लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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आज देश में ऑनर किलिंग का फैशन चल निकला है। बेगुनाह और बेकसूर लडके लडकियो को कही इज्जत के नाम पर कही बडी बडी मूॅछो के नाम पर कही खानदान के रिति रिवाजो के नाम पर मारा जा रहा है। झूठे मान सम्मान के नाम पर फूल से मासूम बच्चो की हत्याओ का दौर अनवरत जारी है। आरोपियो को सजा न होने का नतीजा यह है कि दिन प्रतिदिन ऑनर किलिंग के मामले देश में बढ़ते ही जा रहे है। खाप पंचायते संगोत्र शादिया करने वाले लडके और लडकियो की जान की दुश्मन हो गई है। इन खाप पंचायतो के पंचो का मानना है कि एक गोत्र में शादी करने का मतलब भाई बहन की शादी। इन सिर फिरे मान सम्मान के  ठेकेदारो को कौन समझाए कि एक गोत्र में लाखो लोग होते है जो दुनिया में हर जगह फैले होते है। ये एक दूसरे को जानते तक नही इन में खून का रिश्ता भी नही होता। खानदान एक नही, परिवारिक रिश्ता नही फिर भाई बहन कैसे हो गये। आखिर ये कैसी संकीण मानसिक्ता है। देश के जिम्मेदार लोग भी इस मसले पर खामोश है, नेताओ का तो कहना ही क्या उन्हे तो चुप रहना ही है क्यो की उन्हे तो वोट चाहिये, चाहे देश के भविष्य के गले पर छुरी चले या सीने में गोली लगे, या फिर उसे जिन्दा आग के हवाले कर दिया जाये। इन को इस बात की चिंता नही। कन्या भ्रूणहत्या, दहेज हत्याओ के कारण पहले ही देश में पुरूषो के मुकाबले स्त्री अनुपात काफी कम होता जा रहा है यदि ये ऑनर किलिंग का शौतान समय रहते न रूका तो देश में लडकियो का एक बडा संकट पैदा हो जायेगां
इन खाप पंचायतो ने गोत्र के मान सम्मान की दुहाई दे देकर इंडिया शाईनिंग के इस दौर में आज जो कत्ले आम मचाया हुआ है उस सब से देश तो दुॅखी है ही साथ ही हमारे पूर्वज, महान समाज सुधारक राजा राम मोहन राय, ईश्वर चन्द्र विघा सागर, ज्योतिबा फुले महात्मा गॉधी जैसे महापुरूषो की आत्माए आज बडी बैचेन हो रही होगी। वही ओम प्रकाश चौटाला जैसे देश के जिम्मेदार लोग ऑनर किलिंग को सही बताने से भी नही चूक रहे है। खुले तौर पर न्यूज चैनलो पर भविष्य में ऐसी और हत्याए करने का लोग बिना किसी कानूनी खौफ के ऐलान कर रहे है। पर सवाल ये उठता है की बेगुनाह बच्चो को अल्प आयु में मौत की नींद सुला रहे ये यमराज के वंशज क्या आज अपने बुर्जुगो के पद चिन्हो पर चल रहे है। अपने खानदान या अपने बुर्जुगो कों उतना मान सम्मान दे रहे है जितना देना चाहिये। हम जी तो रहे है इक्कीसवी सदी में और बाते करते है 14वी सदी की आज जिस प्रकार का समाज हम लोगो ने बनाया हुआ है क्या उस समाज में ये हत्याए, बेबुनियाद, बेवजह, बेतुकी, समाज में पाप और घृणा नही फैला रही। हमे अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम नही कर रही, आखिर तालिबानी सोच और हमारी सोच में क्या अन्तर रह गया। क्या हम कट्टरपंथी नही हो गये,रूीवादी नही हो गये ?।
एक तरफ देश में महिलाओ को बराबरी देने की बात की जा रही है संसद में महिला विधेयक पास हो चुका है। महिलाओ के उत्थान के लिये सरकार नई नई योजनाये बना रही है। आज सह शिक्षा और टीवी चैनलो इन्टरनेट आदि के जरिये स्त्रीपुरूष के सम्बन्धो में जितना खुलापन आया है क्या वो लोगो को नजर नही आ रहा। जात पात का को आज कहा है। गॉव और कस्बो को छोड दे तो बडे शहरो में जो लोग बाहर से आकर बसे है वो किस जाती के है कहा के है उन का खानदान कैसा था क्या किसी को पता रहता है। इसी समाज से ताल्लुक रखने वाले अमीर, पे लिखे सामथ्र्यवान लोगो में ऐसे मामले देखने को अधिक मिलते है जिन्होने जातपात, कट्टरपंथी ,रूीवादी तमाम नियमो से ऊपर उठकर अधिक सॅख्या