लेखक परिचय

आलोक कुमार

आलोक कुमार

बिहार की राजधानी पटना के मूल निवासी। पटना विश्वविद्यालय से स्नातक (राजनीति-शास्त्र), दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नाकोत्तर (लोक-प्रशासन)l लेखन व पत्रकारिता में बीस वर्षों से अधिक का अनुभव। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सायबर मीडिया का वृहत अनुभव। वर्तमान में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के परामर्शदात्री व संपादकीय मंडल से संलग्नl

‘अपने ही लोगों ‘ के सामने घुटने टेकने को मजबूर है सरकार

Posted On & filed under विविधा.

केंद्र सरकार को चाहिए कि वो नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में गंभीरता से सोचे, सिर्फ बैठकें कर लेने और मीडिया के सामने बयानबाजी कर देने से इस समस्या का समाधान नहीं होने वाला है । ठोस कार्रवाई वक्त की मांग है। देश के मंत्रीगण – राजनेता और आला – अधिकारी किसी बड़े नक्सली हमले के बाद शहीदों के शवों पर श्रद्धाञ्जलि के नाम पर फूलों का बोझ ही तो बढ़ाने जाते हैं ? और नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए लम्बी – चौड़ी मगर खोखली बातें करते हैं । लेकिन जब नक्सलवाद के खिलाफ ठोस रणनीति या कार्रवाई करने का समय आता है तो हमारे नेता ” गांधीवादी राग ” अलापने लगते हैं।

जनादेश बड़ा होता है तो जनाकांक्षाएँ भी बड़ी होती हैं

Posted On & filed under विविधा.

यूपी में भारतीय जनता पार्टी की इस ‘सुपर लैंड-स्लाईड विक्ट्री’ से ये स्पष्ट है कि जनता के मिजाज और नब्ज को मोदी-शाह और उनकी टीम ने बाकी ‘सबों’ से बेहतर भाँपा l इस ‘सब’ में मोदी – भाजपा विरोधी पार्टियाँ भी हैं , मीडिया का वो तबका भी है जो भाजपा की जीत का आक्लन… Read more »



किसी ‘ बटखरे ‘ के बोझ तले दब कर भ्रामक खबरें दिखाना मीडिया का काम नहीं है

Posted On & filed under मीडिया.

तृणमूल नेत्री व बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी के बाद राजद ही एक मात्र ऐसा राजनीतिक दल है जो केन्द्र सरकार के नोटबन्दी के अव्यावहारिक फैसले के खिलाफ अपने नेता श्री लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में सड़क पर उतरा है l राजनीति में विरोध का स्वर तभी प्रखर व प्रभावी होता है जब… Read more »

खामोश ….अभी पटना कर रहा अपने गुमशुदा सांसद की तलाश है

Posted On & filed under आलोचना, राजनीति.

दशकों से सांसदों को जनता के बीच जाने और उनकी समस्याओं से रूबरू होने की बातें होती आ रही हैं , लोकतन्त्र का तकाजा भी यही है l सुनने – सुनाने में अच्छी लगने वाली इन बातों का बाकियों पर क्या असर हो रहा है ये तो मैं नहीं जानता लेकिन हमारे ,पटना साहिब के,… Read more »

कानून और विधान केवल जनता के लिए ही नहीं अपितु राजा के लिए भी होने चाहिए

Posted On & filed under राजनीति.

नीतीश कुमार जी ….राज्य द्वारा बनाये गए कानून और विधान केवल जनता के लिए ही नहीं अपितु राजा के लिए भी होने चाहिएं.. बिहार के गोपालगंज में जहरीली शराब से हुई १३ मौतों और शराबबंदी लागू किए जाने से लेकर अब तक हुई ३० मौतों ने नीतीश जी और उनकी सरकार के तमाम वैसे दावों… Read more »

कैसा विकास हो रहा है बिहार में ?

Posted On & filed under विविधा.

बिहार में जनहित से जुड़े मुद्दे भी ‘व्यक्ति – विशेष ‘ के अंह की भेंट चढ़ रहे हैं , जनभावनाओं को हाशिए पर धकेल दिया गया है l सरकार की कार्य-शैली पर जब प्रश्न उठता है तो नीतीश जी का जबाव होता है कि “भ्रम फैलाया जा रहा है , लोग भ्रम में न फंसें… Read more »

‘ अपने लोगों ’’ ने ही नीतीश जी को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया है

Posted On & filed under विविधा.

बिहार की सरकार काफी समय से नक्सलवाद को महज कानून और व्यवस्था की समस्या कह कर इसकी भयावहता का सही अंदाजा लगाने में नाकामयाब रही है l बिहार में भी इनकी (नक्सली ) सत्ता के आगे राज्य सरकार बेबस है , औरंगाबाद का हालिया नक्सली हमला इसका ताजा- तरीन उदाहरण है l बिहार के लगभग… Read more »

उत्तरप्रदेश के अखाड़े में नीतीश और उनके दाँव – पेंच

Posted On & filed under राजनीति.

आलोक कुमार , २०१२ के विधान -सभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में २१९ सीटों पर चुनाव लड़ी थी नीतीश जी की पार्टी जनता दल यूनाइटेड …. नतीजा क्या था ? इस पर गौर फरमाने की जरूरत है …. सभी २१९ सीटों पर जमानत जब्त कुल प्राप्त वोट २७०३०३ वोट प्रतिशत ०.३६ प्रतिशत …. ऐसे में एक… Read more »

संकेत कुछ अच्छे नहीं हैं नीतीश जी के लिए …

Posted On & filed under राजनीति.

कल राजद संसदीय दल की बैठक के बाद वरिष्ठ राजद नेताओं ने नीतीश कुमार को सीधे अपने निशाने पर लिया l संकेत कुछ अच्छे नहीं हैं नीतीश जी के लिए …..राजद खेमे में इस बात की घुटन व् कसक सरकार बनने के बाद से ही थी कि “गठबंधन का सबसे बड़ा दल होने के बावजूद… Read more »

अपराध पर घड़ियाली – आँसू बहाने के खेल को देखना -सुनना ही शायद बिहार की नियति है ..!!

Posted On & filed under राजनीति.

सीवान में हुई पत्रकार राजदेव जी की हत्या के तार सीधे तौर से वर्षों से जेल में बंद अपराधी से नेता बने दुर्दांत शहाबुद्दीन से जुड़ते दिख रहे हैं l जेल में बंद रहने के बावजूद सीवान और इसके आस-पास के इलाकों में शहाबुद्दीन का नेटवर्क कभी भी कमजोर नहीं हुआ और अभी भी बेलगाम… Read more »