लेखक परिचय

प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी, दैनिक समाचार पत्र दैनिक मत के प्रधान संपादक, कविता के क्षेत्र में प्रयोगधर्मी लेखन व नियमित स्तंभ लेखन.

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कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव करानें में मोदी सरकार को झेलनी होगी आधा दर्जन चुनौतियां

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच रस्साकशी का रहा है. भारत जहाँ इस खींचतान में सदाशय होकर कश्मीर के बड़े भाग को गँवा बैठा है वहीं भारत की सदाशयता से आज पाकिस्तान कश्मीर में अशांति-अलगाव और आतंकवाद का वातावरण बनाए रखनें के अपनें शैतानी मंसुबें में कामयाब होता आया है. हमारें कश्मीर के शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक अवधारणाओं के विकास प्रयासों को पाकिस्तान जनित आतंकवाद और अलगाववाद नें सदैव नष्ट-भ्रष्ट करनें के दुष्प्रयास किये हैं. पाक ने कश्मीर में अपनें आतंक और अलगाव की तानें बानें को पुख्ता करनें के लिए ज्यादातर जिस बात का सहारा लिया वह है घाटी में हिन्दू विरोध का माहौल बनाना और हिन्दू मुसलमानों में आपसी दरार पैदा करना. हमें यह असफलता स्वीकारनी होगी कि पिछले छः दशकों के राजनैतिक नेतृत्व की अक्षमता से, पाकिस्तान घाटी के मुसलमानों में हिन्दू विरोधी मानसिकता पैदा करनें के नापाक इरादे में पाक कामयाब रहा. अपनें इन्हीं मंसूबों को पूरा करनें के लिए पाकिस्तान नें घाटी में हो रहे इन चुनावों में हिन्दू मुख्यमंत्री बनानें के विरोध में अभियान चला दिया है. साठ से अधिक वर्षों के कश्मीरी संघर्ष की अनेकों नाकामियां झेलते आ रहे भारत को अब वहां विधानसभा चुनाव कराना हैं इसमें तो भारत की नई नवेली नरेंद्र मोदी सरकार के सामनें कई सारी चुनौतियां पेशतर हो गई हैं.

एक ओर जम्मू और कश्मीर में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन ने लोगों को धमकी दे दी है कि वो आने वाले विधानसभा चुनाव से दूर रहें और उसनें पुलवामा जिले में धमकी भरे पोस्टर भी लगा दिए हैं कि लोग दहशत में आ जाएँ और चुनावी प्रक्रिया से दूर रहें. इस प्रकार के धमकी भरे पोस्टरों से स्वाभाविक ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सरकार को एक चुनौती प्रस्तुत हो गई है.

दूसरी ओर बीएसएफ की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकी जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी फैला सकते हैं और हिजबुल मुहाहिद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद दक्षिणी कश्मीर में सुरक्षा बलों, राजनैतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों पर आतंकी हमलें कर सकते हैं. कश्मीर में तहरीक-ए-तालिबान के कमांडर मोहम्मद अब्दुल वली अलियास कुरैशी द्वारा 22 आतंकी दस्तों को तैयार करके रखना भारतीय सेना और प्रशासन दोनों के लिए एक चुनौती बन गया है.

तीसरी चुनौती कि चर्चा करें तो वह यह है कि हाल ही में जब पिछले माह कश्मीर में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई तब पाकिस्तान तुरंत सक्रिय हो उठा. पाक नें अपनी शैतानी अलगाव वादी योजना पर और तेज काम प्रारम्भ किया और अलग अलग मोर्चों पर भारत विरोधी अभियान को हवा देंनी शरू कर दी. पाकिस्तान प्रेरित ये बाह्य आतंकवादी और भारत के ये कथित आंतरिक अलगाववादी कतई नहीं चाहते कि कश्मीर में कभी कोई हिन्दू मुख्यमंत्री शासन संभालें.

चौथी चुनौती हैरतंगेज ढंग से हमारें अंदरूनी हिस्से से ही आई है, और इसी क्रम में कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी के एक नेता ने जम्मू-कश्मीर में हिंदू मुख्यमंत्री बननें की आशाओं को अभिशाप बताकर एक राष्ट्रीयता विरोधी विवाद खड़ा कर दिया है. पीडीपी नेता पीर मंसूर ने घाटी के बाशिंदों से उन राजनैतिक पार्टियों को वोट नहीं देने की अपील की जो सत्ता में आने पर जम्मू-कश्मीर में एक हिंदू मुख्यमंत्री को शासन के लिए बैठा देंगी. पाकिस्तान के कश्मीर में हिन्दू मुख्यमंत्री नहीं बननें देनें के अभियान को भड़काते हुए पीडीपी के विधायक पीर मंसूर अपनें अन्धें हिन्दू विरोध को सार्वजनिक रूप से कट्टरता पूर्वक प्रदर्शित करते हुए आपसी सद्भाव की सीमाओं को तहस नहस कर दिया. देश के प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही ऐसा कहनें वाले दल और व्यक्ति की सार्वजनिक निंदा-भर्त्सना करना चाहिए जो लोगों से अपील करे कि उन पार्टियों को वोट नहीं दें जो हिंदू मुख्यमंत्री थोप दे. पीडीपी नेता का यह कहना कि हिन्दू मुख्यमंत्री जम्मू-कश्मीर के लिए एक अभिशाप होगा उनकें लोकतांत्रिक मूल्यों और भारतीय संविधान में अनास्था और अविश्वास को प्रकट करनें और कहनें वाले के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरानें का समुचित आधार है. जम्मू और कश्मीर के अवाम को गंभीरता से मंसूर के कहे को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए कि कि कश्मीर में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं और केवल इसी समुदाय का कोई व्यक्ति शासन कर सकता है!! पीडीपी नेता और इस प्रकार की भावना रखनें वाले अन्य नेता और राजनैतिक दल निश्चित तौर पर पाकिस्तानी पिट्ठू ही हैं जो कि पाक के हितों को अपनें सर-आँखों पर उठाये चलते हैं.

