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श्याम बाबु

modijiभारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने एक रैली में भ्रष्टाचार पर विरोधियों का जबाव देते हुए कहा था, ‘‘चूंकि मैं परिवारिक मोह-बंधनों से कोसों दूर हूँ, तो मैं क्यों माल-मत्ता जमा करूंगा? और आखिर किसके लिए? न मेरे आगे कोई है, न पीछे। मेरा तो पूरा जीवन ही राष्ट्र-सेवा में समर्पित है।’’

बड़ौदरा से उम्मीदवारी का नामांकन भरते समय नरेन्द्र मोदी ने चुनाव आयोग के रजिस्ट्रर में अपनी वैवाहिक स्थिति को दर्शाया है। पूर्व के चार नामांकनों में मोदी ने वैवाहिक वाली प्रविष्टि को खाली छोड़ दिया करते थे क्योंकि पूर्व में ऐसा करना अनिवार्य भी नहीं था। यह प्रथम अवसर है जब नरेन्द्र मोदी के विवाह और फिर राष्ट्र-सेवा के लिए सम्पूर्ण समर्पण हेतु एकल जीवन चुनने का खुलासा हुआ है।

कांग्रेस समेत अन्य राजनैतिक विरोधियों का छोड़ न तो जसोदा बेन और न ही उनके परिवार को मोदी से कोई गिला-शिकवा है, बल्कि स्वयं जसोदा बेन मोदी के प्रधानमंत्री बनने तक कामना में चावल सेवन न करने और चप्पल त्यागने का प्रण लिये हैं जो कि एक पूर्ण आदर्श भारतीय नारी का उदाहरण हैं।

कांग्रेस को लगता है कि नरेन्द्र मोदी ने भारतीय जन मानस को धोखा दिया है। लेकिन भारतीय समाज की परंपरा रही है कि लोगों ने बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अपने परिवार का परित्याग किया है। मोहनदास करमचंद गांधी ने भी शादी के बाद ब्रह्मचर्य रहने की प्रतीज्ञा की थी। जिस पर कभी किसी ने विरोध प्रकट नहीं किया।

पिछले साल जब राहुल गांधी से उनकी शादी की योजना के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, ‘‘मैंने अभी इसके बारे में कुछ नही सोचा है और फिलहाल मैं ऐसे ही रहना चाहता हूं, हालांकि मैं चाहूँगा कि मेरे बच्चे ही मेरी जगह लें।’’

‘‘इंडिया आॅफ्टर गांधी’’ के लेखक और इतिहासकार रामचंद्र गुहा कहते हैं कि हिंदुत्व में आत्म-नियंत्रण और जीवन की चार अवस्थाओं अर्थात विद्यार्थी, गृहस्थ, वैराग और संन्यास को उच्च स्थान हासिल है। इसी की पृष्ठभूमि में दोनों ही प्रधानमंत्री पद के प्रबल उम्मीदवार जनता में भ्रष्टाचार के प्रति तीव्र रोष को देखते हुए अविवाहित रहने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। गुहा बताते हैं कि एकल जीवन जीना धार्मिक व सांस्कृतिक परंपरा है जिससे समझा जाता है कि उच्च पद पर आसीन ऐसा व्यक्ति राजकोष का दुरपयोग नहीं करेगा और अपनी सम्पर्ण ऊर्जा सिर्फ देश सेवा में लगायेगा।

भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी नरेन्द्र मोदी की जीवनी में बताया गया है कि मोदी ने अल्पायु में शादी होने के बाद पारंपरिक और पारिवारिक दबाव के बावजूद वह सब करने से साफ मना कर दिया जो उन्हें पसंद नही था और देश-धर्म की सेवा के लिए घर त्याग दिया। इंडियन एक्सपे्रस के एक पत्रकार को दिये एक साक्षात्कार में श्रीमती जसोदा बेन ने माना है कि उनका मोदी के साथ वैवाहिक जीवन तीन महीने तक भी नहीं चला होगा। श्री मोदी ने मुझसे कहा, ‘‘मुझे देश-भ्रमण पर जाना है।’’ और फिर इसके बाद मेरा उनसे संपर्क विच्छेद हो गया।

श्रीमती जसोदा बेन आगे बताती है कि उन्हें श्री मोदी से न तो कोई गिला-शिकवा है और न ही उनके विरूद्ध कुछ सुनना चाहती हूँ। हाँ, इस अनुभव के बाद मैंने पुनर्विवाह के लिए भी कभी नहीं सोचा।

आगामी सालों मेें नरेन्द्र मोदी का परिवारिक बंधनों से मुक्त जीवन उनके राजनैतिक जीवन का अहम आकर्षण होगा। प्रसिद्ध पुस्तक ‘‘नरेन्द्र मोदीः द मेन, द टाइम्स’’ के लेखक निलांजन मुखोपाध्याय बताते हैं कि मोदी के त्याग से पूर्ण एकल जीवन ने उन्हें कांग्रेस के शासनकाल में हुए घोटालों के बाद एक नवीन और उपयुक्त विकल्प के रूप में स्थापित किया है। जनमानस के हृदय मेें ‘एक ऐसा व्यक्ति जिसने आज तक अपने लिए कुछ नहीं किया है’ की भावना मोदी के आभा मंडल को और अधिक प्रकाश देती है। राहुल गांधी भारत के सर्व शक्तिशाली सियासी कुनवे से आते हैं जिन्होंने अपने जीवन में दादी और पिता जिन्होंने बतौर भारतीय प्रधानमंत्री देश की सेवा की थी, की हत्यायें देखी हैं। राहुल अक्सर ही राजनैतिक विरासत के प्रति अनिश्चित रहे हैं।

पुस्तक ‘‘डिकोडिंग राहुल गांधी’’ की लेखिका आरती रामचंद्रन कहती हैं, ‘‘43 वर्षीय राहुल गांधी की कई महिला मित्र रहीं हैं और कुछ नजदीकयां गंभीर स्तर तक पहुँची हैं। पिछले कुछ सालों में राहुल शादी करेंगे या नहीं? जैसे सवालों ने राहुल का हर जगह पीछा किया है। किंतु समय के साथ यह धुंधला पड़ता गया और पिछले साल राहुल गांधी द्वारा दिये गये वक्तव्य, ‘शादी की कोई योजना नहीं’ के बाद सभी कयासों पर विराम सा लग गया है।

वर्तमान सियासी परिदृश्‍य पर नजर डाले तो तीन महिलाओं सहित कई अन्य राजनीति के महारथी अविवाहित हैं। तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जे. जयललिता जो अपने रूपहले पर्दे के साथी एम.जी. रामचंद्रन की मृत्यु के बाद इतनी व्यथित हुई कि उनकी विधवा से राजनीतिक दल का नियंत्रण लें राज्य की मुख्यमंत्री बन गई; पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिन्होंने अपने पिता की मृत्यु पर शादी न करने का प्रण किया और उत्‍तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जिन्होंने शादी न करने का राज आज तक नहीं खोला हैं, अलबत्‍ता, इसका राजनीतिक फायदा खूब उठाया है। लेकिन, मोदी का मामला इन सबसे इतर है, उनका बंधन-मुक्त जीवन का निर्णय किसी दुःख या असंतोष का परिणाम नहीं था, बल्कि एक सुविचारित, सुनियोजित देश-सेवा के जज्बे का एक क्रांतिकारी मोड़ था।

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