लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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     saint                                              

निर्मल बाबा हो या आसाराम,

या कोई भी और संत महान,

धन और सत्ता के मतवाले,

शिष्यों  को भरमाने  वाले,

उनका लाभ उठाने वाले,

तिज़ोरी अपनी भरने वाले,

धर्म के नाम पर ठगने वाले।

 

धिक्कार…धिक्कार…धिक्कार।

 

सबसे अधिक दुष्ट वो बाबा,

नारी के पीछे जो भागा,

कलुषित मानसिकता वाला,

बड़ा गुनाह वो करने वाला,

दूर रहो इन दुष्टो से सब,

सबक सिखादो इनको इक अब,

ख़ुद पर यक़ीन करना सीखो,

आग लगा दो इनके धंधे को

कोई नहीं है महान आत्मा,

करना होगा इनका ख़ात्मा।

 

बहिष्कार..बहिष्कार..बहिष्कार..

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