लेखक परिचय

प्रणय विक्रम सिंह

प्रणय विक्रम सिंह

लेखक श्रमजीवी पत्रकार है. सामाजिक राजनैतिक, और जनसरोकार के विषयों पर लेखन कार्य पिछले कई वर्षो से चल रहा है.

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प्रणय विक्रम सिंह

कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का नीड़ हो
जो लड़ सका है वो ही तो महान है!
हो दया का भाव, याकि शौर्य का चुनाव,
याकि हार का हो घाव तुम ये सोच लो,
मौत अंत है नहीं, तो मौत से भी क्यों डरें,
ये जाके आसमान में दहाड़ दो
रगो में जोश भर कर मौत को भी ललकारने की जीवटता को प्रकट करतीं यह जीवन्त पंक्तियाँ, भारतीय पुलिस सेवा के जांबाज, कर्मठ, जुझारू अफसर अमिताभ यश की अफसानवी शख्सियत को बखूबी बयान कर रही हैं ! दशकों तक आतंक का पर्याय रहे ददुआ, ठोकिया और निर्भय गुर्जर जैसे डकैतों को उनके अंजाम तक पहुंचा कर उत्तर प्रदेश पुलिस के ध्येय वाक्य ‘परित्राणाय साधूनाम—विनाशाय च दुष्कृताम’ को मूर्तरूप प्रदान करने वाले अमिताभ यश वर्तमान समय में पुलिस महानिरीक्षक, तकनीकी सेवा, के पद पर तैनात हैं। आधुनिक तकनीक में विश्वास रखने वाले अमिताभ यश कहते हैं कि तकनीकी, ताकत और तजुर्बे के समेकित एवं कुशल समन्वय से बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। प्रस्तुत है उ.प्र. पुलिस के सौरमंडल के ध्रुव तारे अमिताभ यश से हमारे विशेष संवाददाता प्रणय विक्रम सिंह की खास बातचीत के कुछ अंश।

amitabh-yashसवाल- उ.प्र. पुलिस में सुपरकाप की छवि है आपकी। अपराधियों के मन में आपका खौफ जगजाहिर है। कैसा लगता है अपने विषय में ऐसा सुनकर।
जवाब -जाहिर है अपराधी खौफ खाएं यह सबको अच्छा लगेगा। लेकिन जहां तक बात सुपर काप होने की है तो पुलिसिंग कोई एकल विधा नहीं है। यह टीम वर्क है। सभी की अपनी-अपनी भूमिका है। अत: कोई सुपर काप नहीं है। हां एक अच्छी टीम अच्छे परिणाम देती है।
सवाल- फिर एक टीम लीडर की क्या भूमिका होती है?
जवाब – मोटीवेट करने की। दरअसल पुलिसिंग की सम्पूर्ण विधा ही मोटीवेशन पर आधारित है। जितना उम्दा मोटीवेशन होगा उसके उतने ही सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे और सकारात्मक परिणाम देने वाली टीम का लीडर उत्कृष्ट टीम लीडर के रूप में जाना जायेगा। अपने सहकर्मियों और मातहतों की क्षमता को पहचान कर उन्हें उनकी रूचि का कार्य सौपना साथ ही क्षमता अभिवर्धन के लिये प्रेरित और संसाधन उपलब्ध कराना भी टीम लीडर के दायित्व के दायरे में आता है।
सवाल- अपनी प्रारंभिक शिक्षा व प्रशासनिक सेवा की तैयारियों के बारे में बताएं?
जवाब – मैंने हाईस्कूल पटना के सेंट मिशेल हाईस्कूल से किया। हाईस्कूल करने के बाद मै दिल्ली आ गया और मैंने दिल्ली के डीपीएस आर.के पुरम से इंटर पास किया। जिसके बाद मैंने दिल्ली के ही सेंट स्टीफेन कॉलेज से बीएससी आनर्स किया और कानपुर आईआईटी से एमएससी किया और अपने डिपार्टमेंट का टॉपर रहा। इसके बाद मैंने सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी की, यहां मेरी मेहनत और लगन ने मुझे सफलता दिलायी।
सवाल- सूबे में दिनोंदिन खराब होती कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में आपका क्या कहना है।
जवाब -आप कैसे कह सकते हैं कि कानून-व्यवस्था की स्थिति दिनोंदिन खराब हो रही है? ज्यादा पीछे नहीं नब्बे के दशक से से से लेकर आज तक का ग्राफ देख लीजिये। डकैती विद मर्डर आये दिन की घटना होती थी। लेकिन आज तो वह हालात नहीं है। मुझे याद है कि लगभग एक दशक पहले तक प्रत्येक जनपद में कोई न कोई माफिया होता था लेकिन आज स्थिति नियंत्रण में है। अत: यदि आप समीक्षा करें तो पायेंगे कि अपराध का स्तर कम हो रहा है।
सवाल-आपके कहने का अर्थ है कि सुधार की कोई आवश्यकता नहीं है।

