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– अखिलेश आर्येन्दु

ताजा शोध से पता चला है कि नेता जी की पलकों का बेहिसाब झपकने के कारण दिल्ली में रेडिऐशन की समस्या खड़ी हुई है। जब तक नेता जी पलकें उतान रखते थे तब तक ऐसी किसी भी समस्या की संभावना तक नहीं थी। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने नेता जी की पलकों के झपकने पर एक कमेटी का गठन कर दिया है जो यह पता लगाएगी कि नेता जी की पलकों के झपकने और बढ़ती देश में रेडिएशन की समस्या से क्या ताल्लुकात हो सकता र्हैं। साथ ही सरकार ने इसी के साथ जनहित में एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाने का फैसला किया है जिससे सबसे यह सुझाव मांगा जा सके कि नेताजी की पलकों के झपकने और लोकतंत्र से इससे संभावित खतरें से कैसे निपटा जा सकता है। जाहिरातौर पर नेताजी के पलकों के बेहिसाब झपकने के मद्देनजर अमेरिका, आस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कई विकसित देशों ने इस पर शोध कराया। शोध से पता चला है कि जिस नेता की पलकें बेहिसाब झपकतीं हैं उससे देश की सुरक्षा-व्यवस्था को खतरा हो सकता है। सरकार इस पर गहन जांच-पड़ताल शुरु कर चुकी है कि किस नेता कि पलकें बेहिसाब झपकतीं हैं और किनकी हिसाब से।

दरअसल, पलकों के झपकने का ताल्लुक प्यार-वार से सदियों से जोड़ा जाता रहा है। फलित ज्योतिषी इसको सगुन-अपसगुन से जोड़ते रहे हैं। गांवों में इसे किसी मेहमान के आने से भी जोड़कर देखा जाता रहा है। लेकिन ताजा शोध इन परंपरागत धारणाओं का खंडन करता है। और यह दावा करता है कि इसका सीधा संबंध समस्याओं के रेडिएशन से है। भाई, जब पलकों से प्यार और इकरार का रेडिएशन हो सकता है तो समस्याओं का क्यों नहीं हो सकता? इस नजरिए से ताजा शोध सही साबित होता है। सरकार ने इस संबंध में जो समिति गठित करने और सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है उसकी सभी को तहेदिल से खैरमकदम करनी चाहिए।

वैसे अपना भारत हर मामले में महान है और महान रहेगा। इसलिए नेताजी की पलकों का कमाल करना कोई ताज्जुब की बात नहीं है। एक समय की बात है। अपने देशभक्त नेता जी विदेश दौरे पर गए। उनका विदेश दौरे पर जाना एक ऐतिहासिक घटना थी। ऐतिहासिक इस लिए क्योंकि इसके पहले विदेश जाना वे अपसगुन मानते थे। उनके फेमिली ज्योतिषी ने उन्हें सावधान किया था कि विदेश दौरे पर जाने का मतलब कुर्सी से बेदखल होना। तो वे, विदेश में जिस होटल में ठहरे थे वहां पर क्यूट रेडिएशन की समस्या पैदा हो गई थी। शोध के बाद पता चला कि इंडिया पोलेटिशीयन की पलकों में यह घातक तत्व था जिससे इतनी विकट समस्या पैदा हुई। लौटकर जब वे इंडिया आए तो खबर फैली कि नेताजी ने एक नए तत्व ‘रेडिएशन’ का विदेश गमन के दौरान खोज की, जिसने दुनिया के वैज्ञानिकों में हलचल पैदा कर दी है। इसी तरह नेता जी विदेश दौरे पर जाते रहे और नए-नए तत्वों की खोज करते रहे। देश को ऐसे महान नेता पर गर्व का अनुभव करना चाहिए। जाहिरातौर पर ऐसे नेताओं के लिए ऐसे शब्द ही नहीं हैं जो उनकी महानता के गुणगान में इस्तेमाल किए जा सकें। धन्य हैं नेताजी और धन्य हैं उनकी महान पलकें।

जिन नए तत्वों का विदेश दोरे के दौरान नेताजी ने खोजा था आज उनकी दुनिया के कई देशों में अच्छी मांग है, ऐसी खबर विश्वस्त सूत्रों से मिली है। लेकिन उनके ही किसी दाहिने हाथ कहे जाने वाले साथी ने उनकी पलकों के रेडिएशन की खबर लीक कर दी। जिससे सरकार ने एक समिति के जरिए सच्चाई का पता लगाने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले की चारों ओर वाहवाही हो रही है। ऐसी संभावना है, इससे देश में बढ़ रहे आतंकवाद, भ्रष्टाचार, बलात्कार, बेरोजगारी, अशिक्षा और कुपोषण पर लगाम लगाई जा सकेगी। लेकिन सर्वदलीय समिति ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। समिति के मुताबिक पलकों के जरिए रेडिएशन विश्व की पहली घटना है। इससे दुनियाभर में देश का नाम रोशन हुआ है। इसलिए नेताजी को इस महान कार्य के लिए ‘भारतरत्न’ से पुरस्कृत किया जाना चाहिए। एक राय इस संबंध में यह भी है कि नेताजी की पलकें प्रीती जिंटा की अदाओं के समान प्रभावशाली हैं, इस लिए इस बार का फाल्के पुरस्कार उन्हें मिलना चाहिए। इससे पुरस्कार की गरिमा में बृद्धि होगी। इस तरह उनकी पलकों के ‘रेडिएशन’ पर कई तरह के विचार संप्रेषित किए जा चुके हैं। अब देखना यह है कि पलकों के रेडिएशन पर चल रहे चर्चाओं, विवादों और संवादों पर कोई एक राय बन पाती है कि नहीं। अथवा उनकी पलकें यूं ही उनीदीं रह जाएंगी? यह चर्चा जन संसद में बहुत तीव्र गति से चल रही है। आशा है सरकार इस पर करीब से नजर रख रही है और जल्दी ही कोई हल निकाल लिया जाएगा। और बढ़ रही तमाम तरह की रेडिएशन की समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकेगी।

* लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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