लेखक परिचय

पंडित दयानंद शास्त्री

पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

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ज्योतिष एक पूर्ण विकसित शास्त्र है जिसमें केवल एक कुंडली उपलब्ध होने पर उस मनुष्य के समस्त जीवन का खाका खींचा जा सकता है। यहाँ तक कि उसके खानपान संबंधी आदतें भी कुंडली से बताई जा सकती हैं।

* धन स्थान से भोजन का ज्ञान होता है। यदि इस स्थान का स्वामी शुभ ग्रह हो और शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति कम भोजन करने वाला होता है।

* यदि धनेश पाप ग्रह हो, पाप ग्रहों से संबंध करता हो तो व्यक्ति अधिक खाने वाला (पेटू) होगा। यदि शुभ ग्रह पाप ग्रहों से दृष्ट हो या पाप ग्रह शुभ से (धनेश होकर) तो व्यक्ति औसत भोजन करेगा।

* लग्न का बृहस्पति अतिभोजी बनाता है मगर यदि अग्नि तत्वीय ग्रह (मंगल, सूर्य बृहस्पति) निर्बल हों तो व्यक्ति की पाचन शक्ति गड़बड़ ही रहेगी।

* धनेश शुभ ग्रह हो, उच्च या मूल त्रिकोण में हो या शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो व्यक्ति आराम से भोजन करता है।

* धनेश मेष, कर्क, तुला या मकर राशि में हो या धन स्थान को शुभ ग्रह देखें तो व्यक्ति जल्दी खाने वाला होता है।

* धन स्थान में पाप ग्रह हो, पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति बहुत धीरे खाता है।

खाने में पसंद आने वाली चीजों की सूचना छठे भाव से मिलती है।

* छठे स्थान में बुध या बृहस्पति हो तो नमकीन वस्तुएँ पसंद आती हैं।

* बृहस्पति बलवान होकर राज्य या धन स्थान में हो तो मीठा खाने का शौकीन होता है।

* शुक्र, मंगल छठे स्थान में हों तो खट्टी वस्तुएँ पसंद आती हैं।

* शुक्र-बुध की युति हो या छठे स्थान पर गुरु-शुक्र की दृष्टि हो तो मीठी वस्तुएँ पसंद आती हैं।

* छठे स्थान में सिंह राशि हो तो तामसी भोजन (मांस-अंडे) पसंद आता है। वृषभ राशि हो तो चावल अधिक खाते हैं।

* बुध पाप ग्रहों से युक्त होने पर मीठी वस्तुएँ बिलकुल नहीं भातीं।

 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर राशि के लिए उपयुक्त स्वास्थ्यवर्धक भोजन इस प्रकार है. जैसे:-

मेष लग्न —–

इस लग्न में जन्में जातक तेज जिंदगी जीते है. जिससे शारीरिक शक्ति का अधिक व्यय होता है. यह मस्तिष्क प्रधान राशि है और इसका सिर पर आधिपत्य होता है. इसलिए इन जातकों को मस्तिष्क और शरीर दोनों को शक्तिदायक वस्तुएँ अपने भोजन में सम्मिलित करनी चाहिए. जैसे विटामिन और खनिज तत्वों से भरपूर पालक, गाजर, ककड़ी, मूली, प्याज, गोभी, दूध, दही, पनीर, मछली और दूसरे प्रोटीनयुक्त भोजन. मांस बहुत कम खाना चाहिए और उत्तेजक पदार्थ बिलकुल नहीं लेने चाहिए.

वृष लग्न —–

इस लग्न में जन्मे जातकों का शरीर पुष्ट होता है और वे स्वाद ले कर भोजन करते है. विभिन्न स्वाद का भोजन करने से उनका गला खराब रहता है, इसलिए मोटापे से ह्रदय रोग का भय रहता है. इन्हें मिठाई, केक, पेस्ट्री, मक्खन और दूसरे अधिक चिकिनाई वाले भोजन कम लेने चाहिए. स्वस्थ रहने के लिए विटामिन और खनिज तत्वों से पूर्ण फल, सब्जियां, सलाद, निम्बू, इत्यादि मात्रा में लेने चाहिए.

मिथुन लग्न—-

यह राशि मानसिक और स्नायु प्रधान है. जातक के अधिक मानसिक परिश्रम करने से तथा पाचन क्रिया गड़बड़ होने पर वह बीमार होता है. इन जातकों को वे सब भोज्य पदार्थ, जो मस्तिष्क और स्नायु तंत्र के लिए शक्तिदायक हों, लेने चाहिए. विटामिन बी प्रधान भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए. दूध और फल लाभदायक होते है. मांस बहुत कम खाना चाहिए.

