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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा कि 2008 में स्पेक्ट्रम 2001 की कीमत पर चुने हुए लोगो को आवंटन किया। जो कि बाजार कीमत पर होना था। 2003 में एनडीए सरकार ने ये फैसला किया था कि भविष्य में स्पेक्टम की कीमत संचार और वित मंत्री तय करेंगे। और देश के खजाने की रक्षा करना वित मत्री का दायित्व है। उन्होने कहा कि 2007 में सितम्बरएअक्टूबरएनवम्बर तक वित्त मंत्रालय का रवैया सही था। लेकिन 11जनवरी 2008 को 2001 के दरों पर स्पेक्टम का आवंटन हुआ। जनवरी 2008 को वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि आगे से ये आवंटन बोली के माध्यम से होना चाहिए। श्री जेटली ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में प्रधानमंत्री अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते।

श्री जेटली ने कहा कि बीजेपी और सीएजी लगातार यूपीए सरकार को गलत साबित करती रही लेकिन यूपीए सरकार इसकों झुठ बताती रही। आज इस सरकार के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया है। श्री जेटली ने कहा कि ये निर्णय केवल सरकार की नैतिकता पर प्रश्न नहीं उठाती बल्कि अर्थव्यवस्था के संचालन पर भी सवाल उठाती है। इससे घरेलू और विदेशी दोनों निवेश पर फर्क पडा है। इसलिए अब सरकार की राजनैतिक और नैतिक ही नहीं बल्किकानूनी जवाबदेही भी बनती हैं।

श्री अरूण जेटली ने कहा कि 2005 में बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ। जो महज सत्ता परिवर्तन ही न होकर बिहार का पूरा एजेंडा परिवर्तन हुआ जिससे वहा विकासए सुशाषन और सामाजिक विकास ही सरकार की पहली प्राथमिकता हो गई है। लेकिन कांग्रेस मजहबी आरक्षण की आड में अपनी राजनीति आगे बढा रही है। उन्होने कहा कि ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी का तिहाई यानी कि ओबीसी कोटे का 33 फीसदी बनता है। श्री जेटली ने जोर देकर कहा कि बीजेपी की मजबूती ओबीसी के न्याय के पक्ष में होगी और साथ ही सुशासन और विकास के एजेंडे पर उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को अच्छी बढ़त मिलेगी व हमारी सरकार बनेगी।

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