लेख भारत में गणतंत्र की ढाई हजार वर्ष पुरानी परंपरा January 24, 2026 / January 27, 2026 by संदीप सृजन | Leave a Comment संदीप सृजन आधुनिक भारत ने 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र व्यवस्था को स्वीकार कर अपने नीति नियम का लिखित कानून संविधान के रूप में लागू किया लेकिन भारत को दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक माना जाता है, और इसका राजनीतिक इतिहास भी उतना ही समृद्धता और विविधता लिए हुए है। भारत में गणतंत्र की अवधारणा ढाई हजार वर्ष […] Read more » भारत में गणतंत्र भारत में गणतंत्र की ढाई हजार वर्ष पुरानी परंपरा
लेख हजार स्वर्ण मंदिरों का शहर है कांचीपुरम January 24, 2026 / January 27, 2026 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment – डॉ. लोकेन्द्र सिंह हिन्दू आस्था का प्रमुख केंद्र है तमिलनाडु का कांचीपुरम। हिन्दू वाङ्ग्मय में मोक्षदायिनी सप्तपुरियों का वर्णन आता है, उनमें कांचीपुरम भी शामिल है। अर्थात् कांची मोक्ष की भूमि है। ज्ञान-वैराग्य की भूमि है। संभवत: यही कारण है कि कांची को दक्षिण भारत की काशी भी कहते हैं। यह सप्तपुरियां भगवान शिव और विष्णु में बराबर-बराबर […] Read more » कांचीपुरम
लेख राष्ट्रीय मतदाता दिवस: लोकतंत्र की शक्ति और मताधिकार का महत्व January 24, 2026 / January 27, 2026 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’, 25 जनवरी 2026 पर विशेष आलेख) भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस देश के हर नागरिक के लिए अत्यंत अहम है। यह दिन देशवासियों के लिये केवल एक औपचारिक दिन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को स्मरण करने का अवसर है। इस दिन […] Read more » राष्ट्रीय मतदाता दिवस राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी
महिला-जगत लेख सम्मान, सुरक्षा और समानता का सवाल January 23, 2026 / January 23, 2026 by बाबूलाल नागा | Leave a Comment भारत में विकास और समानता की चर्चा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक उसमें बालिकाओं की स्थिति का ईमानदार मूल्यांकन न हो। 23 जनवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय बालिका दिवस इसी मूल्यांकन Read more » राष्ट्रीय बालिका दिवस
लेख लोकतंत्र की असली ताकत: जागरूक मतदाता January 23, 2026 / January 27, 2026 by बाबूलाल नागा | Leave a Comment राष्ट्रीय मतदाता दिवस Read more » 25 जनवरी राष्ट्रीय मतदाता दिवस जागरूक मतदाता लोकतंत्र की असली ताकत
खान-पान खेत-खलिहान लेख खेती का संकट और पारंपरिक देसी बीज January 23, 2026 / January 23, 2026 by अमरपाल सिंह वर्मा | Leave a Comment अमरपाल सिंह वर्मा निरंतर लागत बढ़ती चले जाने से हमारे देश में खेती संकट के दौर से गुजर रही है। एक ओर खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, बिजली आदि का खर्च बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान की आय सिमटती जा रही है। जलवायु संकट के दौर में अनिश्चित मौसम और कीटनाशकों के बढ़ते प्रकोप […] Read more » Farming crisis and traditional indigenous seeds
लेख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : आंख मूंद कर भरोसा कहीं मुश्किल में न डाल दे January 21, 2026 / January 21, 2026 by ज्ञान चंद पाटनी | Leave a Comment ज्ञान चंद पाटनी आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का हर क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा रहा है। चिकित्सा से लेकर कानून ही नहीं, कृषि और कारखानों तक, यह तकनीक बेहद उपयोगी और समय बचाने का साधन साबित हो रही है। साथ ही इसका बिना जांचे—परखे उपयोग करना मुसीबत का कारण भी बन रहा है। ताजा उदाहरण बॉम्बे हाईकोर्ट का है जहां एक वकील ने बिना जांचे एआई से बनी दलीलें दाखिल कीं और इससे नाराज अदालत ने 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया। इसी तरह वर्कडे की ताजा ग्लोबल रिपोर्ट बताती है कि सर्वे में शामिल 85 प्रतिशत कर्मचारी मानते हैं कि हर सप्ताह एआई से बचने वाले एक से 7 घंटों में से 40 प्रतिशत समय गलतियां सुधारने में चला जाता है। इसी तरह अमेरिका और चीन के विश्वविद्यालयों के शोध पत्रों के विश्लेषण से पता चलता है कि एआई ने रिसर्च की गति तो बढ़ाई लेकिन विविधता को नुकसान पहुंचाया है। साफ है कि एआई के फायदे अपार हैं, लेकिन बिना सावधानी के उपयोग से नुकसान भी उतना ही गहरा है। इसलिए संतुलित और सही इस्तेमाल ही इसका सही मार्ग है। निश्चित ही एआई का उदय 21वीं सदी