कर्क लग्न—–

इस लग्न के जातक खाने के शौकीन होते है, परन्तु उनकी पाचन क्रिया कमजोर होती है. इसलिए वे वस्तुएं नहीं खानी चाहिए जिनसे पेट में उतेजना बढे और गैस बने. मांस, पेस्ट्री, शराब हानिकारक होते है. दूध, दही, फल, सब्जी, सलाद, नींबू, मेवे और मछली अनुकूल होते है. इन जातकों को सोने से पहले और सुबह उठते ही पानी पीना चाहिए.

सिंह लग्न——

यह कार्यशील राशि है. जिससे जातक अधिक ऊर्जा खर्च करता है. ऐसा भोजन जो सुपाच्य हो, जिससे अधिक ऊर्जा मिले और रक्त में लाल कण बढ़ें, लाभदायक होते है. मोटापा बढाने वाली चरबीदार वस्तुएं ह्रदय के लिए हानिकारक होती है. शाकाहारी भोजन, फल और मेवे जिसमें विटामिन और खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो, लाभदायक होते है.

कन्या लग्न—–

इस राशि में जन्मे जातकों की पाचन प्रणाली कमजोर होने के कारण इनकों अपने भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए. दूध, फल, सुपच आहार और रोचक पदार्थ लाभदायक होते है. इन्हें एक बार में थोड़ा और भली प्रकार से पकाया भोजन लेना चाहिए. जिससे इनकी मल विसर्जन प्रणाली ठीक रहे.

तुला लग्न——-

इस लग्न वाले जातकों को अच्छे खाने का शौक होता है, पर उनकी मल विसर्जन प्रणाली कमजोर होती है. इन्हें फल और दूध प्रधान भोजन लेना चाहिए. सब्जियों में गाजर, चुकंदर, मटर और फलों में सेवा और अंजीर उतम होते है. अधिक मिठाई और चिकनाई वाले पदार्थ से परहेज करना चाहिए. शराब भी कम ही लेनी चाहिए. जिससे गुर्दों पर बुरा असर न पड़े

वृश्चिक लग्न——

इस लग्न वाले जातक अधिक खाने में रुचि रखते है. परन्तु सभी मोटापा देने वाली और नशे वाली वस्तुएं हानिकारक होती है. हल्का खाना दूध, फल, सब्जी और खून बढाने वाले भोजन, जैसे अंजीर, प्याज, लहसुन , नारियल इत्यादि का सेवन जितना कम लिया जाए उतना स्वास्थ्य अच्छा रहेगा.

धनु लग्न ——-

यह अग्नि तत्व राशि है और जातक काफी चुस्त और फुर्तीला होता है, इसलिए उन्हें रक्त और स्नायु शक्ति को बढाने वाला प्रोटीनयुक्त संतुलित भोजन लेना चाहिए. रात का खाना सोने से काफी पहले कर लेना चाहिए. भोजन के बाद घूमना स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है.

मकर लग्न ——–

इस राशि के जातक, कर्तव्यपरायण होने के कारण, अधिक ऊर्जा व्यय करते है. इस कारण इन्हें शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए. भोजन में अंजीर, नारियल, पालक ककड़ी लेना लाभदायक होता है

कुम्भ लग्न——-

इस लग्न के जातक अपने मस्तिष्क और स्नायु शक्ति का अधिक उपयोग करते है. इसलिए मस्तिष्क और स्नायु को शक्ति प्रदान करने वाले तथा रक्त प्रवाह बढाने वाले हल्के तथा सुपाच्य पदार्थ जैसे दूध, पनीर, सलाद, मछली, मूली, गाजर इनके लिए स्वास्थ्यवर्धक होते है.;

मीन लग्न—–

इस लग्न के जातक अधिकतर अपने खाने-पीने में अति के कारण बीमार रहते है. इसलिए उन्हें अपने भोजन के बारे में सचेत रहना चाहिए. मिठाई तथा बहुत चिकनाई वाले पदार्थ कम खाने चाहिए. इन्हें मादक पदार्थ बिल्कुल नहीं लेने चाहिए. दूध, मछली, सलाद, फल और सब्जियों का सेवन लाभदायक होता है

 

 

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