध

……और फिर तुम्हारी याद !

 

 

उजले चाँद की बैचेनी

अनजान तारो की जगमगाहट

बहती नदी का रुकना

और रुके हुए जीवन का बहना

……और फिर तुम्हारी याद !

 

 

टूटे हुए खपरैल के घर

राह देखती कच्ची सड़क

टुटा हुआ एक पुराना मंदिर

और रूठा हुआ कोई देवता

……और फिर तुम्हारी याद !

 

 

आज एक नाम खुदा का

और आज एक नाम तेरा

आज एक नाम मेरा भी

और फिर एक नाम इश्क का

……और फिर तुम्हारी याद !

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1 Comment on "……और फिर तुम्हारी याद !"

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Vijay Nikore
Guest

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति, विजय जी ।
विजय निकोर

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