लेखक परिचय

बी एन गोयल

बी एन गोयल

लगभग 40 वर्ष भारत सरकार के विभिन्न पदों पर रक्षा मंत्रालय, सूचना प्रसारण मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय में कार्य कर चुके हैं। सन् 2001 में आकाशवाणी महानिदेशालय के कार्यक्रम निदेशक पद से सेवा निवृत्त हुए। भारत में और विदेश में विस्तृत यात्राएं की हैं। भारतीय दूतावास में शिक्षा और सांस्कृतिक सचिव के पद पर कार्य कर चुके हैं। शैक्षणिक तौर पर विभिन्न विश्व विद्यालयों से पांच विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर किए। प्राइवेट प्रकाशनों के अतिरिक्त भारत सरकार के प्रकाशन संस्थान, नेशनल बुक ट्रस्ट के लिए पुस्तकें लिखीं। पढ़ने की बहुत अधिक रूचि है और हर विषय पर पढ़ते हैं। अपने निजी पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की पुस्तकें मिलेंगी। कला और संस्कृति पर स्वतंत्र लेख लिखने के साथ राजनीतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर नियमित रूप से भारत और कनाडा के समाचार पत्रों में विश्लेषणात्मक टिप्पणियां लिखते रहे हैं।

आजाद भारत का आगाज़

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बी एन गोयल “बहुत साल पहले हमने भाग्य के साथ एक वायदा किया था और अब उस  वायदे को पूरा  करने का समय आ गया है. जब आधी रात के घंटे घड़ियाल बजेंगे, जब सारी दुनिया सो रही होगी, तब भारत नया जीवन और स्वतंत्रता प्राप्त कर जागेगा……” भूतपूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहलाल नेहरु का यह… Read more »

आकाशवाणी तब – हारमोनियम पर प्रतिबन्ध

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बी एन गोयल 18 अप्रैल 1980 के रात 8.45 के समाचारों में प्रसारित एक समाचार ने संगीत जगत में हर्षातिरेक की एक लहर पैदा कर दी थी. समाचार था कि आकाशवाणी द्वारा हारमोनियम पर गत चार दशकों से लगाये गए प्रतिबन्ध को समाप्त कर दिया गया है. संगीतकारों के लिए एक सुखद समाचार. इस समाचार… Read more »



शिकारी का अधिकार – (व्यंग्य संग्रह) आरिफा एविस

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समीक्षा – बी एन गोयल एक प्रसिद्ध दोहा है – शब्द सम्हारे बोलिए शब्द के हाथ न पांव एक शब्द करे औषधि एक शब्द करे घाव , इस दोहे में एक सलाह दी गयी है कि जब भी कुछ बोलो नाप तोल कर बोलो. सोच समझ कर बोलो. यह सलाह यद्यपि सब के लिए हैं… Read more »

आकाशवाणी की 80वीं वर्षगाँठ – एक प्रश्न

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बी एन गोयल गत 8 जून को आकाशवाणी की 80वीं वर्षगाँठ (1930 – 2016) बड़ी धूम धाम से मनाई गई. बधाईयां दी गई. सन्देश प्रसारित किये गये. आकाशवाणी और दूरदर्शन पर विशेष कार्यक्रम दिए गए. टवीटर पर मंत्रियों ने शुभ कामनाएं दी. विभिन्न केन्द्रों से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तियों जैसे डॉ. स्वामीनाथन आदि के इंटरव्यू उन… Read more »

देसी रियासतें और आकाशवाणी प्रसारण

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बी एन गोयल 5 नवम्बर 1970 की बात है. आकाशवाणी अहमदाबाद- वड़ोदरा ने सदा की भान्ति इस बार भी खां साहब की बरसी पर वड़ोदरा में संगीत सभा आयोजित की थी. इस में निमंत्रित कलाकार थे खां साब के प्रिय एवं पुराने शागिर्द सरदार सोहन सिंह जी. गायन में सोहन सिंह जी का उन दिनों… Read more »

प्रधान मंत्री का सन्देश/मन की बात

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बी एन गोयल प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी हर महीने मन की बात शीर्षक के अंतर्गत रेडियो के माध्यम से सम-सामयिक विषयों पर जनता से सीधे बात करते हैं. इस बार के कार्यक्रम में उन्होंने मनुष्य जीवन की सब से छोटी लेकिन सबसे अधिक महत्वपूर्ण ‘पानी’ की समस्या पर बात की. कार्यक्रम के दौरान… Read more »

आकाशवाणी का तब ?

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बी एन गोयल आकाशवाणी से जुड़ें मेरे इन कुछ लेखों को पढ़ कर मेरे परम शिष्य और मित्र राजेश्वर वशिष्ठ ने सुझाव दिया कि मैं ‘आकाशवाणी – तब और अब’ नाम से इस संस्था के तुलनात्मक स्वरुप पर (समय चक्र के रूप में) कुछ लिखूँ | मैंने इस पर काफी सोचा | मुझे लगा कि… Read more »

नामकरण – आल इंडिया रेडियो/ आकाशवाणी

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बी एन गोयल 8 मई 1976 को आकाशवाणी रोहतक का उद्घाटन करते समय तत्कालीन रक्षा मंत्री चौधरी बंसी लाल ने अपनी ठेठ हरियाणवी भाषा में रेडियो की उपयोगिता, आवश्यकता और लोकप्रियता की बात करते हुए एक उदाहरण दिया था. उनके कहने का भाव था कि आज जब मैं खेत में किसान को हल चलाते देखता… Read more »

प्रसारण और पत्रोत्तर

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  बी एन गोयल आज हम बात करेंगे पत्रोत्तर की. मेरे विचार से पत्रोत्तर आकाशवाणी प्रसारण का एक महत्वपूर्ण अंग है यद्यपि इस पर अभी तक कहीं कोई चर्चा नहीं हुई है. इस से पूर्व के लेख में सन्दर्भ में बात हुयी थी. श्रोता संघो/क्लबो के सन्दर्भ में श्री सोनी ने लिखा है कि उन्होंने… Read more »

परम्पराएँ प्रसारण की (3) पी सी चटर्जी

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बी एन गोयल “चटर्जी साहब, देख भाल कर काम कीजिये ऐसा न हो नौकरी से हाथ धो बैठे” “प्रसाद साहब, अपनी चिंता करो – आप पुलिस वाले हैं. यहाँ के बाद आप को नौकरी की मुश्किल पड़ेगी. मेरी फ़िक्र मत करो, मेरा स्तीफा हमेशा मेरी जेब मैं रहता है, आज भी तीन युनिवार्सिटी की वाईस… Read more »