लेखक परिचय

राकेश कुमार आर्य

राकेश कुमार आर्य

'उगता भारत' साप्ताहिक अखबार के संपादक; बी.ए.एल.एल.बी. तक की शिक्षा, पेशे से अधिवक्ता राकेश जी कई वर्षों से देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। अब तक बीस से अधिक पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। वर्तमान में 'मानवाधिकार दर्पण' पत्रिका के कार्यकारी संपादक व 'अखिल हिन्दू सभा वार्ता' के सह संपादक हैं। सामाजिक रूप से सक्रिय राकेश जी अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति के राष्ट्रीय सलाहकार भी हैं। दादरी, ऊ.प्र. के निवासी हैं।

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 राकेश कुमार आर्य

शौर्य और साहस जिसका अद्वितीय है ।

विज्ञान ज्ञान जिसका विश्व में अवर्णनीय है ॥

ताप त्याग साधना भी जिसकी अकथनीय है ।

संदेश सत्य का जिसकी पठनीय है ॥

मेरा वतन वही है ,मेरा वतन वही है …॥ १ ॥

 

मनु सा संविधानज्ञ जिसकी अमर है ख्याति ।

गौतम कणाद जैसे मुनिवर हैं जिसकी थाती ॥

गुरु वशिष्ठ,द्रोण जैसे जिसके धर्म के साथी ।

ये दुनिया जिनके अब तक झूम-झूम गीत गाती ॥

मेरा वतन वही है,मेरा वतन वही है …॥२ ॥

 

चाणक्य महामति से जिस पुण्य धरा पै विचरे ।

विदुर की पुण्य वाणी के मोती जहां बिखरे ॥

राम और कृष्ण जैसे महामानव जहां से गुजरे ।

पतंजलि ऋषि के जहां योग मोती बिखरे ॥

मेरा वतन वही है ,मेरा वतन वही है…. ॥३॥

 

महाराणा प्रताप जैसे हुए वीर जहां नायक ।

छत्रपति शिवाजी जिसकी है ध्वजा के वाहक ॥

ऋषि दयानन्द जैसे यहाँ है वेदो के उद्धारक ।

बुद्ध-गांधी जिसकी शांति के हैं प्रचारक॥

मेरा वतन वही है ,मेरा वतन वही है….॥४॥

 

कश्मीर जिसका सिर है कन्याकुमारी पग है ।

कंधार जिसकी बाजू कामरूप भी सजग है॥

हिन्दुत्व जिसकी धड़कन आर्यत्व ही धर्म है।

उस पुण्य भारत भू को ‘राकेश’ का नमन है ॥

मेरा वतन वही है ,मेरा वतन वही है… ॥५॥

 

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1 Comment on "मेरा वतन वही है …………."

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SATYARTHI
Guest

विद्वान लेखक की कविता ने मुझे मनुस्मृति का बहुचर्चित श्लोक स्मरण करा दिया
” एतद्देशे प्रसूतस्य सकाशादाग्रजन्मनह
स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन्प्रथिव्याम सर्व मानवाः ‘
क्या कभी ऐसा समय आयेगा की हम भारतवासी अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त कर सकेंगे

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