में प्रेम विवाह ही किये है और सफल रहे है। कारण पे लिखे खुले विचार वाले तरक्की पसन्द लोगो पर सामाजिक दबाव काम नही करता। गॉव और कस्बो में सामान्यतः अधिकतर लडके लडकिया अपनी जाति और पारिवारिक सोच और अपने परिवार को विश्वास में लेकर शादिया करते है। पर प्रगति की ओर अग्रसर समाज को देखते हुए गॉव और कस्बो में भी समय के साथ साथ लडके लडकियो का सामाजिक दायरा ब रहा है। सोच बदल रही है युवा अपनी पसन्द को लेकर मुखर हो रहे है। जो आज कट्टरपंथी ,रूीवादी लोगो के गले नही उतर रही है। ये लोग आज भी चौदाह सौ बरस पहले कि उसी रूयिो, मान्यताओ और नैतिकता के दौर में जी रहे है, जिन में इन के दादा परदादा रहा करते थे।
ये ऑनर किलिंग शौतान आया कहा से क्या किसी ने इस ओर कभी सोचा। ॔आनर ’यानी इज्जत। ये शब्द पूरा का पूरा विदेशी है उन्नीसवी सदी में स्पेन और इटली में इस का पहली बार प्रयोग हुआ। जॉर्डन में यदि पति अपनी पत्नी या किसी अन्य रिश्तेदार को बदचलनी करते हुए पाये तो वह उन की हत्या कर सकता है यानी ऑनर किलिंग पर उसे कोई दंड नही मिलेगा। दंड सहिता की धारा 340 उसे इस अपराध से मुक्त करती है। गाजा पट्टी, फिलिस्तीन और पिश्चमी किनारा में भी जॉर्डन के कानून को ही मान्यता मिली हुई है। यहा भी हर माह 34 महिलाओ की ऑनर किलिंग होती है। सीरिया में दंड सहिता की धारा 548 के तहत बदचलन पत्नी या महिला रिश्तेदार की हत्या सामान्यता अपराध नही है। इस इस में आरोपी को बहुत कम सजा देने का प्रावधान है। मोरक्को यहा महिलाओ की ऑनर किलिंग पर लगभग न की बराबर सजा का प्रावधान है। मिस्र में महिलाओ की ऑनर किलिंग पर दंड संहिता की धारा 17 न के बराबर सजा का प्रावधान है। चेचेन्या में ऑनर किलिंग पूरी तरह वैध है। पाकिस्तान यहा महिलाओ की ऑनर किलिंग को ॔॔कारो कारी’’ कहा जाता है। यहा पुलिस ऐसे तमाम केसो को नजर अन्दाज करती है। ऐसे ऑनर किलिंग के केसो को वहा आज भी अपराध नही माना जाता है। पाकिस्तान में वर्ष 2003 में ऑनर किलिंग के नाम पर लगभग 1261 महिलाओ को मौत के घाट उतारा गया था। आखिर जात पात और सभ्यता की दुहाई देने वालो से कोई क्यो नही पूछता कि हमारे देश को ये ऑनर किलिंग का को कब और क्यो और किसने लगाया।
क्यो आज हम अपनी कट्टरपंथी ,रूीवादी सभ्यता अपने आर्दशो, झूठे मान सम्मान की खातिर अपने जिगर के टुक्डो के टुक्डे करने लगे है। जिन बच्चो के पॉव में अगर कांटा भी लग जाये तो हम लोग तडप जाते है आज हम उन्ही बच्चो के गले पर छुरिया चले रहे है। झूटे मान सम्मान की खातिर उन्हे जिन्दा जला रहे है। खाप, गोत्र व खानदान की इज्जत का खौफ दिखा कर देश की प्रगति और देश के भविष्य की यू बलि चाकर हम अपना और अपने परिवार का खुद नुकसान कर रहे है। क्या भगवान ने हमे गुप्ता, अग्रवाल, वैश्य, पंडित, हरिजन जुलाहा, नाई, बनाकर संसार में भेजा है भगवान ने संसार की रचना कैसे की एक औरत और एक मर्द को धरती पर भेजा हम सब उसी की संतान है। यू भी हम एक भगवान की संताने है। आज हम अपनी मजहबी किताबो के उन रास्तो से क्यो भटकने लगे है जो हमे इन्सान बनाती है और अच्छे और सच्चे रास्तो पर चलना सिखाती है। इन्सान से मौहब्बत करना सिखाती है। शायद पैसे का लालच, समाज में झूठा मान सम्मान पाने का जुनून, या फिर आज हमारे समाज में विकराल रूप धारण कर चुके दहेज के दानव के कारण हम लडकियो को मौत की नींद सुलाने लगे है। कन्याओ को जन्म दिलाने से डरने लगे है। पर ऑनर किलिंग करते वक्त शायद हम ये भूल जाते है कि बेटियो से घर आंगन में रौनक है। ममता, प्रेम, त्याग, रक्षा बन्धन और इस संसार का वजूद कायम है।

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