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चौधरी मोहम्मद अयूब कटारिया 

धरती पर स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर का सीमावर्ती जिला कुपवाड़ा अपने अतीत और वर्तमान कारणों से परिचय का मोहताज नहीं है। इसी जिले में स्थित ब्लॉक करालपूरा जिसके बारे में किदवंती है कि यहां कई सदी पूर्व शलुरा से करालपूरा तक एक बहुत बड़ा बाजार हुआ करता था मगर किसी संत के श्राप के कारण यह बाजार उजड़ गया। कई बार शहर बसा और उजड़ा परंतु बाजार फिर कभी सज नहीं पाया। आज भी यहां के लोगों का विश्वा स है कि उस श्राप का प्रभाव अब भी बरकरार है। क्योंकि जब जब इस बाजार में रौनक होती है तो कभी कहीं आग लग जाती है अथवा कोई तूफान इसकी बर्बादी का कारण बन जाता है और फिर यह बाजार अपनी पुरानी हालत में लौट आता है। इस ब्लॉक में सदियों से विभिन्न क्षेत्रों से आकर बसे लोग मिलकर निवास करते हैं। यहां आज भी कई भाषाएं बोली जाती हैं। जिनमें गुर्जर जिसे गुर्जर बकरवाल समुदाय से संबंध रखने वाले बोलते हैं, पारमी अथवा पहाड़ी जो पहाड़ी समुदाय से संबंध रखने वालों की भाषा है, कश्मीर से संबंध रखने वाले समुदाय कश्मी री तथा कोहीस्तानी भाषा भी बोली जाती है जिनके बारे में माना जाता है कि इस भाषा को बोलने वाले कश्मीभर के अन्य क्षेत्रों से पलायन करके आए हैं। परंतु क्षेत्र की आधिकारिक भाषा उर्दू है और इसी भाषा में सभी सरकारी कार्यों का निपटारा किया जाता है।

इस ब्लॉक की सीमा किरण, करनाह, तिहरगाम और हिंदवाड़ा से मिलती है। ब्लॉक में प्रवेश करते ही एक पहाड़ आता है जिसे स्थानीय भाषा में खज़ानमट कहा जाता है जिसका अर्थ सोने की मिटटी अथवा बर्तन है। शायद इसकी वजह यह भी हो सकती है कि यहां की अधिकतर आबादी अपना रोजगार इसी पहाड़ से पत्थर निकालकर करती है। इसके दक्षिण में एक झरना है जिसे शफानाग के नाम से पुकारा जाता है। माना जाता है कि यदि मरीज इस झरना में नहा ले तो वह जल्द ही ठीक हो जाता है। इस झरना को प्रसिद्ध सूफी संत बाबा अब्दुल्ला से जोड़कर देखा जाता है। जबकि जिला हेडक्वाटर से 12 किलोमीटर दूर एक और प्रसिद्ध झरना मौजूद है जिसे शंभूनाग कहा जाता है। यह झरना हिंदु और मुसलमान दोनों के लिए समान रूप से पवित्र माना जाता है क्योंकि झरना के करीब ही हजरत शेख बाबा शमनागी साहब के नाम से जाना जाता है। बाबा शमनागी को एक बहुत बड़े ज्ञानी संत के रूप में सम्मान प्राप्त है। जहां प्रत्येक वर्ष उर्स में सभी समुदाय के लोग आस्था के साथ बाबा के मजार पर हाजरी देते हैं।

हसरत करालपूरी जिनका पूरा नाम अब्दुलगनी मीर था, करालपूरा से ही संबंध रखने वाले एक प्रसिद्ध शायर थे। इनकी शायरी के छोटे छोटे संग्रह काफी पंसद किए जाते हैं। इनका जन्म 1912 ई में हुआ था और 76 वर्ष की आयु में 1988 में इनकी मृत्यु हुई थी। एक अन्य विद्वान डॉक्टर मुनव्वर मसूदी जिनका जिक्र अब्दुल गनी बैग अतहर ने अपनी पुस्तक ‘कुपवाड़ा द क्राउन ऑफ कश्मीर‘ में किया है, इसी इलाका शमनाग से संबंध रखते थे। जिला के वर्तमान विधायक मीर सैफुल्ला भी इसी शमनाग से संबंध रखते हैं। करालपूरा से लगभग तीन किलोमीटर तथा शमनाग से दक्षिण में स्थित शलुरा भी अपने एतिहासिक कारणों से प्रसिद्ध रहा है। जहां सुल्तान आरफीन द्वारा बनवाए गए मस्जिद और दो झोपडि़यां दर्शनीय है। इनमें एक झोपड़ी संत बाबा अब्दुल्ला गाजी की थी। जो विद्वान होने के साथ साथ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में लोगों के बीच कार्य किया करते थे। माना जाता है कि बाबा अब्दुल्ला गाजी ने 360 बाग, 360 मस्जिद, 360 सराय, 360 झरने तथा छोटे बड़े 360 पुल बनवाए थे। इनके शिष्‍य शाह अब्दुल कुददुसी जो फारसी भाषा के एक बड़े शायर थे, उन्होंने बाबा अब्दुल्ला गाजी के करामात पर एक लंबी कविता लिखी है। इनके एक अन्य शिष्य बाबा मूसा को कश्मीरी भाषा का प्रसिद्ध शायर माना जाता है। जिन्होंने कश्मी‍र की सुंदरता पर कई कविताएं लिखीं हैं। यहां प्रत्येक वर्ष स्थानीय कैलेंडर के अनुसार 17 हाड़ बकरमी को एक मेला लगता है। इतना शानदार अतीत रखने वाले इस ब्लॉक को आज भी कई प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाली कहमल नदी में प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत का कारण बनता है। यह क्षेत्र अब भी शिक्षा, स्वास्थ्य, अस्पताल, बिजली, सड़क तथा पीने के साफ पानी के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से काफी उन्नत है। एतिहासिक इमारतों और स्मारकों के साथ साथ यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से भी काफी सुंदर है। यदि केंद्र तथा राज्य सरकार इस दिशा में मजबूत कदम उठाए तो यहां पर्यटन का काफी बढ़ावा मिल सकता है। आवश्याकता इस बात की है कि यहां बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा किया जाए तथा देश विदेश के पर्यटकों को यहां की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से जानने के लिए प्रेरित किया जाए। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से न सिर्फ स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि कई तरह की समस्याओं का भी निदान संभव हो सकेगा। (चरखा फीचर्स)

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