जम्मू-कश्मीर में चल रहे चुनावी अभियान में भाजपा अपनें पुरानें प्रदर्शन से बहुत आगे की बढ़त बनाए हुए है. नरेंद्र मोदी और उनकें हनुमान अमित शाह ने कश्मीर के प्रमुख राजनैतिक दलों नैशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस तीनों के सामनें अपनें प्रदर्शनों और प्रशासनिक सह्रदयता (ख़ास तौर से बाढ़ पीड़ितों को मदद के मामलों में) से एक लम्बी लाइन खींच दी है. नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी द्वारा खींची गई इस लम्बी लाइन से वहां राजनैतिक दल ऐसे घबराए गए हैं कि “कोई हिन्दू कश्मीर का मुख्यमंत्री न बननें पाए” का खतरनाक शेर उन्होंने पिंजरे से बाहर छोड़ दिया है. पाक प्रेरित शक्तियां हिन्दू मुख्यमंत्री को लेकर विधवा प्रलाप करें तो कोई बात नहीं, किन्तु स्वयं भारतीय संविधान से बंधे और उसकी कसमें खानें वाले लोग ही ऐसा करें तो यह तो देशद्रोह ही माना जाना चाहिए. नैशनल कांफ्रेंस नें इसका कोई विरोध नहीं किया और कांग्रेस भी ऐसे गूंगे गुड्डों और गुड़ियों की पार्टी बन गई है कि उसनें भी अब तक पीडीपी नेता की इस बात का विरोध न करके जैसे “कश्मीर में हिन्दू मुख्यमंत्री नहीं बन सकता” का मौन समर्थन ही कर दिया है.          हालांकि बीजेपी ने मंसूर के इस बयान पर सख्त विरोध प्रकट किया है किन्तु चुनावों के मौसम में ऐसी बातों का जवाब राजनैतिक दल भाजपा को नहीं बल्कि आम जनता और जम्मू-कश्मीरी अवाम के लोगों को देना चाहिए!! राष्ट्रीय एकता के खिलाफ आग उगलनें वालें ऐसे लोगों को संविधान जो सजा दे सो दे किन्तु कश्मीर की जनता ऐसी प्रत्येक पार्टी का विरोध करे और ऐसी भाषा बोलनें वाले प्रत्येक व्यक्ति का बहिष्कार करके कश्मीर में एक नया इतिहास रच दे यही सम्पूर्ण भारत को कश्मीरियत एक तोहफा होगा.

पांचवें क्रम पर देखें तो यह कि – कश्मीर के चुनाव को देखते हुए पाकिस्तान नें कश्मीर सीमा के आसपास विशेष तौर से संघर्ष विराम की घटनाओं में तेजी ले आई है. वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के विरुद्ध अपीलें करनें की कूटनीति (असफल) के साथ साथ सैन्य क्षेत्रों में भी कार्यवाहियां कर रहा है. पिछले ही दिनों में पूंछ जिले में नियंत्रण रेखा के पास के क्षेत्रों में 40 सीमावर्ती चौकियों और आसपास के 25 इलाकों पर भारी मोर्टार से हमले किये. रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष मेहता ने कहा, ‘पाकिस्तान की ओर से पुंछ में नियंत्रण रेखा के पास बनवाट और हमीरपुर में नये सिरे से संघर्षविराम उल्लंघन किया गया है.

छठवें भारत की इस चिंता की आग में घी डालनें का काम करते हुए पिछले दिनों चीन नें भारत पाक सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों को सैन्य प्रशिक्षण देना प्रारम्भ कर दिया है. बीएसऍफ़ की खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजौरी सेक्टर के पार भारत सीमा पर बेहद आगे आकर चीन द्वारा पाकिस्तानियों को यह प्रशिक्षण देनें का संवेदनशील और भारतीय दृष्टि से खतरनाक काम किया जा रहा है. खुफिया एजेंसी ने यह आशंका प्रकट की है कि ये चीन प्रशिक्षित आतंकी चुनावी दिनों में भारत में प्रवेश करके कुछ दहशत अंगेज घटनाओं को अंजाम दे सकतें हैं.

इन सब खतरों और षड्यंत्रों के मद्देनजर यदि मोदी सरकार जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव शांति से सफलता पूर्वक करा लेगी यह विश्वास तो पुरे कश्मीरी और बाकी देश भर के नागरिकों को भी हैं किन्तु कश्मीरियों और जम्मू वासियों को भी आतंक जौर अलगाव की भाषा बोलनें वाले सियासतदानों को अब सबक सिखाना ही चाहिए. बहुसंख्यक हिन्दुओं के इस देश के किसी भी हिस्सें से यह आवाज तो कतई नहीं आनी चाहिए और न ही यह आवाज बर्दाश्त की जानी चाहिए कि “यहाँ से कोई हिन्दू जन-प्रतिनिधि नहीं बन सकता”

 

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