की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति है। यह डेटा के विशाल समुद्र में डुबकी लगाती है और जरूरी जानकारी निकालती है। इसकी मदद से रिसर्चर तीन गुना अधिक पेपर प्रकाशित कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में तो एआई डायग्नोसिस की सटीकता बहुत ज्यादा है। एआई तकनीक डॉक्टरों को बीमारियों का जल्द पता लगाने, जांचों का विश्लेषण करने और उपचार सुझाने में मदद करती है। एआई संचालित टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को शीर्ष अस्पतालों के विशेषज्ञों से जोड़ते हैं जिससे समय और लागत की बचत होती है। साथ ही देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होता है। किसानों के लिए एआई एक विश्वसनीय साथी साबित हो रही है। यह तकनीक मौसम की भविष्यवाणी कर सकती है, कीटों के हमलों का पता लगा सकती है और सिंचाई व बुवाई के लिए बेहतर समय तक सुझाने लगी है। शिक्षा के क्षेत्र में भी एआई तकनीक उपयोगी है। एआई न्यायिक कार्य, शासन और लोक सेवा प्रदान करने की प्रक्रिया को नया रूप दे रही है। जाहिर है कि एआई तेजी से अर्थव्यवस्था को बदलने वाली तकनीक बन चुकी है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 15.7 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकती है। यह अलग बात है कि इस आर्थिक लाभ का 84 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उत्तरी अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे विकसित क्षेत्रों को मिलने की संभावना है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए भी यह अवसरों का सागर है। यही वजह है कि देश में एआई तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी समझना होगा कि उत्साह के साथ सतर्कता जरूरी है। एआई की चमक के पीछे छिपे खतरे नजरअंदाज नहीं किए जा सकते। बॉम्बे हाईकोर्ट का मामला इसका जीता-जागता प्रमाण है। हार्ट एंड सोल एंटरटेनमेंट के निदेशक मोहम्मद यासीन ने एआई से तैयार दलीलें दाखिल कीं. इसमें उद्धृत एक फैसला कहीं अस्तित्व में था ही नहीं। जस्टिस एम.एम. साठये ने इसे न्याय प्रक्रिया में बाधा बताया। एआई टूल्स रिसर्च के लिए स्वीकार्य हैं लेकिन सत्यापन करना वकील या पक्षकार की जिम्मेदारी है, वे इससे बच नहीं सकते। यह घटना एआई के हैलुसिनेशन यानी मतिभ्रम जैसे खतरे को उजागर करती है। इस कारण काल्पनिक तथ्य तक गढ़ लिए जाते हैं। भारत में ही नहीं, दुनिया भर में ऐसे मामले सामने आए हैं। गत वर्ष ऑस्ट्रेलिया में एक वकील ने कोर्ट में कुछ मुकदमों का हवाला देते हुए अपने केस को मजबूत करना चाहा लेकिन जब जज ने इन मुकदमों की लिस्ट जांची तो सामने आया कि ऐसे केस तो कभी हुए ही नहीं। वकील ने बताया कि यह जानकारी एआई से मिली थी। वकील ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी। जज ने माफी तो स्वीकार की, लेकिन मामले की जांच भी शुरू कर दी। वकील का मामला विक्टोरियन लीगल सर्विसेज बोर्ड को भेजा गया। बोर्ड ने उसे निजी लॉ प्रैक्टिस करने से रोक दिया और दो साल तक किसी अनुभवी वकील की निगरानी में काम करने के निर्देश दिए । इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलिया के कोर्ट में 20 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए, जहां वकीलों या खुद का कोर्ट में पक्ष रखने वाले लोगों ने एआई का इस्तेमाल करके ऐसे दस्तावेज तैयार किए जिनमें गलत जानकारी थी। जाहिर है वकालत और कानून की दुनिया में एआई का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। वर्कडे रिपोर्ट में भी एआई के कारण होने वाली फॉल्स सेंस ऑफ प्रोडक्टिविटी’ का भी उल्लेख है। जो समय बचता है, गलतियों सुधारने में उसका 40 प्रतिशत जाया हो जाता है। इसी तरह रिसर्च क्षेत्र में एआई ने गति तो बढ़ाई, लेकिन कीमत भी चुकानी पड़ी। 4.13 करोड़ शोध पत्रों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि एआई तकनीक उपयोगी है पर विषय विविधता 4.63 प्रतिशत घटी है। गोपनीयता उल्लंघन एआई का बड़ा जोखिम है। कैम्ब्रिज एनालिटिका कांड एक बड़ा डेटा गोपनीयता घोटाला था। असल में ब्रिटिश राजनीतिक परामर्श फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने लाखों फेसबुक उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा को उनकी सहमति के बिना राजनीतिक अभियानों के लिए अवैध रूप से एकत्र करके उसका उपयोग किया। इसके बाद डेटा सुरक्षा कानूनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर वैश्विक बहस छिड़ी। फेसबुक पर जुर्माना भी लगा और डेटा सुरक्षा में सुधार के लिए कदम उठाए गए। माना