जवाब – सुधार की तो बहुत आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में हर स्तर पर सुधार की दरकार है। पुलिसिग के तरीके में सुधार की जरूरत है, हमारे सभी कर्मचारियों की व्यवसायिक दक्षता को बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उनको उनके काम के बारे में सही जानकारी देना, बदलते परिवेश में उनको काम, व्यवहार करने का तरीका, आदि के बारे में जानकारी की आवश्यकता है। पुलिसिग इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार की जरूरत है।
सवाल-आपके अनुसार कानून व्यवस्था बरकरार रखने के लिए रणनीति के क्या आयाम होने चाहिए ?
जवाब – अपराध और अपराधी से निपटने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम को अंजाम देना चाहिए। मेरा मानना है कि अपराध रोकने के लिए पुलिस के तीन काम होते हैं। सबसे पहले ऑपरेशन, दूसरा इन्वेस्टिगेशन और तीसरा रिकार्ड मेनटिनेन्स। इन तीनों पर गंभीरता से कार्य करने की बहुत जरूरत है। पहला ऑपरेशन बेसिकली अपराधी को पकड़ना अपराधी की पहचान करना, इन्वेस्टिगेशन यानी जो विवेचनाएं हैं उनको जल्द से जल्द पूरा कराना, अच्छी विवेचना करना यानी साक्ष्य संकलन अच्छा कराना, दोषियों पर चार्जशीट लगाना निर्दोषों को बरी करना और उसके बाद सफल प्रोसिक्यूशन कराना। अगर विवेचना सही प्रारूप में की जाती है तो किसी बेगुनाह को सजा नहीं मिलेगी। ये एक ऐसा फील्ड है जिसमे यूपी पुलिस बहुत पीछे है। जिस पर खास तौर से ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके बाद रिकार्ड मेंटनेंस यानी अपराधियों की पूरी जानकारी रखना, उन पर समय-समय पर कार्यवाही करना। अगर हर अपराधी का रिकार्ड होगा तो अपराधी की पहचान करना और उसे पकड़ना आसान हो जाएगा। अमिताभ यश ने माना कि यूपी पुलिस अभी पीछे है। क्षेत्र में पूर्व में घटित हुए अपराधों और विवादों पर पुलिस की नजर होनी चाहिए।
सवाल-आपने एसटीएफ में रहकर लगभग पांच दर्जन से ज्यादा डकैतों का खात्मा किया है। कुछ बताइये उस दौर के बारे में।
जवाब – वो दौर कठिन तो था किंतु था बड़ा मजेदार। उस वक्त हमारे साथ टीम भी बहुत अच्छी थी, जो हमारे साथ लड़के थे कांस्टेबल से लेकर एडिशनल एसपी तक सभी बहुत ही अच्छे लड़के थे। उनके साथ काम करने में मजा आता था और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता था। सभी अपने अपने क्षेत्र के एक्सपर्ट थे। कठिन होता था, मुश्किल दौर होते थे लेकिन सब अच्छे से हो जाता था। शुरूआत में जब अनुभव कम था तब ऊर्जा का इस्तेमाल अधिक होता था किंतु अनुभव बढ़ने के साथ-साथ आपरेशंस में ताकत का कम, दिमाग और टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल बढ़ता गया।

सवाल: क्या एनकाउन्टर पुलिसिंग की अपरिहार्य आवश्यकता है।
जबाव: बिल्कुल नहीं।। कोई गिरोह या अपराधी लगातार संज्ञेय अपराधों को अंजाम दे रहा है, कानून-व्यवस्था के लिये सवाल बनता जा रहा है, तो स्वाभाविक रूप से पुलिस अपने दायित्व के अनुसार उसे पकड़ने, गिरफ्तार करने की कोशिश करेगी। इस कोशिश के दौरान अगर अपराधी हिंसक हो जाये, पुलिस पर हमलावर हो जाये तो विकल्प शून्यता की स्थिति में अपराधी को नियंत्रित करने के लिये पुलिस को भी वैसी ही कार्यवाही करनी पड़ती है। उसमें कभी-कभी पुलिस कर्मियों को शहादत नसीब होती है तो कभी अपराधी गोली के शिकार बनते हैं। इसलिये एनकाउन्टर एक परिस्थितजन्य कार्यवाही है। वह कोई नियोजित नहीं होती। चूंकि यह अंतिम विकल्प होता है, इसलिये कतई अपरिहार्य नहीं।
सवाल- अभी तक कितने पुरस्कारों से आपको नवाजा जा चुका है?
जवाब – ऊपर वाले की कृपा से अनेक पुरस्कार मिले हैं जिनमे मुख्यरूप से तीन बार गारंटी मेडल मिला है, पुलिस मेडल मिल चुका है, मुख्यमंत्री उत्कृष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा जा चुका हूं और दो बार तीन-तीन लाख रूपए के नगद पुरस्कार मिल चुके हैं।
सवाल-आप युवाओं को क्या सन्देश देना चाहेंगे?
जवाब -मैं आपके माध्यम से मैं युवाओं से कहना चाहता हूँ कि जीवन में कभी हार मत मानिए!!! परिस्थिति के दास नहीं उनके सृजक बनिए !! बारिश के दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते है लेकिन बाज़ बादलों के ऊपर उडकर बारिश के प्रभाव को ही निष्प्रभावी कर देते हैं। समस्याए कॉमन है, लेकिन आपका एटीट्यूड इसमें डिफरेंस पैदा करता है। इस बात का स्मरण रहे कि हमेशा ही जीवन में जीत नहीं मिलती है। हर उम्मीदवार को नौकरी नहीं मिल जाती है, हर काम पक्ष में ही नहीं हो पाता है। जीवन तो उतार चढ़ाव का नाम है। आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम, ईमानदारी तथा उच्च मानवीय मूल्यों के बिना किसी का जीवन महान नहीं बन सकता है!!

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