लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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freshnessसुबह की ठंडी हवा

दूर नदी में

निरंतर बहती जलधारा

आकाश में तैरते

छोटे सफ़ेद -काले बादल

उड़ते छोटे- बड़े पक्षी

दूर तक फैली हरियाली

झोला उठाए,

कलरव करते

बच्चों का पाठशाला जाना

गाय- बकरियों का

उनके साथ-साथ

आसपास चलना

युवा किसान का

अपने चौड़े कंधे पर

हल रखकर

बैलों के पीछे-पीछे

खेत की ओर बढ़ना

पीछे से,

घूँघट काढ़े

नई नवेली दुल्हन का

झटकते हुए आना

पास आकर

ठिठकना, फिर शरमाना

भोजन की पोटली थमाना

और

लौटते हुए

मुड़ – मुड़ कर अपने

‘ए जी’ को देखना

शाम को चौपाल में

सबका आपस में

खुल कर बतियाना …

यहाँ का यह सब कुछ

मुझमें ताजगी भरते हैं

शहर से इस और

खीचते हैं हमेशा !

 

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2 Comments on "ताजगी"

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बीनू भटनागर
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बीनू भटनागर

ग्रामीण वातावरण का सुन्दर शब्द चित्र

आर. सिंह
Guest

यह किस काल और देश का खाका खींचा है ,कवि भाई आपने? कम से कम आज तो इस देश यानि इंडिया यानि भारत में ऐसा कुछ देखना तो बिरले नसीब हो.

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