जाता है कि डीपफेक वीडियो ने 2024 के अमेरिकी चुनाव को प्रभावित किया था। साइबर हमलों में भी एआई तकनीक मददगार बन रही है। जाहिर है विश्वसनीयता का संकट बढ़ रहा है। एआई से नौकरियों पर संकट की बात भी बहुत जोरशोर से हो रही है। इस बात से नकारा नहीं जा सकता कि एआई से नौकरीपेशा लोगों पर खतरा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। विश्व आर्थिक मंच का अनुमान है कि डेटा एंट्री, कॉल सेंटर, सरल कोडिंग सबसे प्रभावित होंगी लेकिन एआई इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट जैसी नई नौकरियों के लिए अवसर सामने आएंगे। ऐसे में एआई के दौर में अपने आपको प्रासंगिक बनाए रखने के लिए खुद को समय के साथ अपग्रेड रखना जरूरी है। यह बात सही है कि एआई बहुत सी चीजें कर सकता है, लेकिन वह इंसान की रचनात्मकता, भावनात्मकता और सोचने-समझने की क्षमता का मुकाबला नहीं कर सकता है। एआई तकनीक लीडरशिप जैसी भूमिका नहीं निभा सकती। इसलिए एआई से डरने की बजाय अपनी रचनात्मकता और सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दें। तमाम खतरों के बावजूद इस तकनीक से किनारा नहीं किया जा सकता। बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्देश सभी क्षेत्रों के लिए प्रासंगिक है – एआई सहायक है लेकिन वह इंसान की जगह नहीं ले सकती। इसलिए एआई से बचें नहीं, प्रशिक्षण लें और सरकार नियमन तंत्र मजबूत करे। एआई युग में भी मानव विवेक सर्वोपरि रहेगा। तकनीक गति दे सकती है, लेकिन इसे दिशा तो इंसान ही देगा। इसलिए एआई तकनीक के उपयोग में जिम्मेदारी का भाव रहना बहुत जरूरी है। एआई मददगार जरूर है लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भरता घातक साबित होती है। उससे मिली जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, उसे जांचें, अपने विवेक का इस्तेमाल करें और फिर आगे बढ़ें। ज्ञान चंद पाटनी Read more » Artificial Intelligence आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
लेख सम्पर्क, सूचना और संचार समझाये विचार January 21, 2026 / January 21, 2026 by चंद्र मोहन | Leave a Comment चंद्र मोहन “संपर्क सूचना और संचार” का मतलब है वह जानकारी (जैसे फ़ोन नंबर, ईमेल, पता) और तरीके (जैसे फ़ोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया) जिनका उपयोग लोगों और संगठनों के बीच जानकारी, विचारों और भावनाओं के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और दूरसंचार (Telecom) जैसी प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, जो इसे तेज़, […] Read more » सम्पर्क सूचना और संचार समझाये विचार
लेख विश्ववार्ता अमेरिकी चक्रव्यूह में फंसे ईरान को तारणहार की तलाश! January 16, 2026 / January 16, 2026 by कमलेश पांडेय | Leave a Comment कमलेश पांडेय खाड़ी देश ईरान में बढ़ते जनअसंतोष से अमेरिका-इजरायल के पौ बारह हो चुके हैं। जिस तरह से अमेरिका ने इस जनअसंतोष को हवा दी, उससे तो यही प्रतीत होता है कि देर सबेर ईरान को घुटने टेकने ही पड़ेंगे या फिर चीन-रूस-तुर्किये के अलावा इस्लामिक देशों का साथ लेकर उसे अपने अस्तित्व की […] Read more » ईरान को तारणहार की तलाश
लेख हिंदी दिवस अनुवाद शब्द पर दृष्टि January 16, 2026 / January 16, 2026 by डॉ. नीरज भारद्वाज | Leave a Comment डॉ. नीरज भारद्वाज 21वीं सदी जहाँ ज्ञान-विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी की सदी है, वही निश्चित रूप से अनुवाद की भी सदी है। यह समूचा ज्ञान-विज्ञान सुविज्ञ अनुवाद के माध्यम से ही भावी पीढ़ी के बहुमुखी व्यक्तित्व के निर्माण तथा आर्थिक रूप से सबल राष्ट्र के निर्माण का आधार बना है। वास्तव में ‘विश्वग्राम’ की परिकल्पना में […] Read more » अनुवाद
लेख अनुशासन, त्याग और पराक्रम का उत्सव-भारतीय थल सेना दिवस January 14, 2026 / January 14, 2026 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment भारतीय थल सेना विश्व की सबसे बड़ी स्वैच्छिक (वॉलंटरी) सेना मानी जाती है, जहाँ सैनिकों की भर्ती पूरी तरह स्वेच्छा से होती है और किसी भी प्रकार की जबरन भर्ती की व्यवस्था नहीं है। सैनिकों की संख्या के लिहाज़ से यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सक्रिय थल सेना है, जिसमें लगभग 14.5 लाख Read more » भारतीय थल सेना दिवस
लेख उठो राष्ट्र के नव-प्रहरी January 14, 2026 / January 14, 2026 by पवन शुक्ला | Leave a Comment उठो राष्ट्र के नव-प्रहरी, अब रणभेरी ने पुकारा है, सोया जो पुरुषार्थ तुम्हारा, Read more » उठो राष्ट्र के नव-प्रहरी